मधेपुरा में 23 साल बाद हत्यारोपी बरी:ढाई साल से जेल में था बंद, नौ गवाह भी दोष साबित नहीं कर पाए

मधेपुरा में 23 साल बाद हत्यारोपी बरी:ढाई साल से जेल में था बंद, नौ गवाह भी दोष साबित नहीं कर पाए

मधेपुरा में करीब 23 साल पुराने एक हत्याकांड में गुरुवार को अदालत ने आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। यह मामला 26 फरवरी 2003 का है, जब पुरैनी थाना क्षेत्र के झोटियाही बहियार में मंटुन मेहता एक पोखर से पंपसेट के जरिए पानी निकालकर मछली मार रहे थे। इसी दौरान अज्ञात अपराधियों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। इस संबंध में मृतक के भाई पवन कुमार मेहता के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान सपरदह वार्ड सात निवासी शेख मंटू उर्फ मो. परवेज का नाम सामने आया था। इसके बाद अदालत में इस मामले की लंबी सुनवाई चली। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल नौ गवाहों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। हालांकि, दो दशक से अधिक समय बीत जाने और पुख्ता सबूतों की कमी के कारण अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहा। बचाव पक्ष की ओर से बहस करते हुए चीफ एलएडीसीएस सीपी चंदन ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया था। पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्य भी अपर्याप्त पाए गए। साक्ष्य के अभाव में एडीजे-4 धीरेंद्र राय की अदालत ने आरोपी शेख मंटू को रिहा करने का आदेश दिया। आरोपी शेख मंटू उर्फ मो. परवेज करीब ढाई साल से जेल में बंद था। गुरुवार को न्यायालय ने उसे सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। मधेपुरा में करीब 23 साल पुराने एक हत्याकांड में गुरुवार को अदालत ने आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। यह मामला 26 फरवरी 2003 का है, जब पुरैनी थाना क्षेत्र के झोटियाही बहियार में मंटुन मेहता एक पोखर से पंपसेट के जरिए पानी निकालकर मछली मार रहे थे। इसी दौरान अज्ञात अपराधियों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। इस संबंध में मृतक के भाई पवन कुमार मेहता के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान सपरदह वार्ड सात निवासी शेख मंटू उर्फ मो. परवेज का नाम सामने आया था। इसके बाद अदालत में इस मामले की लंबी सुनवाई चली। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल नौ गवाहों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। हालांकि, दो दशक से अधिक समय बीत जाने और पुख्ता सबूतों की कमी के कारण अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहा। बचाव पक्ष की ओर से बहस करते हुए चीफ एलएडीसीएस सीपी चंदन ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया था। पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्य भी अपर्याप्त पाए गए। साक्ष्य के अभाव में एडीजे-4 धीरेंद्र राय की अदालत ने आरोपी शेख मंटू को रिहा करने का आदेश दिया। आरोपी शेख मंटू उर्फ मो. परवेज करीब ढाई साल से जेल में बंद था। गुरुवार को न्यायालय ने उसे सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।  

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