Jhunjhunu Affordable Housing Scheme: झुंझुनूं के मंड्रेला रोड स्थित अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी के तहत आवास उपलब्ध कराने से जुड़े मामले में न्यायालय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग झुंझुनूं ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग के पूर्व आदेशों की पालना नहीं होने पर आयोग ने प्रसंज्ञान लेते हुए वर्तमान व तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों को तलब किया है।
यह मामला करीब 1536 लोगों के आवास से जुड़ा हुआ है। इनमें से सैकड़ों लोगों ने आवास नहीं मिलने और जमा राशि वापस नहीं होने पर उपभोक्ता आयोग में प्रकरण दर्ज कराए थे। इन प्रकरणों में आयोग ने फैसला देते हुए संबंधित पक्षों को रहने योग्य आवास उपलब्ध कराने या जमा की गई राशि ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए थे।
आयोग के आदेशों के बावजूद पालना नहीं होने पर अब जिला कलक्टर डॉ. अरुण गर्ग, प्रशासक एवं एडीएम अजय कुमार आर्य, नगर परिषद आयुक्त देवीलाल बोचल्या, तत्कालीन एसडीएम हवाईसिंह यादव, वर्तमान एसडीएम कौशल्या विश्नोई और तहसीलदार महेंद्रसिंह मूंड आदि को तलब किया गया है। आयोग ने इन सभी को सम्मन भिजवाए हैं।
साथ ही पुलिस अधीक्षक को पांच दिन के भीतर समन की तामील करवाकर पालना रिपोर्ट आयोग के समक्ष पेश करने के लिए कहा गया है। इस मामले में प्रशासन की ओर से राज्य आयोग और बाद में राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में अपील की गई थी। लेकिन दोनों ही स्थानों पर अपील खारिज हो गई।
इसके साथ ही झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग के फैसले को यथावत रखा गया। मामले में यह भी आरोप है कि जिस जमीन को न्यायालय के नाम कुर्क किया गया था, उसे बाद में खुली बोली लगाकर बेच दिया गया। इससे करोड़ों रुपए की आय हुई, लेकिन इसके बावजूद आयोग द्वारा निर्धारित अवार्ड राशि की वसूली जिम्मेदार अधिकारियों ने नहीं की और उपभोक्ता आयोग की अवार्ड राशि को नगर परिषद ने जमा नहीं कराया।
इससे व्यथिथ होकर पीडि़त दिलीप कुमार ने उपभोक्ता आयोग में धारा 72 के तहत दंडात्मक कार्रवाई के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। इसपर जिला आयोग ने भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए आयोग के आदेश की अवहेलना करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध प्रसंज्ञान लेते हुए आदेश पारित किया है। उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत कानूनी कार्रवाई की है।
इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक का कारावास व एक लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। आयोग ने पहले नगर परिषद को यह स्वतंत्रता भी दी थी कि वह रूडिसको और असाही इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट प्रबंधन से राशि की वसूली कर सके, लेकिन अब तक कोई वसूली नहीं की गई।
उल्लेखनीय है कि कुर्क जमीन डाइट के सामने स्थित है। मामले की सुनवाई उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष एवं पीठासीन अधिकारी मनोज मील और सदस्य प्रमेन्द्र सैनी ने की तथा आदेश पारित कर संबंधित अधिकारियों को तलब कर 13 मार्च को हाजिर होने के लिए कहा गया है।


