झारखंड की राजधानी रांची में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए गुरुवार को समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। यह धमकी ई-मेल के जरिए भेजी गई, जिसमें ‘सल्फर नाइट्रेट’ आधारित विस्फोटक के इस्तेमाल का दावा किया गया। सूचना मिलते ही प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया तथा पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में लेकर व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया।
ई-मेल में बड़ा दावा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, धमकी भरे ई-मेल में कहा गया कि कलेक्ट्रेट परिसर को उड़ाने के लिए ‘सल्फर नाइट्रेट’ आधारित बम लगाया जा सकता है। संदेश में यह भी दावा किया गया कि बम निरोधक दस्ता (BDDS) भी इस विस्फोटक का पता नहीं लगा सकेगा। ई-मेल की भाषा और उसमें किए गए दावों को गंभीर मानते हुए पुलिस ने तत्काल उच्चस्तरीय सुरक्षा कदम उठाए।
भारी पुलिस बल मौजूद
कोतवाली डीएसपी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल, बम निरोधक दस्ता और खोजी कुत्तों की टीम मौके पर पहुंची। समाहरणालय परिसर के प्रशासनिक भवन, विभिन्न शाखाओं के कार्यालय, रिकॉर्ड रूम, पार्किंग एरिया और अन्य संवेदनशील स्थलों की अत्याधुनिक उपकरणों से गहन जांच की गई। परिसर में प्रवेश करने वाले लोगों की सख्ती से तलाशी ली गई और अनावश्यक आवाजाही पर रोक लगा दी गई। मुख्य प्रवेश द्वारों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।
कर्मचारियों को किया गया सतर्क
सुरक्षा के मद्देनजर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और भी सख्त कर दी गई है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों को भी विशेष सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है।
अब तक नहीं मिला कोई विस्फोटक
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में समाहरणालय परिसर से कोई विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई है। हालांकि, पूरी जांच समाप्त होने तक सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में रहेंगी और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
6 फरवरी को सिविल कोर्ट को भी मिली थी धमकी
गौरतलब है कि इससे पहले 6 फरवरी को रांची स्थित सिविल कोर्ट को भी ई-मेल के माध्यम से बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। उस दौरान घंटों चली तलाशी के बाद कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को स्थायी रूप से कड़ा कर दिया गया था।
साइबर सेल सक्रिय
ताजा मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर सेल को भी सक्रिय कर दिया गया है। धमकी भरे ई-मेल के स्रोत, आईपी एड्रेस और सर्वर की तकनीकी जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पड़ताल की जा रही है कि सिविल कोर्ट और कलेक्ट्रेट को मिली धमकियों के बीच कोई कनेक्शन तो नहीं है।


