बढ़ती ठंड और शीतलहर की गंभीर स्थिति को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग और दरभंगा के जिलाधिकारी कौशल कुमार के निर्देशानुसार दरभंगा जिले के सभी अंचलों में आमजन को राहत पहुंचाने के लिए व्यापक व्यवस्था की गई है। अंचलाधिकारियों के माध्यम से जिले के प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। प्रशासन की इस पहल से विशेषकर गरीब, असहाय, वृद्ध एवं जरूरतमंद लोगों को कड़ाके की ठंड से राहत मिल रही है। सभी अंचलाधिकारियों को अलाव की नियमित निगरानी करने तथा आवश्यकता के अनुसार लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। 138 जगहों पर ठंड से राहत के लिए जलाया गया अलाव प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार आज जिले के कुल 138 स्थानों पर अलाव जलाया जा रहा है। इसके लिए आज 26.61 क्विंटल लकड़ी का उपयोग किया गया, जबकि अब तक कुल 165 क्विंटल लकड़ी जलाई जा चुकी है। सहायक निदेशक आपदा ने बताया कि समाज कल्याण विभाग की ओर से सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को 5171 कंबल उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि जरूरतमंदों के बीच उनका वितरण किया जा सके। जिला प्रशासन की ओऱ से शीतलहर से बचाव को लेकर लगातार निगरानी की जा रही है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि हीटर, गीजर और ब्लोअर जैसे उपकरणों का उपयोग सावधानीपूर्वक करें तथा सोने से पहले अलाव या अंगीठी को पूरी तरह बुझा दें। उपनिदेशक जनसंपर्क दरभंगा प्रमंडल सत्येंद्र प्रसाद ने चेतावनी देते हुए कहा कि घर के कमरे के अंदर कभी भी बोरसी या जलती हुई अंगीठी रखकर न सोएं, यह जानलेवा हो सकता है और आग लगने की घटनाओं का भी कारण बन सकता है। डीएम ने कड़ाके की ठंड में किया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण इसी क्रम में जिलाधिकारी कौशल कुमार ने गंगवाड़ा स्थित नवनिर्मित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सदर दरभंगा का कड़ाके की ठंड के बावजूद निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान उन्होंने भवन की स्थिति,उपलब्ध सुविधाओं तथा मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया। जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन दरभंगा एवं डीपीएम (स्वास्थ्य) को निर्देश दिया कि नए भवन में स्वास्थ्य से जुड़ी सभी मौलिक एवं आवश्यक सुविधाएं शीघ्र सुनिश्चित की जाएं, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बेहतर, सुगम और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि नए स्थल पर ओपीडी और ऑपरेशन की सुविधा शुरू कर दी गई है तथा दो दिनों के भीतर सभी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने ओपीडी, पैथोलॉजी कक्ष, दवा काउंटर सहित विभिन्न वार्डों का भी अवलोकन किया। नए स्थल पर 100 बेड की फैब्रिकेटेड सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बताया गया कि इस स्वास्थ्य केंद्र के संचालन से आसपास के क्षेत्रों के लोगों को काफी सुविधा मिलेगी। वहीं पुराने स्थल पर भी ओपीडी सेवा जारी रहेगी। स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को एनएनसी, प्रसव सेवा, महिला बंध्याकरण, टीकाकरण, नवजात शिशु देखभाल, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी जैसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होंगी, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार होगा। निरीक्षण के अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार, डीपीएम स्वास्थ्य प्रभात राजू, डीसीएम रवि कुमार, डैम वसंत कुमार सहित अन्य पदाधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे। निरीक्षण के उपरांत जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य केंद्र परिसर में जल-जीवन-हरियाली के तहत पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की। बढ़ती ठंड और शीतलहर की गंभीर स्थिति को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग और दरभंगा के जिलाधिकारी कौशल कुमार के निर्देशानुसार दरभंगा जिले के सभी अंचलों में आमजन को राहत पहुंचाने के लिए व्यापक व्यवस्था की गई है। अंचलाधिकारियों के माध्यम से जिले के प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। प्रशासन की इस पहल से विशेषकर गरीब, असहाय, वृद्ध एवं जरूरतमंद लोगों को कड़ाके की ठंड से राहत मिल रही है। सभी अंचलाधिकारियों को अलाव की नियमित निगरानी करने तथा आवश्यकता के अनुसार लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। 138 जगहों पर ठंड से राहत के लिए जलाया गया अलाव प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार आज जिले के कुल 138 स्थानों पर अलाव जलाया जा रहा है। इसके लिए आज 26.61 क्विंटल लकड़ी का उपयोग किया गया, जबकि अब तक कुल 165 क्विंटल लकड़ी जलाई जा चुकी है। सहायक निदेशक आपदा ने बताया कि समाज कल्याण विभाग की ओर से सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को 5171 कंबल उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि जरूरतमंदों के बीच उनका वितरण किया जा सके। जिला प्रशासन की ओऱ से शीतलहर से बचाव को लेकर लगातार निगरानी की जा रही है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि हीटर, गीजर और ब्लोअर जैसे उपकरणों का उपयोग सावधानीपूर्वक करें तथा सोने से पहले अलाव या अंगीठी को पूरी तरह बुझा दें। उपनिदेशक जनसंपर्क दरभंगा प्रमंडल सत्येंद्र प्रसाद ने चेतावनी देते हुए कहा कि घर के कमरे के अंदर कभी भी बोरसी या जलती हुई अंगीठी रखकर न सोएं, यह जानलेवा हो सकता है और आग लगने की घटनाओं का भी कारण बन सकता है। डीएम ने कड़ाके की ठंड में किया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण इसी क्रम में जिलाधिकारी कौशल कुमार ने गंगवाड़ा स्थित नवनिर्मित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सदर दरभंगा का कड़ाके की ठंड के बावजूद निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान उन्होंने भवन की स्थिति,उपलब्ध सुविधाओं तथा मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया। जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन दरभंगा एवं डीपीएम (स्वास्थ्य) को निर्देश दिया कि नए भवन में स्वास्थ्य से जुड़ी सभी मौलिक एवं आवश्यक सुविधाएं शीघ्र सुनिश्चित की जाएं, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बेहतर, सुगम और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि नए स्थल पर ओपीडी और ऑपरेशन की सुविधा शुरू कर दी गई है तथा दो दिनों के भीतर सभी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने ओपीडी, पैथोलॉजी कक्ष, दवा काउंटर सहित विभिन्न वार्डों का भी अवलोकन किया। नए स्थल पर 100 बेड की फैब्रिकेटेड सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बताया गया कि इस स्वास्थ्य केंद्र के संचालन से आसपास के क्षेत्रों के लोगों को काफी सुविधा मिलेगी। वहीं पुराने स्थल पर भी ओपीडी सेवा जारी रहेगी। स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को एनएनसी, प्रसव सेवा, महिला बंध्याकरण, टीकाकरण, नवजात शिशु देखभाल, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी जैसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होंगी, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार होगा। निरीक्षण के अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार, डीपीएम स्वास्थ्य प्रभात राजू, डीसीएम रवि कुमार, डैम वसंत कुमार सहित अन्य पदाधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे। निरीक्षण के उपरांत जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य केंद्र परिसर में जल-जीवन-हरियाली के तहत पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की।


