ADJ Transfer: 191 न्यायिक सेवा के ADJ स्तर के अधिकारियों का तबादला,हाईकोर्ट ने जारी की लिस्ट

ADJ Transfer: 191 न्यायिक सेवा के ADJ स्तर के अधिकारियों का तबादला,हाईकोर्ट ने जारी की लिस्ट

ADJ Transfer High Court released list: प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं चुस्त-दुरुस्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीशों (ADJ) के वार्षिक स्थानांतरण-2026 की पहली सूची जारी कर दी है।

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इस सूची में 100 से अधिक न्यायिक अधिकारियों का तबादला किया गया है। इसे “फुल रेडीनेस लिस्ट” के रूप में जारी किया गया है, जिसका उद्देश्य न्यायालयों में कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करना और लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाना है।

15 अप्रैल तक कार्यभार छोड़ने के निर्देश

हाईकोर्ट के महानिबंधक द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन (संख्या 191/Admin (Services)/2026) में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जिन अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है, वे 15 अप्रैल 2026 की दोपहर तक अपने वर्तमान पद का कार्यभार छोड़ दें। इसके तुरंत बाद उन्हें अपने नए तैनाती स्थल पर जाकर कार्यभार ग्रहण करना होगा। इसके साथ ही यह भी निर्देशित किया गया है कि स्थानांतरण आदेश प्रभावी रहने तक किसी भी प्रकार के स्थानांतरण संबंधी आवेदन को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

प्रमुख जिलों में बड़े स्तर पर बदलाव

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इस ट्रांसफर सूची में कई प्रमुख जिलों के न्यायिक अधिकारी शामिल हैं। आगरा, लखनऊ, वाराणसी, अलीगढ़ और गौतम बुद्ध नगर जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर तबादले किए गए हैं। इन तबादलों से इन जिलों की न्यायिक व्यवस्था में नए सिरे से कार्य वितरण और दक्षता बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है।

आगरा से 11 न्यायाधीशों का स्थानांतरण

आगरा जनपद से कुल 11 न्यायाधीशों का स्थानांतरण किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से श्रीमती प्रतिभा सक्सेना-I को मुजफ्फरनगर, ज्ञानेंद्र राव को महाराजगंज और संजय के. लाल को गाजीपुर भेजा गया है। यह बदलाव प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आगरा एक बड़ा न्यायिक केंद्र है।

लखनऊ और नोएडा में भी बदलाव

राजधानी लखनऊ में भी न्यायिक अधिकारियों के स्तर पर परिवर्तन किए गए हैं। अलीगढ़ से ज्ञानेंद्र सिंह-II को लखनऊ स्थानांतरित किया गया है, जिससे राजधानी में न्यायिक कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है। वहीं, गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) से प्रतीक्षा नगर और विकास नगर को गोरखपुर भेजा गया है।

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दंपत्ति न्यायाधीशों को एक साथ तैनाती

इस बार की स्थानांतरण सूची में मानवीय पहलुओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है। पति-पत्नी न्यायाधीशों (Spouse Case) को एक ही जिले में तैनाती दी गई है, ताकि उन्हें पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखने में सुविधा हो। उदाहरण के तौर पर, आजमगढ़ में तैनात संतोष कुमार यादव और उनकी पत्नी संदीपा यादव का तबादला एक साथ बरेली किया गया है। इसी प्रकार, गाजियाबाद से गौरव शर्मा और उनकी पत्नी नीतू पाठक को वाराणसी भेजा गया है।

प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

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स्थानांतरण सूची में कुछ अधिकारियों को महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर भी नियुक्त किया गया है। कानपुर नगर से विनय सिंह को शासन में OSD, SALSA (लखनऊ) के पद पर तैनात किया गया है। वहीं, बाराबंकी से नीतिश कुमार राय को विशेष सचिव एवं अपर विधि परामर्शी (न्याय विभाग) के रूप में लखनऊ भेजा गया है। इन नियुक्तियों से प्रशासनिक कार्यों में दक्षता आने की उम्मीद है।

न्यायिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम

सूत्रों के अनुसार, इस तरह के बड़े पैमाने पर स्थानांतरण न्यायिक सुधारों का हिस्सा होते हैं। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आती है और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित होती है। नई तैनाती से अधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों का अनुभव भी मिलता है, जो उनके पेशेवर विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है।

लंबित मामलों के निस्तारण में आएगी तेजी

प्रदेश के जिला न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या एक बड़ी चुनौती रही है। हाईकोर्ट द्वारा किए गए इन तबादलों से उम्मीद की जा रही है कि न्यायिक अधिकारियों के नए सिरे से कार्य विभाजन से मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी। इसके साथ ही न्यायालयों में कार्यभार संतुलित करने में भी मदद मिलेगी।

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जल्द जारी होगी विस्तृत अधिसूचना

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस स्थानांतरण आदेश के संबंध में विस्तृत अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी। इसमें सभी अधिकारियों के नाम, नई तैनाती और अन्य प्रशासनिक निर्देशों का पूरा विवरण उपलब्ध कराया जाएगा।

न्यायिक व्यवस्था को नई दिशा

उत्तर प्रदेश में 100 से अधिक एडीजे अधिकारियों के स्थानांतरण का यह निर्णय न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल न्यायालयों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि आम जनता को भी समय पर न्याय मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में इस फैसले का सकारात्मक प्रभाव प्रदेश की न्याय प्रणाली पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।

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