एडीजी (रेलवे) आईपीएस सुष्मित विश्वास बीते दो दिनों से बाड़मेर बालोतरा दौरे पर है। गुरुवार को उन्होंने जीआरपी पुलिस थाना बाड़मेर का निरीक्षण किया। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद उन्होंने जीआरपी, आरपीएफ, के साथ रेलवे में अपराध व कानून व्यवस्था को लेकर समन्वय बैठक ली। इससे पहले दो दिन बालोतरा, बाड़मेर जिले की जीआरपी चौकियों का निरीक्षण किया। वहीं मुनाबाव रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। एडीजी आईपीएस सुष्मित विश्वास ने मीडिया बातचीत में कहा- हमारा मकसद है कि जीआरपी पुलिस का बाकी सरकारी सुरक्षा एजेसियों के साथ समन्वय बैठाना है। जीआरपी का कर्तव्य और ड्यूटी है वो आइसोलेंट नहीं है। इसमें हमारे जो पार्टनर है जैसे आरपीएफ, रेलवे विभाग, आबकारी, एनसीबी और गैर सरकारी संस्था जैसे एनजीओ उनका भी काफी महत्वपूर्ण योगदान रहता है। जिससे क्राइम पर नियंत्रण और हमारे पैसेंजर उनकी सिक्योरिटी के भाव में बढ़ोत्तरी हो। ट्रेन में कोई पैसेंजर चल रहा है उनमें सुरक्षा भाव हो। आपस में रेलवे और पैसेंजर के बीच दूरी कम हो। विश्वास ने बताया- राजस्थान और भारत सरकार की ओर से कई तकनीकी चीजे अपग्रेड हुई है। अलग-अलग एप्स है। उसको हम थाना और चौकी लेवल तक बढ़ा सकें इसके लिए हमारा प्रयास है। 1983 के बाद जीआरपी के नफरी में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुआ है। लेकिन अभी राजस्थान में प्रतिदिन कम से कम 9 लाख पैसेंजर ट्रेन में सफर करते है। हमारी ड्यूटी 9 लाख पैसेंजर के लिए है। करीब साढ़े उन्नसी सौ ट्रेन प्रदेश में हर दिन चलती है। इसके अलावा मालगाड़ी भी चलती है। उसकी भी सिक्योरिटी हम लोग देखते है। इसके लिए हमें स्मार्ट पुलिसिंग करनी पड़ेगी। एडीजी विश्वास ने कहा कि बाड़मेर में क्राइम की संख्या कम है। थाने में इस साल 8 मामले दर्ज हुए है। जिसमें 2 का निस्तारण कर दिए है। शेष मामले में बड़े क्राइम की श्रेणी में नहीं आते है। पिछले साल 24 मामले थे। मृग केस में अगर किसी की पहचान नहीं होती है तो डीएनए को रखा जाएगा। गुमशुदगी के मामले फिलहाल जीरो है।


