Karan Johar Talent Agency: फिल्म सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी से कुछ दिनों पहले सुर्खियों में बनी एक्टर जान्हवी कपूर, जिनका करियर पहले करण जौहर की धर्मा कॉर्नरस्टोन आर्टिस्ट एजेंसी (DCAA) मैनेज कर रही थी, जो अब नहीं करने वाली है। हाल ही में एक इंटरव्यू में फेमस फिल्ममेकर करण जौहर ने अपने टैलेंट मैनेजमेंट की दुनिया की सच्चाई पर खुलकर बात की, जिसमें उन्होंने कहा कि ये काम थैंकलेस यानी बिना तारीफ वाला होता है क्योंकि इस इंडस्ट्री में लॉयल्टी बहुत कम देखने को मिलती है।
इंडस्ट्री इतनी कॉम्पिटिटिव है कि स्टार्स वफादार नहीं रहते
करण जौहर ने बताया कि कई स्टार्स कुछ सालों बाद अपनी एजेंसी बदल लेते हैं। जैसे कि जान्हवी कपूर ने अपनी एजेंसी धर्मा कॉर्नरस्टोन आर्टिस्ट एजेंसी छोड़कर कलेक्टिव आर्टिस्ट नेटवर्क ज्वाइन किया है। इससे पहले भी रणवीर सिंह और परिणीति चोपड़ा जैसे स्टार YRF की टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसी को छोड़ चुके हैं। करण के मुताबिक, ये इंडस्ट्री इतनी कॉम्पिटिटिव है कि स्टार्स किसी के भी प्रति वफादार नहीं रहते। वे बेहतर मौके ढुंढते रहते हैं और इसी दौरान एजेंसी बदलते रहते हैं।
इतना ही नहीं, करण जौहर ने आगे बताया, ‘हर 2 साल में जब स्टार्स एजेंसी बदलते हैं तो ये टैलेंट मैनेजर के लिए एक बड़ा चैलेंज होता है। टैलेंट मैनेजमेंट का 90% काम लोगों के ईगो और असुरक्षा को संभालने का होता है, जो बिल्कुल आसान काम नहीं होता।” करण जौहर ने ये भी बताया कि अब केवल स्टार्स से कमीशन लेकर पैसा कमाना मुश्किल हो गया है। इसलिए कई एजेंसियां अपने कलाकारों के साथ इक्विटी पार्टनरशिप कर रही हैं, ताकि दोनों पक्ष मिलकर बिजनेस को बढ़ा सकें और मुनाफा कमा सकें। इस पर करण ने साफ किया और कहा, “एक्टर्स इनसिक्योर और लॉयल नहीं हैं, इसलिए सिर्फ कमीशन से काम नहीं चलता।”
टैलेंट मैनेजमेंट कोई साधारण काम नहीं है
करण जौहर की एजेंसी में रोहित सराफ, सारा अली खान, शनाया कपूर जैसे कई स्टार्स हैं। तो वहीं उन्होंने अपनी बिजनेस पार्टनर अदार पूनावाला के बारे में बताते हुए कहा कि अदार भी बिजनेसमैन हैं और संभव है कि वे कुछ साल बाद इस डील से बाहर निकलना चाहें, लेकिन अभी के लिए ये साझेदारी उनके लिए संतोषजनक और क्रिएटिव डाइवर्सिफिकेशन का जरिया है।
इस पर करण जौहर का ये साफ कहना है कि टैलेंट मैनेजमेंट कोई साधारण काम नहीं है बल्कि इसमें सफलता और असफलता के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। 31 साल के अनुभव के बाद वे अब जेन Z की तरह सोचते हैं और मानते हैं कि किसी की खुशी या दुख उसका नतीजा सफलता या असफलता नहीं होना चाहिए। इस इंटरव्यू के दौरान करण जौहर ने इस सिल्वर स्क्रीन के पीछे छिपे सच को सामने लाकर टैलेंट मैनेजमेंट की जटिलताओं को बेबाकी से समझाया है।


