शादी-ब्याह में प्लास्टिक फूलों की सजावट पर होगी कार्रवाई! सीएम फडणवीस ने किया बैन का ऐलान

शादी-ब्याह में प्लास्टिक फूलों की सजावट पर होगी कार्रवाई! सीएम फडणवीस ने किया बैन का ऐलान

Maharashtra Plastic Ban: महाराष्ट्र में शादी-ब्याह और सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्लास्टिक या अन्य बायोडिग्रेडेबल चीजों से बने कृत्रिम फूलों के इस्तेमाल पर अब सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है। विधानसभा में सदस्य विक्रम पाचपुते की ओर से उठाए गए मुद्दे पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कृत्रिम फूलों पर पहले से प्रतिबंध है और अब इसे और प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।

सीएम फडणवीस ने कहा कि इन कृत्रिम फूलों से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि इससे प्राकृतिक फूल उगाने वाले किसानों की आजीविका पर भी संकट मंडराने लगा है।

सरकार लाएगी नया GR, डेकोरेटर्स पर भी कार्रवाई

राज्य सरकार इस मामले पर अधिक स्पष्टता और सख्त अमल के लिए नया शासन निर्णय (GR) जारी करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे कृत्रिम फूलों से सजावट करने वाले डेकोरेटर्स और उन्हें उपयोग की अनुमति देने वाले बड़े मैरेज हॉल्स पर भी कार्रवाई की जाएगी।

इस मुहिम में पर्यावरण विभाग अग्रणी भूमिका निभाएगा। जरूरत पड़ने पर अन्य संबंधित विभागों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

4135 टन प्लास्टिक जब्त, 25 करोड़ का जुर्माना

पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे ने विधानसभा में प्लास्टिक प्रतिबंध की कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा पेश किया। उनके मुताबिक अब तक राज्य में 4,135 टन प्लास्टिक कचरा जब्त किया जा चुका है। नियमों का उल्लंघन करने वालों से करीब 25 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया है। लगभग 92 हजार स्थानों पर नियम तोड़ने की घटनाएं सामने आईं, जिन पर दंडात्मक कार्रवाई की गई।

राज्य सरकार आने वाले त्योहारों, खासकर होली और अन्य आयोजनों को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण के अनुकूल रंगों और प्राकृतिक फूलों के उपयोग के लिए जनजागरूकता अभियान चलाएगी। स्थानीय संगठनों से भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शादी और बड़े आयोजनों में प्राकृतिक सजावट को बढ़ावा दिया जाए तो इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ फूल उत्पादक किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा। राज्य सरकार के इस कड़े रुख के बाद अब यह देखना होगा कि जमीनी स्तर पर नियमों का पालन कितनी सख्ती से कराया जाता है।

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