दीनारपुर की करीब 9 बीघा सीलिंग की सरकारी जमीन से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया पर जवाब मांगा है। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ने लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को पत्र भेज दिया है। राज्य की ओर से अधिवक्ता एसएस कुशवाहा ने अदालत को बताया कि जीएडी सचिव से चर्चा हो चुकी है और दोषी प्रभारी अधिकारियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। जीएडी यह भी जांच करेगा कि मामले को लंबे समय तक लंबित रखना केवल लापरवाही थी या निजी व्यक्तियों के साथ मिलीभगत का परिणाम। सरकार ने कोर्ट को बताया कि संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर विभागीय जांच भी शुरू की जाएगी, जिसे शीघ्र पूरा किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के 29 नवंबर 2024 के फैसले राज्य बनाम रामकुमार चौधरी का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण अपील दायर करने में हुई देरी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। समय पर सूचना न मिलने से सरकारी मामलों में देरी होती है और इससे राज्य के खजाने को नुकसान होता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि देरी माफी केवल उसी अवधि के कारणों पर विचार कर दी जा सकती है, जो सीमा अवधि के भीतर उत्पन्न हुए हों। ये अधिकारी रहे मामले से जुड़े मामले से जुड़े रहे अधिकारियों में उमा करारे 31 अक्टूबर 2021, अनुज कुमार रोहतागी 30 नवंबर 2024, आरसी मिश्रा 31 जुलाई 2017, कृपाराम शर्मा 30 नवंबर 2016, रविनंदन तिवारी 30 जून 2025 आदि अधिकारी सेवा से बाहर या सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वहीं राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय का 29 सितंबर 2020 को निधन हो चुका है। सीबी प्रसाद अपर कलेक्टर, अशोक चौहान उपायुक्त राजस्व और प्रशांत त्रिपाठी राजस्व विभाग वर्तमान में सेवा में हैं। ऐसे समझिए पूरा मामला दीनारपुर में सीलिंग की करीब 9 बीघा सरकारी जमीन को लेकर सिविल कोर्ट में शासन को हार मिली थी। इसके बाद 2008 में प्रथम अपील दायर की गई, लेकिन अदम पैरवी के कारण 2012 में यह अपील खारिज हो गई। अपील को बहाल कराने के लिए 2019 में आवेदन पेश किया गया। फिलहाल यह मामला जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकल पीठ में विचाराधीन है। कोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों पर की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा मांगा था, लेकिन प्रमुख सचिव द्वारा स्पष्ट जवाब नहीं देने पर अदालत ने नाराजगी जताई और सख्त रुख अपनाया।


