रेलवे कर्मचारी को-ऑपरेटिव सोसाइटी (अर्बन बैंक) में अवैध तरीके से नियुक्त 17 रेलकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है। ईस्ट-सेंट्रल, ईस्ट-कोस्ट और साउथ ईस्टर्न रेलवे कर्मचारी को-ऑपरेटिव सोसाइटी में 2023 में इनकी नियुक्ति की गई थी। बर्खास्त कर्मचारियों में किशन कुमार सहिस, निखिल बाउरी, गुडला वंशी कुमार, शेखर नसीर, सुमित लालपुरी, जी. नरेश, प्रशांत कुमार यादव, अर्णव गुप्ता, शौविक घोष, अभिषेक मंगराज, ऋषभ पटसानी, हंस कुमार, संतोष मेसराम, जय कुमार गोराई, स्वरुप कुमार मंडल, शैलेंद्र कुमार सिंह और मदन मोहन दुर्गा शामिल हैं। यह कार्रवाई रेलवे सेंट्रल को-ऑपरेटिव सोसाइटी के डिप्टी चीफ मैनेजर के आदेश पर की गई। सोसाइटी के चेयरमैन एस. पी. सिंह ने इस मामले में इन सभी कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। संतोषजनक जवाब न मिलने पर बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है। पूर्व निदेशकों पर आरोप मामला वर्ष 2023 का है। आरोप है कि तत्कालीन बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने पिछले दरवाजे से रिश्तेदारों और घरों में काम करने वाले लोगों को रेलवे ग्रुप-डी में बहाल कराया था। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर का कार्यकाल 2015 में ही समाप्त हो गया था, इसके बाद सेंट्रल रजिस्ट्रार एवं मुंबई हाईकोर्ट ने नीतिगत निर्णय लेने व किसी भी तरह की बहाली करने पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद 17 लोगों को बहाल कर दिया गया। इन कर्मचारियों को रांची, आद्रा, खड़गपुर सहित अन्य रेल मंडलों में पोस्टिंग दी गई थी। भ्रष्टाचार से समझौता नहीं यह कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई है। यह फैसला पूरी तरह से कानून सम्मत है। हाईकोर्ट और को-ऑपरेटिव सोसाइटी रजिस्ट्रार, नई दिल्ली के आदेशों के अनुरूप है। ऐसे मामलों में भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। – एस. पी. सिंह, चेयरमैन, अर्बन बैंक।


