प्रदेश में बेशकीमती खनिज गारनेट (रेत का सोना) के अवैध खनन और कागजी हेराफेरी के खेल का ‘राजस्थान पत्रिका’ की ओर से पर्दाफाश किए जाने के बाद खान एवं भूविज्ञान विभाग गहरी नींद से जाग गया है। ‘राजस्थान पत्रिका’ के 11 अप्रेल के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित रिपोर्ट “रेत के सोने पर डाका: भीलवाड़ा में 31.26 करोड़ का अवैध गारनेट कागजों में कर दिया वैध” पर संज्ञान लेते हुए निदेशालय ने तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश दिए हैं। खान निदेशक एमपी मीणा ने खबर में उठाए गए तथ्यों की सघन जांच के लिए चार विशेष जांच दलों को अविलंब कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब प्रदेश के गारनेट पट्टेधारियों और पंजीकृत डीलर्स के पिछले पांच सालों के उत्पादन और सप्लाई का हिसाब खंगाला जाएगा।
पांच बिंदुओं पर कसा जाएगा शिकंजा
निदेशालय ने जांच दलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे आवंटित क्षेत्रों में पट्टेधारियों और डीलर्स की जांच कर रिपोर्ट सौंपें।
- लाइसेंस की अवधि: खनन पट्टा और डीलर का लाइसेंस कब से चल रहा है।
- 5 साल का रेकॉर्ड: पट्टेधारी की ओर से पिछले 5 वर्षों में गारनेट का कितना उत्पादन और निर्गमन किया गया। साथ ही किन उद्योगों और डीलर्स को यह माल भेजा गया, इसकी पूरी जानकारी मांगी गई है।
- डीलर्स का सोर्स: डीलर्स के पास खनिज कहां से आया, उन सभी पट्टेधारियों और माल भेजने वालों की जानकारी दे।
- माल की सप्लाई चेन: डीलर्स ने यह खनिज गारनेट आगे कहां-कहां और किन उद्योगों को भेजा है।
- आईबीएम रिपोर्ट से मिलान: भारतीय खान ब्यूरो को भेजे गए गारनेट के उत्पादन और निर्गमन के आंकड़ों की जमीनी हकीकत से जांच करके रिपोर्ट सौपने के आदेश दिए।
चार वृत्तों में बंटी प्रदेश की जांच
अवैध खनन और भण्डारण पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए गठित स्थाई दलों को सीधे गारनेट घोटाले की जांच में लगा दिया गया है।
- अजमेर-जोधपुर वृत्त: लक्ष्मीनारायण कुमावत खनिज अभियंता (सतर्कता), अजमेर।
- जयपुर वृत्त: प्रमोद बलवदा, सहायक खनिज अभियंता सीकर।
- उदयपुर-राजसमंद वृत्त: नवीन अजमेरा, सहायक खनिज अभियंता राजसमंद।
- भीलवाड़ा वृत्त: विजय शंकर जयपाल, खनिज अभियंता सतर्कता भीलवाड़ा।
कागजी खेल का किया पर्दाफाश
पत्रिका ने अपनी पड़ताल में सामने रखा था कि किस तरह गारनेट का अवैध खनन कर उसे कागजों में हेराफेरी के जरिए वैध बताया जा रहा है। इस खुलासे के बाद खान निदेशालय द्वारा उठाया गया यह कदम अवैध खनन माफियाओं पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है। निदेशक ने प्रभारियों को स्पष्ट किया है कि वे पत्रिका की खबर में वर्णित तथ्यों के अनुसार अविलंब जांच कर अपनी रिपोर्ट दें। आदेश के बाद भीलवाडा़ के फोरमेन को डीलरों की ऑन लाइन तथा ऑफ लाइन कितना गारनेट का स्टॉक है। इसका मिलान का काम सौपा। शाम तक तीन दर्जन डीलरों की जांच की गई। इनमें सैकड़ों टन गारनेट का अवैध स्टॉक पाया गया।


