सुपौल के किशनपुर थाना क्षेत्र से न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि जाली दस्तावेजों के आधार पर एक बालिग अभियुक्त को किशोर घोषित करवा दिया गया। इस संबंध में बेलही वार्ड नंबर-10, शिवपुरी निवासी पंकज कुमार राउत ने किशनपुर थानाध्यक्ष को लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि एक व्यक्ति ने अपने छोटे भाई को बचाने के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज तैयार कर न्यायालय को गुमराह किया। यह मामला किशनपुर थाना से जुड़ा है, जिसमें कुल 8 नामजद अभियुक्त हैं। विद्यालय में कभी नामांकन ही नहीं हुआ था शिकायत के अनुसार, आरोपी को किशोर साबित करने के लिए पहले मध्य विद्यालय कमलदाहा से निर्गत एक विद्यालय परित्याग प्रमाण पत्र किशोर न्याय परिषद, सुपौल में प्रस्तुत किया गया, जिसमें जन्म तिथि 1 फरवरी 2007 दर्ज थी। हालांकि, 16 जनवरी 2024 को विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने परिषद में उपस्थित होकर स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति का उस विद्यालय में कभी नामांकन ही नहीं हुआ था। अन्य विद्यालय से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर दिया इसके बाद आरोप है कि आरोपी के भाई ने एक अन्य विद्यालय, थरबिट्टा पुनर्वास से कथित रूप से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर परिषद में प्रस्तुत किया। इसी आधार पर किशोर न्याय परिषद ने 25 अप्रैल 2025 को आरोपी को किशोर घोषित कर दिया। आवेदक का दावा है कि वास्तविकता इसके विपरीत है। आरोपी वर्ष 2019 में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की परीक्षा में शामिल हुआ था और प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुआ था, जिसमें उसकी जन्म तिथि 6 अक्टूबर 2003 अंकित है। इसके अलावा आधार कार्ड में भी यही जन्म तिथि दर्ज है, जिससे उसके बालिग होने का दावा किया गया है। आरोपी का भाई आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी का भाई आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है और उसके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं, जिनमें धोखाधड़ी, मारपीट, महिलाओं से जुड़े अपराध और पोक्सो एक्ट के मामले शामिल हैं। साथ ही, पुनर्वास पदाधिकारी और अमीन के साथ गैरकानूनी गतिविधियों को लेकर न्यायालय में वाद लंबित होने की बात भी कही गई है। फर्जी दस्तावेजों पर आरोपी को मिली जमानत आवेदक के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरोपी को किशोर न्याय परिषद से जमानत मिल गई, जिससे वह कानून के दायरे से बाहर आ गया है। इससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए आवेदक ने मांग की है कि कूट रचना (फर्जीवाड़ा) और न्यायालय को गुमराह करने के आरोप में संबंधित लोगों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए। आवेदन की प्रतिलिपि जिला पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी और प्रधान मजिस्ट्रेट, किशोर न्याय परिषद, सुपौल को भी भेजी गई है। थानाध्यक्ष बोले-मामले की जांच शुरू कर दी गई है इधर, किशनपुर थानाध्यक्ष ज्ञान रंजन कुमार ने बताया कि प्राप्त आवेदन के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। वहीं, विधि विशेषज्ञ भगवान जी पाठक का कहना है कि ऐसे मामलों में आवेदक को किशोर न्याय परिषद में अपील दायर करनी चाहिए। अपील के बाद परिषद पूरे मामले की पुनः जांच कर आवश्यक कार्रवाई कर सकती है। सुपौल के किशनपुर थाना क्षेत्र से न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि जाली दस्तावेजों के आधार पर एक बालिग अभियुक्त को किशोर घोषित करवा दिया गया। इस संबंध में बेलही वार्ड नंबर-10, शिवपुरी निवासी पंकज कुमार राउत ने किशनपुर थानाध्यक्ष को लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि एक व्यक्ति ने अपने छोटे भाई को बचाने के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज तैयार कर न्यायालय को गुमराह किया। यह मामला किशनपुर थाना से जुड़ा है, जिसमें कुल 8 नामजद अभियुक्त हैं। विद्यालय में कभी नामांकन ही नहीं हुआ था शिकायत के अनुसार, आरोपी को किशोर साबित करने के लिए पहले मध्य विद्यालय कमलदाहा से निर्गत एक विद्यालय परित्याग प्रमाण पत्र किशोर न्याय परिषद, सुपौल में प्रस्तुत किया गया, जिसमें जन्म तिथि 1 फरवरी 2007 दर्ज थी। हालांकि, 16 जनवरी 2024 को विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने परिषद में उपस्थित होकर स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति का उस विद्यालय में कभी नामांकन ही नहीं हुआ था। अन्य विद्यालय से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर दिया इसके बाद आरोप है कि आरोपी के भाई ने एक अन्य विद्यालय, थरबिट्टा पुनर्वास से कथित रूप से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर परिषद में प्रस्तुत किया। इसी आधार पर किशोर न्याय परिषद ने 25 अप्रैल 2025 को आरोपी को किशोर घोषित कर दिया। आवेदक का दावा है कि वास्तविकता इसके विपरीत है। आरोपी वर्ष 2019 में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की परीक्षा में शामिल हुआ था और प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुआ था, जिसमें उसकी जन्म तिथि 6 अक्टूबर 2003 अंकित है। इसके अलावा आधार कार्ड में भी यही जन्म तिथि दर्ज है, जिससे उसके बालिग होने का दावा किया गया है। आरोपी का भाई आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी का भाई आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है और उसके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं, जिनमें धोखाधड़ी, मारपीट, महिलाओं से जुड़े अपराध और पोक्सो एक्ट के मामले शामिल हैं। साथ ही, पुनर्वास पदाधिकारी और अमीन के साथ गैरकानूनी गतिविधियों को लेकर न्यायालय में वाद लंबित होने की बात भी कही गई है। फर्जी दस्तावेजों पर आरोपी को मिली जमानत आवेदक के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरोपी को किशोर न्याय परिषद से जमानत मिल गई, जिससे वह कानून के दायरे से बाहर आ गया है। इससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए आवेदक ने मांग की है कि कूट रचना (फर्जीवाड़ा) और न्यायालय को गुमराह करने के आरोप में संबंधित लोगों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए। आवेदन की प्रतिलिपि जिला पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी और प्रधान मजिस्ट्रेट, किशोर न्याय परिषद, सुपौल को भी भेजी गई है। थानाध्यक्ष बोले-मामले की जांच शुरू कर दी गई है इधर, किशनपुर थानाध्यक्ष ज्ञान रंजन कुमार ने बताया कि प्राप्त आवेदन के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। वहीं, विधि विशेषज्ञ भगवान जी पाठक का कहना है कि ऐसे मामलों में आवेदक को किशोर न्याय परिषद में अपील दायर करनी चाहिए। अपील के बाद परिषद पूरे मामले की पुनः जांच कर आवश्यक कार्रवाई कर सकती है।


