पूर्व प्रत्याशियों पर SC/ST एक्ट लगाने का आरोप:किशनगंज में फेसबुक पोस्ट को आधार बनाकर कार्रवाई की मांग

पूर्व प्रत्याशियों पर SC/ST एक्ट लगाने का आरोप:किशनगंज में फेसबुक पोस्ट को आधार बनाकर कार्रवाई की मांग

किशनगंज में राजनीतिक प्रतिशोध से जुड़ा एक नया विवाद सामने आया है। नगर परिषद चुनाव के दो पूर्व प्रत्याशियों, इम्तियाज नसर और दीपचंद, ने पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार को एक आवेदन देकर आरोप लगाया है कि उन्हें झूठी शिकायत के आधार पर एससी/एसटी एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में फंसाने की साजिश रची जा रही है। राज्य निर्वाचन आयोग में दायर किया था वाद अपने संयुक्त आवेदन में दीपचंद रविदास और इम्तियाज नसर ने बताया कि वे वर्ष 2022 के नगर परिषद चुनाव में उम्मीदवार थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान मुख्य पार्षद इंद्रदेव पासवान ने नामांकन के दौरान अपने खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले की जानकारी शपथ-पत्र में छिपाई थी। इस संबंध में उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग में एक वाद दायर किया था। आयोग ने इस मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। आवेदकों के अनुसार, इसी निर्देश पर किशनगंज थाना में कांड संख्या-121/25 दर्ज किया गया था, जो वर्तमान में न्यायालय में लंबित है। पूर्व प्रत्याशियों का कहना है कि इसी मुकदमे के कारण इंद्रदेव पासवान उनके प्रति प्रतिशोध की भावना रखते हैं। इम्तियाज नसर ने जानकारी दी कि 16 मार्च 2026 को इंद्रदेव पासवान ने सदर थाना किशनगंज में एक शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में आवेदकों के फेसबुक पोस्ट को आधार बनाकर एससी/एसटी एक्ट, मानहानि, रंगदारी और शांति भंग जैसी धाराओं में कार्रवाई की मांग की गई है। इम्तियाज नसर और दीपचंद रविदास ने स्पष्ट किया है कि उनके फेसबुक पोस्ट में किसी भी जाति या अनुसूचित जाति से संबंधित कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि उनके पोस्ट केवल नगर परिषद के कार्यों और जनहित के मुद्दों पर आधारित आलोचना हैं, जो संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आते हैं। दोनों पूर्व प्रत्याशियों ने पुलिस प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि यदि शिकायत झूठी पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। किशनगंज में राजनीतिक प्रतिशोध से जुड़ा एक नया विवाद सामने आया है। नगर परिषद चुनाव के दो पूर्व प्रत्याशियों, इम्तियाज नसर और दीपचंद, ने पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार को एक आवेदन देकर आरोप लगाया है कि उन्हें झूठी शिकायत के आधार पर एससी/एसटी एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में फंसाने की साजिश रची जा रही है। राज्य निर्वाचन आयोग में दायर किया था वाद अपने संयुक्त आवेदन में दीपचंद रविदास और इम्तियाज नसर ने बताया कि वे वर्ष 2022 के नगर परिषद चुनाव में उम्मीदवार थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान मुख्य पार्षद इंद्रदेव पासवान ने नामांकन के दौरान अपने खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले की जानकारी शपथ-पत्र में छिपाई थी। इस संबंध में उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग में एक वाद दायर किया था। आयोग ने इस मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। आवेदकों के अनुसार, इसी निर्देश पर किशनगंज थाना में कांड संख्या-121/25 दर्ज किया गया था, जो वर्तमान में न्यायालय में लंबित है। पूर्व प्रत्याशियों का कहना है कि इसी मुकदमे के कारण इंद्रदेव पासवान उनके प्रति प्रतिशोध की भावना रखते हैं। इम्तियाज नसर ने जानकारी दी कि 16 मार्च 2026 को इंद्रदेव पासवान ने सदर थाना किशनगंज में एक शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में आवेदकों के फेसबुक पोस्ट को आधार बनाकर एससी/एसटी एक्ट, मानहानि, रंगदारी और शांति भंग जैसी धाराओं में कार्रवाई की मांग की गई है। इम्तियाज नसर और दीपचंद रविदास ने स्पष्ट किया है कि उनके फेसबुक पोस्ट में किसी भी जाति या अनुसूचित जाति से संबंधित कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि उनके पोस्ट केवल नगर परिषद के कार्यों और जनहित के मुद्दों पर आधारित आलोचना हैं, जो संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आते हैं। दोनों पूर्व प्रत्याशियों ने पुलिस प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि यदि शिकायत झूठी पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *