बिहार के सभी नगर निकाय में 15 दिनों में बनेगी लेखा समिति, वित्तीय गड़बड़ी रोकेगी

नगर निगम, नगर पंचायत व नगर परिषद में वित्तीय अनियमितता पर नियंत्रण के लिए सरकार ने सभी निकाय को लेखा समिति का गठन करने का आदेश दिया है। 15 दिनों के अंदर लेखा समिति का गठन कर सभी नगर निकाय को रिपोर्ट नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजनी है। राज्य के सभी नगर निगम की समिति में 9 और नगर पंचायत व नगर परिषद की समिति में 5-5 सदस्य होंगे। वित्तीय अनियमितता के साथ लेखा से संबंधित तमाम बिंदुओं पर नजर रखने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने राज्य के सभी नगर निकायों को 15 दिनों के भीतर नगरपालिका लेखा समिति का गठन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिहार नगर पालिका अधिनियम और बिहार नगरपालिका लेखा नियमावली के तहत समिति अनिवार्य है। लेखा समिति नहीं रहने की वजह से वित्तीय मामलों में पारदर्शिता और ऑडिट आपत्तियों के निपटारे में दिक्कत आ रही है। विभाग ने कहा है कि तय समय-सीमा में गठन नहीं होने पर जवाबदेही तय की जाएगी। लेखा समिति सक्रिय होने से नगर निकायों में बजट, खर्च और राजस्व संग्रह की पारदर्शिता बढ़ेगी और वित्तीय अनुशासन मजबूत होगी। इस संबंध में विभाग के संयुक्त सचिव संजय कुमार ने सभी नगर आयुक्त व सभी नगर परिषद व नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र भेजा है। नगरपालिका प्रत्येक वर्ष अपनी पहली बैठक अथवा अन्य बैठक में शीघ्र लेखा समिति का गठन करेगी। लेखा समिति में सशक्त स्थाई समिति के सदस्य शामिल नहीं होंगे। लेखा से संबंधित अनुभव रखने वाले दो व्यक्ति को नगरपालिका नामित करेगी। बाकी मेंबर वार्ड पार्षदों के बीच से होंगे। लेखा समिति की जवाबदेही नगर निगम के तमाम आय-व्यय पर नजर रखनी होगी। जब चाहे यह समिति लेखा संबंधित रिकॉर्ड की जांच करेगी। इस समिति में एक अध्यक्ष होंगे। अॉडिट रिपोर्ट की भी समीक्षा करेगी। नगर निगम, नगर पंचायत व नगर परिषद में वित्तीय अनियमितता पर नियंत्रण के लिए सरकार ने सभी निकाय को लेखा समिति का गठन करने का आदेश दिया है। 15 दिनों के अंदर लेखा समिति का गठन कर सभी नगर निकाय को रिपोर्ट नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजनी है। राज्य के सभी नगर निगम की समिति में 9 और नगर पंचायत व नगर परिषद की समिति में 5-5 सदस्य होंगे। वित्तीय अनियमितता के साथ लेखा से संबंधित तमाम बिंदुओं पर नजर रखने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने राज्य के सभी नगर निकायों को 15 दिनों के भीतर नगरपालिका लेखा समिति का गठन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिहार नगर पालिका अधिनियम और बिहार नगरपालिका लेखा नियमावली के तहत समिति अनिवार्य है। लेखा समिति नहीं रहने की वजह से वित्तीय मामलों में पारदर्शिता और ऑडिट आपत्तियों के निपटारे में दिक्कत आ रही है। विभाग ने कहा है कि तय समय-सीमा में गठन नहीं होने पर जवाबदेही तय की जाएगी। लेखा समिति सक्रिय होने से नगर निकायों में बजट, खर्च और राजस्व संग्रह की पारदर्शिता बढ़ेगी और वित्तीय अनुशासन मजबूत होगी। इस संबंध में विभाग के संयुक्त सचिव संजय कुमार ने सभी नगर आयुक्त व सभी नगर परिषद व नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र भेजा है। नगरपालिका प्रत्येक वर्ष अपनी पहली बैठक अथवा अन्य बैठक में शीघ्र लेखा समिति का गठन करेगी। लेखा समिति में सशक्त स्थाई समिति के सदस्य शामिल नहीं होंगे। लेखा से संबंधित अनुभव रखने वाले दो व्यक्ति को नगरपालिका नामित करेगी। बाकी मेंबर वार्ड पार्षदों के बीच से होंगे। लेखा समिति की जवाबदेही नगर निगम के तमाम आय-व्यय पर नजर रखनी होगी। जब चाहे यह समिति लेखा संबंधित रिकॉर्ड की जांच करेगी। इस समिति में एक अध्यक्ष होंगे। अॉडिट रिपोर्ट की भी समीक्षा करेगी।  

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