मर चुके थे अभिषेक बच्चन, फिर क्यों बदला गया दिल्ली-6 का क्लाइमैक्स, डायरेक्टर ने खोली पोल

मर चुके थे अभिषेक बच्चन, फिर क्यों बदला गया दिल्ली-6 का क्लाइमैक्स, डायरेक्टर ने खोली पोल

Abhishek Bachchan Film: साल 2009 में रिलीज हुई फिल्म ‘दिल्ली-6’ भले ही उस समय थिएटर पर कोई बड़ा कमाल न कर पाई हो, लेकिन समय के साथ इस फिल्म को एक ‘कल्ट क्लासिक’ का दर्जा मिला है। बता दें, अब 15 साल बाद इस फिल्म के डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने सिनेमा लवर्स को दंग कर दिया है। राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने ये भी बताया कि फिल्म का जो अंत दर्शकों ने देखा, वो असल में उनका ओरिजिनल विजन था ही नहीं।

फिर क्यों बदला गया दिल्ली-6 का क्लाइमैक्स

राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने हालिया के एक बातचीत में बताया कि फिल्म का जो ‘डायरेक्टर कट’ (ओरिजिनल वर्जन) था, वो बहुत ज्यादा डार्क और गंभीर था। उन्होंने आगे कहा, “ओरिजिनल फिल्म की शुरुआत ही अभिषेक बच्चन की अस्थियों के विसर्जन से होती है और बैकग्राउंड में अभिषेक की आवाज में एक वॉइसओवर आता है, “ये मेरी अस्थियां हैं यानी फिल्म की पहली फ्रेम में ही दर्शक को पता चल जाता है कि फिल्म का हीरो मर चुका है।”

ओमप्रकाश मेहरा के अनुसार, यही वो वर्जन था जिसे वेनिस फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया था, जहां इसे जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। फेमस मैगजीन ‘वैरायटी’ ने तो इसे फ्रंट पेज पर जगह दे दिया था, लेकिन जब भारत में रिलीज की बात आई, तो मेहरा दबाव में आ गए। साथ ही, निर्देशक ने आत्मग्लानि भाव से कहा, “मैंने फिल्म का अंत सिर्फ अपनी मूर्खता की वजह से बदला। जिन लोगों ने वो कट देखा, उन्होंने कहा कि फिल्म को हैप्पी एंडिंग के साथ खत्म करो और मैं उनके झांसे में आ गया और आज मुझे लगता है कि वो फैसला मैंने गलत लिया था।”

Delhi 6
फिल्म Delhi 6 ( सोर्स: IMDb)

हमारा देश अभी इसके लिए तैयार नहीं है

इतना ही नहीं, जब मेहरा से पूछा गया कि क्या वे अब उस ‘डायरेक्टर कट’ को दोबारा रिलीज करेंगे, तो उन्होंने निराशा जताते हुए कहा, “हमारा देश अभी इसके लिए तैयार नहीं है और मुझे लगता है कि हमारा देश अभी इतना विकसित नहीं हुआ है कि वो उस सच को स्वीकार कर सके। असल में, कई मायनों में हम पहले से नीचे गिरे हैं। हालांकि हमने प्रगति की है, लेकिन उस प्रोग्रेस को परिभाषित करना मुश्किल है।”

बता दें, राकेश ओमप्रकाश मेहरा की ये फिल्म पुरानी दिल्ली की गलियों, वहां के भाईचारे और धार्मिक कट्टरता के बीच छिपी बुराइयों को दिखाती है। साथ ही, फिल्म का संगीत ए.आर. रहमान ने दिया था, जो आज भी लोगों की जुबां पर है। अब मेहरा के इस बयान ने फिल्म लवर्स के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।

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