बीआरटीएस (एबी रोड) पर नौलखा से एलआईजी के बीच बॉटल नेक में प्रस्तावित एलिवेटेड ब्रिज को लेकर अंतिम निर्णय 7 फरवरी को होगा। गुरुवार को जनप्रतिनिधि, विशेषज्ञ व संबंधित विभागों के बीच बैठक हुई। जनप्रतिनिधियों ने कहा, एलिवेटेड ब्रिज जरूरी है, लेकिन इसकी चौड़ाई 4 नहीं 6 लेन की जाए। इसे नौलखा से आगे राजीव गांधी चौराहा, राऊ तक व एलआईजी से आगे तक बनाएं। इसी के साथ नागपुर व अन्य शहरों की तरह मेट्रो का भी प्रावधान करें। मुख्य चौराहों पर एलिवेटेड रोटरी जैसे प्रावधान किए जाएं। इससे वाहनों को उतरने-चढ़ने में आसानी होगी और ब्रिज की उपयोगिता भी बढ़ेगी। चर्चा के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पीडब्ल्यूडी को सिक्स लेन का एस्टीमेट, मेट्रो कॉर्पोरेशन को नए प्लान के साथ क्लब करके प्रारंभिक प्रस्ताव बनाने के लिए कहा है। बैठक में संभागायुक्त सुदाम खाड़े व कलेक्टर शिवम वर्मा ने प्रस्तावित ब्रिज की रूपरेखा रखी। बताया कि 15 फरवरी से इसका काम शुरू करने की योजना है। लोकसभा की पूर्व स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा, यह ब्रिज 50 साल के ट्रैफिक को देखते हुए बनाना चाहिए। इसलिए जल्दबाजी करने के बजाय बेहतर विकल्पों को देखें और जरूरी बदलाव करके इसे बनाएं। सांसद शंकर लालवानी ने कहा, वर्तमान में इसमें प्रमुख चौराहों पर एक तरफा ट्रैफिक उतरने की ही व्यवस्था है। मुख्य चौराहों पर रोटरी बनाएं, देश में इस तरह के ब्रिज बन रहे हैं। मल्टी लेवल ब्रिज पर भी विचार करें, जिससे मेट्रो एक ओर से आवाजाही कर सके। महापौर पुष्यमित्र भार्गव और विधायक गोलू शुक्ला, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा आदि मौजूद रहे।
किसने क्या सुझाव दिए भास्कर इनसाइट – ट्रैफिक सर्वे : सवाल भी उठ रहे कॉरिडोर 9 से 10% ही उपयोगी होगा, चौराहों पर ब्रिज बनाएं आर्किटेक्ट अतुल सेठ का कहना है, पीडब्ल्यूडी ने आज तक इस ब्रिज के संबंध में कोई भी सर्वे जनता को उपलब्ध नहीं कराया है। नौलखा से सीधे एलआईजी की ओर आवाजाही करने वाले बहुत कम वाहन चालक हैं। यदि मौजूदा भुजाओं के साथ भी इसे बनाते हैं तो इसकी उपयोगिता 9 से 10 फीसदी ही मिल रही है। पीडब्ल्यूडी 32 फीसदी बता रहा है। चौराहों पर एलिवेटेड रोटरी बनाने के लिए पर्याप्त डायमीटर नहीं है। इनकी क्षमता से बाहर ट्रैफिक होने पर जाम की स्थिति बनेगी। बीआरटीएस टूटने के बाद की स्थिति को देखते हुए चौराहों पर ब्रिज की प्लानिंग पर काम किया जाए, यही जाम से निपटने का सही उपाय होगा। एबी रोड का बड़ा हिस्सा खुला
बीआरटीएस का सर्वे कर चौराहों पर ब्रिज बनाने की सिफारिश करने वाली दिल्ली की एजेंसी के प्रमुख वीके श्रीवास्तव का कहना है, गीता भवन से एलआईजी तक ही बिजनेस डिस्ट्रिक्ट है। ट्रैफिक प्लान लैंड यूज पर भी निर्भर करता है। 6.5 किमी में से 30 से 35% हिस्सा खुला होने से ब्रिज निर्माण जरूरी नहीं है। पलासिया से एलआईजी, शिवाजी वाटिका व नौलखा पर ब्रिज बनाकर ही ट्रैफिक सर्कुलेशन बना सकते हैं। दोबारा सर्वे से फायदा नहीं होगा, क्योंकि चौराहों की स्थिति वही रहेगी। ब्रिज से रिंग रोड पर शिफ्ट होगा ट्रैफिक
प्रो. शरद नाईक ने बताया, 2024 में प्रशासन व पीडब्ल्यूडी के निर्देश पर ही सर्वे किया गया था। इसमें ओरिजिन टू डेस्टिनेशन सर्वे में मात्र 2 फीसदी वाहन सीधे जाने वाले थे। एबी रोड पर कई क्रॉसिंग है। इनमें से आवाजाही करने वाले वाहनों की संख्या अधिक होती है। वैसे भी रिंग रोड के हर क्रॉसिंग पर ब्रिज तैयार हो गए हैं। इसलिए सीधे जाने के लिए लोग इसका उपयोग करेंगे। 6.5 किमी के टू लेन ब्रिज में जाम का डर
विशेषज्ञ अंशुल अग्रवाल का कहना है, एलिवेटेड ब्रिज की लंबाई 6.5 किमी व चौड़ाई 15 मीटर है। यानी फोर लेन रहेगी। शहर के मध्य में व इतने लंबे टू लेन ब्रिज का निर्माण इंजीनियर मानकों के अनुसार नहीं है। यह जाम का कारण बनेगा। बीआरटीएस हटा बॉटल नेक में चौराहों पर लेफ्ट राइट टर्न ट्रैफिक प्लान कर सर्वे करवाएं।


