पूर्णिया में आप जिलाध्यक्ष विकास झा और युवा जिलाध्यक्ष इरशाद पुनर्वी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। महिला सिपाही से बदसलूकी, सरकारी काम में बाधा और सड़क जाम करने का आरोप है। घटना शहर के व्यस्ततम इलाके लाइन बाजार स्थित ट्रैफिक पोस्ट के पास की है। जानकारी के मुताबिक इरशाद पुनर्वी ने अपनी गाड़ी बीच सड़क पर खड़ी कर दी थी, जिससे यातायात बाधित हो रहा था। जब वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें गाड़ी हटाने को कहा, तो वे उग्र हो गए। यातायात थानाध्यक्ष का नंबर मांगने लगे। पुलिस का दावा है कि इरशाद ने धमकी देते हुए कहा कि नंबर दो, नहीं तो अभी रोड जाम कर देंगे। विवाद के दौरान उन्होंने ड्यूटी पर तैनात एक महिला सिपाही के साथ हाथापाई की और अभद्र व्यवहार किया। इसके बाद करीब सौ से अधिक समर्थकों को बुलाकर सड़क जाम कर दिया। स्थिति बिगड़ते देख वरीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाया और इरशाद को हिरासत में लिया। बाद में उनके समर्थन में पहुंचे जिलाध्यक्ष विकास झा को भी हंगामा करने और पुलिस कार्य में हस्तक्षेप करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस की कार्रवाई को गलत बताया इरशाद पुनर्वी ने पुलिसिया कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि मेरी बेटी लाइन बाजार के एक निजी अस्पताल में भर्ती थी। नर्स ने इमरजेंसी में दवा मंगवाई थी, लेकिन भीषण जाम के कारण मैं एक घंटे से फंसा हुआ था। जब मैंने मदद के लिए पुलिस से थानाध्यक्ष का नंबर मांगा, तो वे बदतमीजी पर उतारू हो गए। वहीं, जिलाध्यक्ष विकास झा ने बताया कि वो मामले की जानकारी लेने और डीएसपी से बात करने यातायात थाना पहुंचे थे, जहां पुलिस ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया। सरकारी काम में बाधा डालना गंभीर अपराध के. हाट थाना के प्रभारी थानाध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि यातायात पुलिस की लिखित शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। महिला सिपाही से मारपीट और सरकारी ड्यूटी में बाधा डालना गंभीर अपराध है। दोनों नेताओं को मेडिकल जांच के बाद जेल भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पूर्णिया में आप जिलाध्यक्ष विकास झा और युवा जिलाध्यक्ष इरशाद पुनर्वी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। महिला सिपाही से बदसलूकी, सरकारी काम में बाधा और सड़क जाम करने का आरोप है। घटना शहर के व्यस्ततम इलाके लाइन बाजार स्थित ट्रैफिक पोस्ट के पास की है। जानकारी के मुताबिक इरशाद पुनर्वी ने अपनी गाड़ी बीच सड़क पर खड़ी कर दी थी, जिससे यातायात बाधित हो रहा था। जब वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें गाड़ी हटाने को कहा, तो वे उग्र हो गए। यातायात थानाध्यक्ष का नंबर मांगने लगे। पुलिस का दावा है कि इरशाद ने धमकी देते हुए कहा कि नंबर दो, नहीं तो अभी रोड जाम कर देंगे। विवाद के दौरान उन्होंने ड्यूटी पर तैनात एक महिला सिपाही के साथ हाथापाई की और अभद्र व्यवहार किया। इसके बाद करीब सौ से अधिक समर्थकों को बुलाकर सड़क जाम कर दिया। स्थिति बिगड़ते देख वरीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाया और इरशाद को हिरासत में लिया। बाद में उनके समर्थन में पहुंचे जिलाध्यक्ष विकास झा को भी हंगामा करने और पुलिस कार्य में हस्तक्षेप करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस की कार्रवाई को गलत बताया इरशाद पुनर्वी ने पुलिसिया कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि मेरी बेटी लाइन बाजार के एक निजी अस्पताल में भर्ती थी। नर्स ने इमरजेंसी में दवा मंगवाई थी, लेकिन भीषण जाम के कारण मैं एक घंटे से फंसा हुआ था। जब मैंने मदद के लिए पुलिस से थानाध्यक्ष का नंबर मांगा, तो वे बदतमीजी पर उतारू हो गए। वहीं, जिलाध्यक्ष विकास झा ने बताया कि वो मामले की जानकारी लेने और डीएसपी से बात करने यातायात थाना पहुंचे थे, जहां पुलिस ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया। सरकारी काम में बाधा डालना गंभीर अपराध के. हाट थाना के प्रभारी थानाध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि यातायात पुलिस की लिखित शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। महिला सिपाही से मारपीट और सरकारी ड्यूटी में बाधा डालना गंभीर अपराध है। दोनों नेताओं को मेडिकल जांच के बाद जेल भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।


