बड़े अस्पतालों में आमतौर पर इंसानों की पीड़ा, इलाज और जिंदगी बचाने की जद्दोजहद देखने को मिलती है, लेकिन शनिवार को आरा शहर के मॉडल सदर अस्पताल में एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। अस्पताल परिसर में उस समय सबकी नजरें ठहर गईं, जब एक युवक किसी इंसान को नहीं, बल्कि अपने पालतू तोते को गोद में उठाए इलाज के लिए पहुंचा। युवक की गोद में लहूलुहान तोता था। उसका थोड़ टूट गया था, जिससे लगातार खून बह रहा था। दर्द से तड़पते उस बेजुबान पक्षी को सीने से लगाए युवक की आंखों में गहरी बेचैनी और चिंता साफ झलक रही थी। वह बार-बार डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से अपने तोते को बचाने की गुहार लगाता रहा। घायल तोते को लेकर अस्पताल पहुंचे युवक की पहचान घोड़ादाई गांव निवासी राजेंद्र सिंह के बेटे निलेश कुमार के रूप में हुई है। निलेश अपने पिता के साथ लंबे समय से इस तोते को पाल रहे हैं। वर्तमान में उनका परिवार आरा शहर के टाउन थाना क्षेत्र अंतर्गत शांति नगर मोहल्ले में रहता है। परिवार के अनुसार तोता उनके घर का हिस्सा बन चुका है और सभी उसे परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं। डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ भी हैरान बताया गया कि तोता अचानक किसी वजह से घायल हो गया। थोड़ टूटने के कारण खून बहने लगा। यह देखकर निलेश घबरा गया और बिना समय गंवाए सीधे उसे सदर अस्पताल लेकर पहुंच गया। अस्पताल में यह दृश्य देखकर पहले तो डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ भी हैरान रह गए। इंसानों की भीड़ और आपात स्थितियों के बीच एक पक्षी के इलाज के लिए आया यह फरियाद सबको सोचने पर मजबूर कर गई। नर्सिंग स्टाफ ने भी मानवता का परिचय दिया निलेश की आंखों में अपने तोते के लिए जो ममता और दर्द था, उसने माहौल को भावुक बना दिया। युवक की हालत और तोते की स्थिति को देखते हुए नर्सिंग स्टाफ ने भी मानवता का परिचय दिया। प्राथमिक इलाज कर तोते के जख्म से बह रहे खून को रोका गया। इलाज के दौरान निलेश लगातार अपने तोते को सहलाता रहा, मानो वह कोई बेजुबान पक्षी नहीं, बल्कि घर का छोटा बच्चा हो। बड़े अस्पतालों में आमतौर पर इंसानों की पीड़ा, इलाज और जिंदगी बचाने की जद्दोजहद देखने को मिलती है, लेकिन शनिवार को आरा शहर के मॉडल सदर अस्पताल में एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। अस्पताल परिसर में उस समय सबकी नजरें ठहर गईं, जब एक युवक किसी इंसान को नहीं, बल्कि अपने पालतू तोते को गोद में उठाए इलाज के लिए पहुंचा। युवक की गोद में लहूलुहान तोता था। उसका थोड़ टूट गया था, जिससे लगातार खून बह रहा था। दर्द से तड़पते उस बेजुबान पक्षी को सीने से लगाए युवक की आंखों में गहरी बेचैनी और चिंता साफ झलक रही थी। वह बार-बार डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से अपने तोते को बचाने की गुहार लगाता रहा। घायल तोते को लेकर अस्पताल पहुंचे युवक की पहचान घोड़ादाई गांव निवासी राजेंद्र सिंह के बेटे निलेश कुमार के रूप में हुई है। निलेश अपने पिता के साथ लंबे समय से इस तोते को पाल रहे हैं। वर्तमान में उनका परिवार आरा शहर के टाउन थाना क्षेत्र अंतर्गत शांति नगर मोहल्ले में रहता है। परिवार के अनुसार तोता उनके घर का हिस्सा बन चुका है और सभी उसे परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं। डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ भी हैरान बताया गया कि तोता अचानक किसी वजह से घायल हो गया। थोड़ टूटने के कारण खून बहने लगा। यह देखकर निलेश घबरा गया और बिना समय गंवाए सीधे उसे सदर अस्पताल लेकर पहुंच गया। अस्पताल में यह दृश्य देखकर पहले तो डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ भी हैरान रह गए। इंसानों की भीड़ और आपात स्थितियों के बीच एक पक्षी के इलाज के लिए आया यह फरियाद सबको सोचने पर मजबूर कर गई। नर्सिंग स्टाफ ने भी मानवता का परिचय दिया निलेश की आंखों में अपने तोते के लिए जो ममता और दर्द था, उसने माहौल को भावुक बना दिया। युवक की हालत और तोते की स्थिति को देखते हुए नर्सिंग स्टाफ ने भी मानवता का परिचय दिया। प्राथमिक इलाज कर तोते के जख्म से बह रहे खून को रोका गया। इलाज के दौरान निलेश लगातार अपने तोते को सहलाता रहा, मानो वह कोई बेजुबान पक्षी नहीं, बल्कि घर का छोटा बच्चा हो।


