देवास जिले के गांव कवड़िया में वसंत पंचमी पर एक अनूठा विवाह चर्चा का केंद्र बना। यहां लोकेंद्रसिंह सैंधव ने घर में बेटी की तरह पाली गई गाय लक्ष्मी का विवाह नंदी पूर्णा के साथ पूरे सनातन रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कराया। आयोजन में पूरा गांव बाराती बना और पांच दिनों तक पारंपरिक वैवाहिक रस्में निभाई गईं। लोकेंद्रसिंह ने गाय को कभी पशु नहीं, बल्कि बेटी का दर्जा दिया। इसी भावना के साथ उन्होंने वसंत पंचमी पर विवाह का संकल्प लिया। गांववालों ने इसे सामूहिक आयोजन मानते हुए तन-मन-धन से सहयोग किया। ग्रामीणों ने दूसरे गांव से नंदी खरीदा, जिसका नाम पूर्णा रखा गया। विवाह को पूर्ण पारंपरिक स्वरूप देने के लिए बाकायदा विवाह पत्रिका भी छपवाई गई। 19 जनवरी को खानेगार, 21 जनवरी को गणेश पूजन, 22 जनवरी को मंडप, हल्दी व मेहंदी की रस्में हुईं। 23 जनवरी वसंत पंचमी पर वैदिक मंत्रों के बीच विवाह संपन्न हुआ। गाय को वस्त्र व आभूषण पहनाए गए, नंदी को साफा बांधा गया। बैंड-बाजे के साथ बारात निकली और सभी के लिए भोजन की व्यवस्था की गई।


