शहर में पहले भी कई घरों के चिराग बुझ चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की नींद अब तक नहीं टूटी है। राजधानी के कई इलाकों में निर्माण के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे खुले पड़े हैं। बारिश या रिसाव से इनमें पानी भर गया है और ये अब ‘मौत के तालाब’ बन चुके हैं। पिछले साल ऐसे ही एक खुले गड्ढे में डूबने से तीन मासूमों की जान जा चुकी है। हर हादसे के बाद जांच और सख्ती के दावे किए जाते हैं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। हादसे के बाद महापौर ने सभी जोन में ऐसे प्रोजेक्ट्स को ढंकने या सुरक्षा गार्ड लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी हालात अब भी नहीं बदले हैं। भाठागांव में एक निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के लिए खोदा गया विशाल गड्ढा बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के खुला पड़ा है, जहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। न चेतावनी बोर्ड, न बैरिकेड
सुरक्षा के नाम पर यहां कुछ भी नजर नहीं आता है। न चेतावनी बोर्ड लगाया गया है, न रेडियम टेप या बैरिकेड। न ही मजबूत बाउंड्री और न कोई सुरक्षा गार्ड हैं। कार्रवाई की जाएगी
महापौर मीनल चौबे ने कहा कि यदि ऐसा मामला सामने आया है तो उसे तुरंत दिखाया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।


