राजगढ़ के खिलचीपुर थाना क्षेत्र के चांदपुरा गांव में सोमवार सुबह एक किसान की छोटी-सी पूंजी पलक झपकते ही उजड़ गई। खेत पर बनी टापरी के पास तार फेंसिंग के भीतर बंधी बकरियों पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। हमले में छह बकरियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक बकरी के बच्चे को कुत्ते उठाकर ले गए। घटना के बाद किसान और उसका परिवार सदमे में है। पीड़ित किसान भाग्य चंद मालवीय ने रोते हुए बताया कि उसके पास महज चार बीघा जमीन है। खेती-किसानी और पशुपालन के सहारे ही वह अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। उसके पास कुल सात बकरियां थीं, जो उसके लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया थीं। गांव से बाहर खेत पर बनी टापरी में वह परिवार सहित रहता है और बकरियों को झोपड़ी के पास बनी लोहे की तार फेंसिंग के भीतर बांधकर रखता था। कुत्तों के झुंड ने फेंसिंग में घुसकर हमला किया
सोमवार सुबह वह परिवार के साथ खेत पर काम में लगा था। इसी दौरान अचानक कुत्तों का एक झुंड फेंसिंग के भीतर घुस आया। कुत्तों ने बंधी हुई बकरियों पर बेरहमी से हमला कर दिया। जब तक परिवार को भनक लगती, तब तक छह बकरियां बुरी तरह नोची जा चुकी थीं और दम तोड़ चुकी थीं। भाग्य चंद के छोटे भाई गेंदा लाल ने बताया कि वह अपने खेत से लौट रहा था, तभी उसने बकरियों पर कुत्तों को हमला करते देखा। उसने शोर मचाया और पत्थर फेंककर कुत्तों को भगाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। एक बकरी के बच्चे को कुत्ते उठाकर ले गए थे, जबकि छह बकरियों के शव फेंसिंग के भीतर पड़े थे। बकरियों के शरीर पर गहरे घाव थे, जिन्हें देख परिवार का कलेजा फट पड़ा। घटना के बाद खेत पर मातम जैसा माहौल है। भाग्य चंद और उसके परिवार के सदस्य फुट-फुटकर रो रहे हैं। उनके लिए ये बकरियां सिर्फ पशु नहीं, बल्कि भविष्य की उम्मीद थीं—बच्चों की पढ़ाई, घर खर्च और छोटी-मोटी जरूरतों का सहारा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए और पीड़ित किसान को उचित मुआवजा दिया जाए।
एक छोटे किसान के लिए छह बकरियों का नुकसान सिर्फ आर्थिक झटका नहीं, बल्कि उसकी सालभर की मेहनत पर पानी फिरने जैसा है। अब परिवार प्रशासन से मदद की उम्मीद लगाए बैठा है, ताकि इस असमय आए संकट से उबर सके।


