एक मुर्गी बनी मर्डर की वजह:14 साल बाद जाहिद के 3 हत्यारों को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद, एक आरोपी आज तक फरार

राजस्थान क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा भिवाड़ी के फेज थर्ड इलाके में रहने वाला जाहिद की रहस्यमयी परिस्थितियों में हत्या हो जाती है। कई साल गुजर गए, लेकिन जाहिद के हत्यारे का सुराग नहीं लगा। हर अंधेरी सड़क उस रात की गवाही देती रही। वह रात जब घर से काम के लिए निकला जाहिद कभी लौटकर नहीं आया। जाहिद की हत्या के बाद इलाके में दहशत का जो माहौल बना, वह धीरे-धीरे सामान्य तो हो गया, लेकिन डर और सवाल दोनों जिंदा रहे। पुलिस जांच पूरी कर चुकी थी। चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी और मामला अदालत में चल रहा था, लेकिन इंसाफ की राह आसान नहीं थी। चौदह साल बाद आखिरकार वह दिन आया जब उस रात की पूरी कहानी अदालत के सामने साफ होने लगी। जांच और अदालत में दर्ज गवाहों के बयानों से यह साफ हो गया कि जाहिद की हत्या कोई अचानक हुआ अपराध नहीं था। यह न तो लूट का मामला था और न ही किसी गहरी दुश्मनी का नतीजा। इसके पीछे एक ऐसी वजह थी, जिसे उस वक्त किसी ने गंभीरता से नहीं लिया था। घटना से एक दिन पहले गांव की उसी बाहरी सड़क पर एक मामूली-सा विवाद हुआ था। जाहिद ट्रैक्टर लेकर जा रहा था। उसी दौरान रास्ते में एक मुर्गी ट्रैक्टर के नीचे आकर मर गई। मुर्गी मालिक राजवीर ने जाहिद से बहस की। आवाजें तेज हुईं। कुछ लोग इकट्ठा हो गए। गांव वालों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया। जाहिद ने माफी भी मांग ली थी। सबको लगा कि यह रोज़मर्रा का झगड़ा है, जो यहीं खत्म हो जाएगा। मामला वहीं खत्म नहीं हुआ था। विवाद के बाद राजवीर और उसके साथियों के भीतर गुस्सा और बदले की भावना पनप चुकी थी। इसी गुस्से के चलते जाहिद को सबक सिखाने का फैसला लिया गया। अगले ही दिन हत्या की योजना बनाई गई। फिर उस रास्ते को चुना, जहां शाम के वक्त आवाजाही कम रहती थी। अंधेरा जल्दी छा जाता था और आसपास झाड़ियां थीं। यही वजह थी कि वारदात को अंजाम देना आसान था। जाहिद जैसे ही उस सड़क से गुजरा, राजवीर और उसके साथियों ने उसे घेर लिया। पहले उसके साथ मारपीट की गई। जब उसने विरोध किया और बचने की कोशिश की, तभी बेहद नजदीक से उस पर गोली चला दी गई। गोली सीधी उसकी छाती में लगी और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। जांच में सामने आया कि इस पूरी साजिश में शामिल राजवीर उसी इलाके का रहने वाला था। उसी ने हत्या की प्लानिंग बनाई और अपने साथ संजय और सुभाष को शामिल किया। कुल मिलाकर इस हत्याकांड में पांच आरोपी शामिल थे। हालांकि, समय के साथ मामला जटिल होता चला गया। एक आरोपी वारदात के बाद फरार हो गया, जिसकी तलाश पुलिस आज तक नहीं कर सकी। एक अन्य आरोपी की ट्रायल के दौरान मौत हो गई। अंततः तीन आरोपियों के खिलाफ ही मुकदमा चला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ लिखा था कि जाहिद की मौत गोली लगने से हुई। गोली बेहद नजदीक से मारी गई थी। इससे यह साबित हो गया कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरी तरह योजनाबद्ध हत्या थी। फॉरेंसिक रिपोर्ट और मौके से जुटाए गए सबूतों ने भी अभियोजन पक्ष के दावे को सही ठहराया। गोली की दिशा, घाव की स्थिति और घटनास्थल के निशान सबने एक ही कहानी बयान की। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल 24 गवाह पेश किए। इनमें गांव के लोग, मौके पर पहुंचे पहले व्यक्ति, पुलिस अधिकारी, डॉक्टर और फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल थे। हर गवाह ने उस रात की कहानी का एक-एक टुकड़ा जोड़ा। किसी ने विवाद की पुष्टि की, किसी ने आरोपियों की मौजूदगी बताई, तो किसी ने घटना के बाद का हाल बताया। धीरे-धीरे सबूतों की कड़ी जुड़ती चली गई और अदालत के सामने पूरी तस्वीर साफ हो गई। अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। घर से काम के लिए निकले युवक का मर्डर:गांव के बाहर पड़ी मिली लाश, गांव का ही था हत्यारा, पार्ट-1

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