जोधपुर के राजीव गांधी नगर थाना क्षेत्र में निर्माण कार्यों के ठेकेदार के साथ लकड़ी के दरवाजे सप्लाई करने के नाम पर धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग का मामला सामने आया है। इंदौर के एक प्लाईवुड कारोबारी और उसके पिता ने मिलकर ठेकेदार से लाखों रुपए ऐंठ लिए और तय समय पर दरवाजे भी सप्लाई नहीं किए। पीड़ित ठेकेदार की शिकायत पर कोर्ट के इस्तगासे के जरिए पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दर्ज रिपोर्ट के अनुसार- परिवादी मुकेश शर्मा पुत्र जगदीश प्रसाद शर्मा निवासी सैनिकपुरी शिकारगढ़ जोधपुर जगदीश प्रसाद एंड कम्पनी के माध्यम से निर्माण कार्यों और सरकारी ठेकों का काम करते हैं। वर्तमान में उनका ठेका राजस्थान आवासन मंडल बड़ली में एचआईजी और ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स के निर्माण का चल रहा है। इन फ्लैट्स के लिए लकड़ी के दरवाजों की आवश्यकता थी। परिवादी के अनुसार- मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित एमपी प्लेवुड प्रोडक्ट्स के मालिक शनि और उसके पिता जसबीर सिंह ने एक अन्य व्यक्ति के जरिए संपर्क किया। आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि वे उनके फ्लैट्स के सभी दरवाजे तय दरों और समय सीमा के भीतर तैयार कर सप्लाई कर देंगे। पहली खेप के लिए 7 लाख रुपए किए ट्रांसफर परिवादी ने 23 जून 2026 को 702 दरवाजों का ऑर्डर 90 रुपए प्रति वर्ग फीट की दर से दिया, जिन्हें 30 जुलाई 2026 तक डिलीवर करना था। इसके तहत 23 जून को ही पहली खेप में 351 दरवाजे मिलने पर परिवादी ने आरटीजीएस के जरिए 7,05,427 रुपए तुरंत ट्रांसफर कर दिए। शेष 351 दरवाजों की डिलीवरी के लिए आरोपी लगातार बहाने बनाते रहे और देरी करते रहे। जब परिवादी ने लेबर के खाली बैठने और आर्थिक नुकसान का हवाला दिया, तो 19 अगस्त 2026 को आरोपियों ने ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। मजबूरी में दर बढ़ाकर 93 रुपए प्रति वर्ग फीट करनी पड़ी। इसके बाद भी आरोपी नहीं माने और धमकी देकर 20 अगस्त को डेढ़ लाख रुपए और ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए। गाली-गलौज करते हुए दी धमकी परिवादी का आरोप है कि जब कुछ दिनों बाद भी माल नहीं पहुंचा और परिवादी ने पूछताछ की। आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए कहा कि उनकी नामी गैंग्स और ऊंचे लोगों से पहचान है। इसके बाद रेट बढ़ाकर 101 रुपए प्रति वर्ग फीट कर दी गई। जब परिवादी ने आरोपी के पिता जसबीर सिंह से कहा तो उन्होंने कहा जो करना हो कर लो, न पैसे मिलेंगे और न दरवाजे। आरोपियों की इस धोखाधड़ी और समय पर माल न मिलने के कारण परिवादी को सरकारी पेनल्टी, दूसरी फर्म से महंगे दामों पर दरवाजे बनवाने और लेबर के तितर-बितर होने की वजह से 8 से 10 लाख रुपए तक के आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। इस पर राजीव गांधी नगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।

