ब्राह्मण समाज को आबादी के अनुपात में अधिकार और उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग को लेकर आज रविवार (1 नवंबर) को पटना में मौन संकल्प पदयात्रा निकाली जा रही है। लोकमंच के आह्वान पर आयोजित इस पदयात्रा में शामिल होने के लिए ब्राह्मण समाज के लोग मिलर ग्राउंड में जुटे हैं। यहां से सभी लोग मौन संकल्प के साथ पदयात्रा निकालेंगे और लोकभवन पहुंचकर राज्यपाल को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपेंगे। लोकमंच के संस्थापक एवं अध्यक्ष आशीष कुमार उर्फ बब्बू झा ने कहा कि संगठन वर्ष 2004 से सामाजिक गोलबंदी और समाज को संगठित करने के लिए लगातार काम कर रहा है। यह पदयात्रा किसी के विरोध में नहीं निकाली जा रही है, बल्कि समाज से जुड़े मुद्दों को सरकार तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए संवाद स्थापित करने का लोकतांत्रिक प्रयास है। उन्होंने कहा कि हमारा मौन ही हमारा संकल्प है। ब्राह्मण कल्याण बोर्ड बनाने समेत 7 प्रमुख मांगें लोकमंच ने राज्य सरकार के सामने ब्राह्मण समाज से जुड़ी सात प्रमुख मांगें रखी हैं। संगठन की मांग है कि बिहार में ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए। इसके साथ ही समाज की आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक स्थिति का सर्वे कराकर सरकार श्वेतपत्र जारी करे, ताकि समाज की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। संगठन भगवान परशुराम की जयंती यानी अक्षय तृतीया के अवसर पर बिहार में सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की भी मांग कर रहा है। EWS अभ्यर्थियों को उम्र और परीक्षा में छूट देने की मांग लोकमंच की मांग है कि UPSC और BPSC की परीक्षाओं में EWS वर्ग के अभ्यर्थियों को भी दूसरी आरक्षित श्रेणियों की तरह उम्र सीमा और परीक्षा में शामिल होने के अवसरों में छूट दी जाए। इसके अलावा नवोदय विद्यालय और केंद्रीय विद्यालयों में EWS श्रेणी के बच्चों के नामांकन के लिए विशेष व्यवस्था करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग की सुविधा मिलनी चाहिए, ताकि आर्थिक स्थिति उनकी पढ़ाई और भविष्य के रास्ते में बाधा न बने। 1506 एकड़ जमीन को कब्जे से मुक्त कराने की मांग लोकमंच ने वर्ष 1990 से दबंगों के कब्जे में बताई जा रही करीब 1506 एकड़ रैयती जमीन को भी खाली कराने की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि इस जमीन को उसके वास्तविक हकदारों को वापस दिलाने के लिए सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। पदयात्रा के जरिए संगठन इन सभी मांगों को राज्यपाल तक पहुंचाकर सरकार का ध्यान ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दों की ओर आकर्षित करना चाहता है। ब्राह्मण समाज को आबादी के अनुपात में अधिकार और उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग को लेकर आज रविवार (1 नवंबर) को पटना में मौन संकल्प पदयात्रा निकाली जा रही है। लोकमंच के आह्वान पर आयोजित इस पदयात्रा में शामिल होने के लिए ब्राह्मण समाज के लोग मिलर ग्राउंड में जुटे हैं। यहां से सभी लोग मौन संकल्प के साथ पदयात्रा निकालेंगे और लोकभवन पहुंचकर राज्यपाल को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपेंगे। लोकमंच के संस्थापक एवं अध्यक्ष आशीष कुमार उर्फ बब्बू झा ने कहा कि संगठन वर्ष 2004 से सामाजिक गोलबंदी और समाज को संगठित करने के लिए लगातार काम कर रहा है। यह पदयात्रा किसी के विरोध में नहीं निकाली जा रही है, बल्कि समाज से जुड़े मुद्दों को सरकार तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए संवाद स्थापित करने का लोकतांत्रिक प्रयास है। उन्होंने कहा कि हमारा मौन ही हमारा संकल्प है। ब्राह्मण कल्याण बोर्ड बनाने समेत 7 प्रमुख मांगें लोकमंच ने राज्य सरकार के सामने ब्राह्मण समाज से जुड़ी सात प्रमुख मांगें रखी हैं। संगठन की मांग है कि बिहार में ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए। इसके साथ ही समाज की आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक स्थिति का सर्वे कराकर सरकार श्वेतपत्र जारी करे, ताकि समाज की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। संगठन भगवान परशुराम की जयंती यानी अक्षय तृतीया के अवसर पर बिहार में सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की भी मांग कर रहा है। EWS अभ्यर्थियों को उम्र और परीक्षा में छूट देने की मांग लोकमंच की मांग है कि UPSC और BPSC की परीक्षाओं में EWS वर्ग के अभ्यर्थियों को भी दूसरी आरक्षित श्रेणियों की तरह उम्र सीमा और परीक्षा में शामिल होने के अवसरों में छूट दी जाए। इसके अलावा नवोदय विद्यालय और केंद्रीय विद्यालयों में EWS श्रेणी के बच्चों के नामांकन के लिए विशेष व्यवस्था करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग की सुविधा मिलनी चाहिए, ताकि आर्थिक स्थिति उनकी पढ़ाई और भविष्य के रास्ते में बाधा न बने। 1506 एकड़ जमीन को कब्जे से मुक्त कराने की मांग लोकमंच ने वर्ष 1990 से दबंगों के कब्जे में बताई जा रही करीब 1506 एकड़ रैयती जमीन को भी खाली कराने की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि इस जमीन को उसके वास्तविक हकदारों को वापस दिलाने के लिए सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। पदयात्रा के जरिए संगठन इन सभी मांगों को राज्यपाल तक पहुंचाकर सरकार का ध्यान ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दों की ओर आकर्षित करना चाहता है।

