बक्सर के सदर अस्पताल में सड़क दुर्घटना में घायल व्यवहार न्यायालय की महिला कर्मचारी को समय पर हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं मिला। इस मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो सह जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा ने सिविल सर्जन से जवाब मांगा है। 31 अक्टूबर 2026 को जारी नोटिस में न्यायाधीश ने दो घंटे तक इलाज की व्यवस्था नहीं होने पर स्पष्टीकरण मांगा है। ड्यूटी पर आते समय सड़क हादसे में घायल हुईं महिला कर्मचारी नोटिस के मुताबिक, 30 अक्टूबर को व्यवहार न्यायालय की उच्च वर्गीय लिपिक आरती कुमारी ड्यूटी पर आते समय सड़क दुर्घटना में घायल हो गईं। उनके पैर में चोट और सूजन थी। दर्द बढ़ने पर न्यायालय के कर्मचारी सुनील कुमार और संतोष कुमार उन्हें सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। सुबह करीब 10:30 बजे सरकारी पर्ची कटवाने के बाद उन्हें आपातकालीन वार्ड में डॉक्टर को दिखाया गया। एक्स-रे के बाद आगे की जांच के लिए हड्डी रोग विशेषज्ञ के चेंबर नंबर 13 में भेजा गया। वहां ताला लगा था। मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि डॉक्टर अभी नहीं आए हैं। सिविल सर्जन को फोन के बाद भी नहीं पहुंचे डॉक्टर इसके बाद साथ गए कर्मचारियों ने सिविल सर्जन, डिप्टी सर्जन और ईएमओ कार्यालय में संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वहां कोई उपलब्ध नहीं मिला। जानकारी मिलने पर न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा ने सिविल सर्जन को फोन कर इलाज की व्यवस्था करने को कहा। इसके बावजूद दोपहर 12 बजे तक अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हुए। निजी क्लिनिक में कराया प्लास्टर, 9,894 रुपए खर्च दर्द और सूजन बढ़ने पर आरती कुमारी को सदर अस्पताल के डॉक्टर डॉ. विकास पांडेय के निजी महामाया क्लिनिक ले जाया गया। वहां उनके पैर में प्लास्टर किया गया। इसके लिए 9,894 रुपए खर्च हुए। न्यायाधीश ने पूछा- आम मरीजों को कैसी सुविधा मिलती होगी? न्यायाधीश ने अपने पत्र में सवाल उठाया है कि जब न्यायालय के पदाधिकारी और कर्मचारी लगातार संपर्क कर रहे थे, तब भी घायल न्यायालय कर्मी के इलाज की व्यवस्था दो घंटे तक नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम मरीजों को किस तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती होंगी। नोटिस में सिविल सर्जन से पूछा गया है कि किन परिस्थितियों में हड्डी रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हो सके और क्यों नहीं इस मामले में कानूनी कार्रवाई करते हुए स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार के सचिव को इसकी सूचना भेजी जाए। सिविल सर्जन बोले- अभी नोटिस नहीं मिला इधर, सिविल सर्जन शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती ने बताया कि कोर्ट से एक महिला को हड्डी रोग विशेषज्ञ से दिखाने के लिए फोन आया था। हालांकि, स्पष्टीकरण से संबंधित नोटिस अभी तक उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है। बक्सर के सदर अस्पताल में सड़क दुर्घटना में घायल व्यवहार न्यायालय की महिला कर्मचारी को समय पर हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं मिला। इस मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो सह जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा ने सिविल सर्जन से जवाब मांगा है। 31 अक्टूबर 2026 को जारी नोटिस में न्यायाधीश ने दो घंटे तक इलाज की व्यवस्था नहीं होने पर स्पष्टीकरण मांगा है। ड्यूटी पर आते समय सड़क हादसे में घायल हुईं महिला कर्मचारी नोटिस के मुताबिक, 30 अक्टूबर को व्यवहार न्यायालय की उच्च वर्गीय लिपिक आरती कुमारी ड्यूटी पर आते समय सड़क दुर्घटना में घायल हो गईं। उनके पैर में चोट और सूजन थी। दर्द बढ़ने पर न्यायालय के कर्मचारी सुनील कुमार और संतोष कुमार उन्हें सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। सुबह करीब 10:30 बजे सरकारी पर्ची कटवाने के बाद उन्हें आपातकालीन वार्ड में डॉक्टर को दिखाया गया। एक्स-रे के बाद आगे की जांच के लिए हड्डी रोग विशेषज्ञ के चेंबर नंबर 13 में भेजा गया। वहां ताला लगा था। मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि डॉक्टर अभी नहीं आए हैं। सिविल सर्जन को फोन के बाद भी नहीं पहुंचे डॉक्टर इसके बाद साथ गए कर्मचारियों ने सिविल सर्जन, डिप्टी सर्जन और ईएमओ कार्यालय में संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वहां कोई उपलब्ध नहीं मिला। जानकारी मिलने पर न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा ने सिविल सर्जन को फोन कर इलाज की व्यवस्था करने को कहा। इसके बावजूद दोपहर 12 बजे तक अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हुए। निजी क्लिनिक में कराया प्लास्टर, 9,894 रुपए खर्च दर्द और सूजन बढ़ने पर आरती कुमारी को सदर अस्पताल के डॉक्टर डॉ. विकास पांडेय के निजी महामाया क्लिनिक ले जाया गया। वहां उनके पैर में प्लास्टर किया गया। इसके लिए 9,894 रुपए खर्च हुए। न्यायाधीश ने पूछा- आम मरीजों को कैसी सुविधा मिलती होगी? न्यायाधीश ने अपने पत्र में सवाल उठाया है कि जब न्यायालय के पदाधिकारी और कर्मचारी लगातार संपर्क कर रहे थे, तब भी घायल न्यायालय कर्मी के इलाज की व्यवस्था दो घंटे तक नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम मरीजों को किस तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती होंगी। नोटिस में सिविल सर्जन से पूछा गया है कि किन परिस्थितियों में हड्डी रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हो सके और क्यों नहीं इस मामले में कानूनी कार्रवाई करते हुए स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार के सचिव को इसकी सूचना भेजी जाए। सिविल सर्जन बोले- अभी नोटिस नहीं मिला इधर, सिविल सर्जन शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती ने बताया कि कोर्ट से एक महिला को हड्डी रोग विशेषज्ञ से दिखाने के लिए फोन आया था। हालांकि, स्पष्टीकरण से संबंधित नोटिस अभी तक उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है।

