Mouth Breathing: सोते समय मुंह खुला रह जाता है और नाक की जगह मुंह से लेते हैं सांस, वेबएमडी से जानें कौनसी समस्याएं हो सकती है

Mouth Breathing: सोते समय मुंह खुला रह जाता है और नाक की जगह मुंह से लेते हैं सांस, वेबएमडी से जानें कौनसी समस्याएं हो सकती है

Mouth Breathing Causes: अक्सर रात को सोते समय हमें खुद इस बात का पता नहीं चलता कि हम सांस कैसे ले रहे हैं। कई लोगों की आदत होती है कि वे सोते वक्त मुंह खुला रखते हैं और नाक की बजाय मुंह से सांस लेने लगते हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक का कहना है कि इसे मेडिकल भाषा में माउथ ब्रीदिंग कहा जाता है। ज्यादातर लोग इसे एक मामूली सी आदत या थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यकीन मानिए, यह छोटी सी लापरवाही आपके पूरे शरीर की सेहत पर भारी पड़ सकती है।इस आदत को समय रहते सुधारना बेहद जरूरी है, वरना इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। आइए जानते हैं कि इसके कारण क्या हैं और इससे क्या करना चाहिए?

क्यों नुकसानदायक होता है मुंह से सांस लेना?

वेबएमडी के अनुसार, जब हम नाक से सांस लेते हैं, तो हवा हमारे फेफड़ों तक पहुंचने से पहले फिल्टर होती है, गुनगुनी होती है और उसमें नमी घुलती है। लेकिन जब आप मुंह से सांस लेते हैं, तो ठंडी, सूखी और अनफिल्टर्ड हवा सीधे आपके गले और फेफड़ों में जाती है। इसके अलावा, रातभर मुंह खुला रहने से मुंह के अंदर की नमी यानी लार (saliva) सूख जाती है। लार हमारे मुंह की प्राकृतिक सफाई करती है और बैक्टीरिया से बचाती है। इसके सूखते ही शरीर में समस्याओं का सिलसिला शुरू हो जाता है।

मुंह से सांस लेने के कारण क्या हैं?

हेल्थलाइन के मुताबिक, यह आदत यूं ही नहीं पड़ती, इसके पीछे शरीर के भीतर कोई शारीरिक दिक्कत हो सकती है;

  • नाक का रास्ता बंद होना।
  • एडेनोइड्स या टॉन्सिल्स का बढ़ना।
  • नाक की हड्डी टेढ़ी होना (Deviated Septum)।

शरीर पर इसके क्या-क्या बुरे असर होते हैं?

  • दांतों और मसूड़ों का बेहाल होना।
  • गले में खराश और बार-बार इंफेक्शन।
  • नींद की गुणवत्ता खराब होना और थकान।
  • फेफड़ों पर असर और पुरानी बीमारियां।

इस आदत को कैसे सुधारें?

  • सबसे पहले किसी ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से मिलकर यह जांच करवाएं कि कहीं आपकी नाक में कोई रुकावट, एलर्जी या हड्डी टेढ़ी तो नहीं है।
  • कमरे की हवा और नमी का रखें ध्यान।
  • पीठ के बल सोने की बजाय करवट लेकर (side sleeping) सोने की आदत डालें।
  • नेजल स्प्रे या नेजल स्ट्रिप्स का इस्तेमाल करें।

सोते समय मुंह से सांस लेना महज एक साधारण सी आदत नहीं, बल्कि आपके शरीर द्वारा दिया जा रहा एक अंदरूनी अलर्ट है। हम अक्सर छोटी-छोटी बातों को थकावट या जुकाम मानकर टाल देते हैं, लेकिन जब नाक की जगह मुंह सांस लेने का मुख्य जरिया बन जाता है, तो यह हमारे ओरल हेल्थ से लेकर दिल और फेफड़ों तक को प्रभावित करने लगता है। यदि आप या आपके घर का कोई सदस्य (खासकर छोटे बच्चे) लगातार रात में मुंह खोलकर सो रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। शुरुआती चरण में ही ईएनटी (ENT) डॉक्टर या स्लीप स्पेशलिस्ट को दिखाना और सही वजह का पता लगाना बेहद जरूरी है। सही समय पर उठाया गया एक छोटा सा कदम आपको कई गंभीर और पुरानी बीमारियों के खतरे से बचा सकता है।

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