दिल्ली पुलिस ने कंपनी के निदेशक की फर्जी पहचान बनाकर बैंक अधिकारियों से 22.56 लाख रुपये दूसरे खाते में हस्तांतरित कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इसकी जानकारी दी। पुलिस ने आरोपियों से जुड़े मामलों में करीब 2.50 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है, जिसमें सोना, आभूषण, नकदी और एक एसयूवी शामिल है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गाजियाबाद के लोनी निवासी विनय कुमार यादव (36) और नोएडा निवासी अनिल कुमार सहगल (65) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, मामला बैंक ऑफ इंडिया की राजेंद्र प्लेस शाखा के प्रबंधक की शिकायत पर दर्ज किया गया था। इसमें कहा गया था कि पांच अगस्त को एक व्यक्ति ने खुद को कंपनी निदेशक दीपक मल्होत्रा बताकर बैंक अधिकारी से संपर्क किया और उसने पहले एक करोड़ रुपये की सावधि जमा (एफडी) कराने की बात कही और बाद में कंपनी की चेकबुक खत्म होने का हवाला देकर ईमेल के जरिये भुगतान का अनुरोध किया।
पुलिस ने बताया कि इसके बाद कंपनी के आधिकारिक ईमेल पते से मिलती-जुलती आईडी से फर्जी पत्र भेजकर 22,56,922 रुपये दूसरे खाते में हस्तांतरित करने को कहा गया। उन्होंने बताया कि बैंक अधिकारियों द्वारा दस्तावेज मांगे जाने पर आरोपी ने जल्द भुगतान का दबाव बनाया और इसके बाद आरटीजीएस के जरिये रकम हस्तांतरित कर दी गई। पुलिस के अनुसार, जांच में पता चला कि ठगी की रकम पश्चिम बंगाल में बंधन बैंक के एक म्यूल खाते में भेजी गई थी।
पुलिस के मुताबिक, फर्जी पहचान, ईमेल और दूरसंचार संबंधी तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण करने के बाद दोनों आरोपियों को लोनी से गिरफ्तार किया गया। उनके मुताबिक जांच में पश्चिम बंगाल और बिहार में सक्रिय उनके सहयोगियों के संबंध भी सामने आए। पुलिस ने बताया कि जब्त संपत्ति में करीब 1,500 ग्राम सोना, 101 सोने के सिक्के, 17 सोने की चेन, कड़े और अन्य आभूषण, तीन मोबाइल फोन, 2.37 लाख रुपये नकद तथा अगस्त 2026 में खरीदी गई एक महिंद्रा थार रॉक्स गाड़ी शामिल है।
पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम से सोना खरीदने और एटीएम से नकदी निकालने की बात भी सामने आई है। उन्होंने दावा किया कि आरोपियों की गिरफ्तारी से छह अन्य मामले भी सुलझे हैं और इनमें गुरुग्राम, पलवल, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली और रोहिणी में दर्ज मामले शामिल हैं, इन मामलों में धोखाधड़ी या ठगी के प्रयास की रकम 2.98 करोड़ रुपये, 1.30 करोड़ रुपये, 52.35 लाख रुपये, 20.50 लाख रुपये, 16.65 लाख रुपये और 88 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, विनय यादव एक अन्य मामले में भगोड़ा अपराधी है और जाली नोट के मामले में सात साल से अधिक समय से फरार था।
दोनों आरोपियों के खिलाफ गाजियाबाद, दासना, सहारनपुर, अयोध्या और फरीदाबाद समेत कई स्थानों पर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले भी दर्ज रहे हैं। पुलिस ने बताया कि दोनों की मुलाकात जेल में हुई थी और वे कथित तौर पर ‘मैजिक पेन’ के इस्तेमाल से चेक संबंधी धोखाधड़ी में भी शामिल रहे थे।

