गुजरात के बोटाद जिले की एक अदालत ने बुधवार को ट्रेन को पटरी से उतारने, उसमें सवार यात्रियों को घायल करने और उनके कीमती सामान लूटने की कोशिश के मामले में दो लोगों को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश (बोटाद) मनीषसहाय पराशर ने रमेश सालिया और जयेश बावलिया को दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई। दोनों को 2024 में कुंडली और बोटाद के बीच रेलवे पटरी पर धातु का एक भारी टुकड़ा रखने का दोषी पाया गया।
इसमें ओखा-भावनगर टर्मिनस एक्सप्रेस ट्रेन को नुकसान पहुंचा था। मामले के विवरण के अनुसार, यात्रियों को ले जा रही ट्रेन (संख्या 19210) किसी भारी वस्तु से टकरा गई, जिससे वह तुरंत रुक गई। ट्रेन के इंजन को नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।
ट्रेन के चालक और गार्ड ने पाया कि ट्रेन को नुकसान पहुंचाने के इरादे से उसके रास्ते में मीटर-गेज रेलवे पटरी का एक टुकड़ा रखा गया था। इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता के तहत गैर इरादतन हत्या की कोशिश और आपराधिक साजिश के आरोपों में मामला दर्ज किया गया था। जांच में आलव गांव के निवासी रमेश सालिया और जयेश बावलिया की संलिप्तता सामने आई।
जिला सरकारी वकील के एम मकवाना ने कहा, ‘‘दोनों आरोपियों ने अदालत को बताया कि वे कर्ज के बोझ से दबे थे और इसी वजह से उन्होंने लूटपाट के इरादे से ट्रेन को पटरी से उतारने की साजिश रची। इस कोशिश में ट्रेन के इंजन को नुकसान पहुंचा। उनकी योजना ट्रेन को पटरी से उतारने, यात्रियों को घायल करने और फिर उनका कीमती सामान लूटकर फरार होने की थी।’’
उन्होंने कहा कि हालांकि, वास्तव में दोनों पर कर्ज का कोई खास बोझ नहीं था।
अभियोजन पक्ष की दलीलों और साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए अदालत ने रेलवे अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोनों दोषियों को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

