पूर्व कोच Gaurav Khanna के बयान से खिलाड़ियों पर बना मानसिक दबाव: प्रभाकर राव

पूर्व कोच Gaurav Khanna के बयान से खिलाड़ियों पर बना मानसिक दबाव: प्रभाकर राव

(सुधीर उपाध्याय)
नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर भारतीय पैरा बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष के प्रभाकर राव ने हाल में संपन्न एशियाई पैरा खेलों में भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों के फाइनल से एक दिन पहले उनके पदक जीतने को लेकर दिए बयान के लिए पूर्व मुख्य कोच गौरव खन्ना की आलोचना करते हुए बुधवार को कहा कि उनके अनावश्यक बयान से खिलाड़ियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना और वे दो और स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए। खन्ना ने एशियाई पैरा खेलों में 23 अक्टूबर को होने वाले पैरा बैडमिंटन के फाइनल मुकाबलों से एक दिन पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कहा था कि भारत इस बार पिछली बार की तुलना में कमतर प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण, छह रजत और आठ कांस्य पदक सहित कुल 16 पदक जीतेगा। उन्होंने बाद में इस पोस्ट को डिलीट कर दिया।भारतीय खिलाड़ियों ने हालांकि अपने अभियान का अंत तीन स्वर्ण, पांच रजत और आठ कांस्य सहित कुल 16 पदक के साथ किया। पेरिस पैरालंपिक चैम्पियन नितेश कुमार और नवीन शिवकुमार ने पुरूष एकल एसएल3 और एसएल4 में स्वर्ण पदक जीता जबकि तुलसीमति मुरूगेसन और मानसी जोशी ने महिला युगल एसएल3-एसयू5 में भारत की झोली में सोने का तमगा डाला। खिलाड़ियों ने 27 अक्टूबर को खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण, भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) के अध्यक्ष और महासचिव सहित अन्य से खन्ना की शिकायत की और उनके बयान की औपचारिक जांच कराने और उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की।बीएआई के संयुक्त सचिव प्रभाकर राव ने कहा कि जब खन्ना भारतीय टीम का हिस्सा नहीं हैं तो वह इस तरह का बयान कैसे दे सकते हैं जिससे खिलाड़ियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना। प्रभाकर राव ने ‘भाषा’ से कहा, ‘‘खिलाड़ियों की शिकायत जायज है। वह (खन्ना) भारतीय बैडमिंटन टीम का हिस्सा नहीं हैं और उनको अधिकारियों ने किसी कारण से ही बाहर किया होगा।जब वह भारतीय टीम का हिस्सा नहीं हैं तो भारतीय खिलाड़ियों के फाइनल से एक दिन पहले कैसे बयान दे सकते हैं कि कौन जीतेगा और कौन हारेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने खिलाड़ियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव डाला जो एक तरह से राष्ट्र विरोधी होने की तरह है। राष्ट्र विरोधी इसलिए बोल रहा हूं क्योंकि वह खिलाड़ियों को परेशान करना चाहता था।’’
प्रभाकर राव ने कहा कि पूर्व कोच होने के नाते खन्ना पूछने पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं लेकिन इस तरह का बयान देकर खिलाड़ियों को परेशान कैसे कर सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘आपसे पुराना कोच होने के नाते खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बारे में पूछा जाता है तो आप उस पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं लेकिन आप अपने आप बयान कैसे दे सके हैं और वह भी फाइनल से ठीक पहले।जो खिलाड़ी उनकी अकादमी में नहीं है उन पर मानसिक दबाव बनाने के लिए ऐसा किया गया। हमारा मानना है कि उनकी वजह से हम दो और स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए।’’
भारतीय पैरा बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष ने कहा, ‘‘इस तरह की चीजें लिखकर खिलाड़ियों के बीच मानसिक दबाव बनाने की हम निंदा करते हैं। उनकी मंशा गलत थी और उन्होंने बौखलाहट में यह किया।’’
प्रभाकर राव ने कहा कि इस मुद्दे को जल्द की बीएआई के समक्ष रखा जाएगा और शीर्ष अधिकारी बैठक बुलाकर खन्ना पर कार्रवाई को लेकर फैसला करेंगे।उन्होंने कहा, ‘‘बाइ के समक्ष इस मुद्दे को रखा जाएगा। शीर्ष अधिकारी बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर पर फैसला करेंगे।’’
इससे पहले खिलाड़ियों ने बीएआई से मामले को गंभीरता से लेने, औपचारिक जांच कराने और संबंधित नियमों तथा आचार संहिता के तहत उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का आग्रह किया। खिलाड़ियों ने कहा कि किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों का मनोबल गिराने वाली सार्वजनिक टिप्पणियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। 

(सुधीर उपाध्याय)
नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर भारतीय पैरा बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष के प्रभाकर राव ने हाल में संपन्न एशियाई पैरा खेलों में भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों के फाइनल से एक दिन पहले उनके पदक जीतने को लेकर दिए बयान के लिए पूर्व मुख्य कोच गौरव खन्ना की आलोचना करते हुए बुधवार को कहा कि उनके अनावश्यक बयान से खिलाड़ियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना और वे दो और स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए। खन्ना ने एशियाई पैरा खेलों में 23 अक्टूबर को होने वाले पैरा बैडमिंटन के फाइनल मुकाबलों से एक दिन पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कहा था कि भारत इस बार पिछली बार की तुलना में कमतर प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण, छह रजत और आठ कांस्य पदक सहित कुल 16 पदक जीतेगा। उन्होंने बाद में इस पोस्ट को डिलीट कर दिया।

भारतीय खिलाड़ियों ने हालांकि अपने अभियान का अंत तीन स्वर्ण, पांच रजत और आठ कांस्य सहित कुल 16 पदक के साथ किया। पेरिस पैरालंपिक चैम्पियन नितेश कुमार और नवीन शिवकुमार ने पुरूष एकल एसएल3 और एसएल4 में स्वर्ण पदक जीता जबकि तुलसीमति मुरूगेसन और मानसी जोशी ने महिला युगल एसएल3-एसयू5 में भारत की झोली में सोने का तमगा डाला। खिलाड़ियों ने 27 अक्टूबर को खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण, भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) के अध्यक्ष और महासचिव सहित अन्य से खन्ना की शिकायत की और उनके बयान की औपचारिक जांच कराने और उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की।

बीएआई के संयुक्त सचिव प्रभाकर राव ने कहा कि जब खन्ना भारतीय टीम का हिस्सा नहीं हैं तो वह इस तरह का बयान कैसे दे सकते हैं जिससे खिलाड़ियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना। प्रभाकर राव ने ‘भाषा’ से कहा, ‘‘खिलाड़ियों की शिकायत जायज है। वह (खन्ना) भारतीय बैडमिंटन टीम का हिस्सा नहीं हैं और उनको अधिकारियों ने किसी कारण से ही बाहर किया होगा।

जब वह भारतीय टीम का हिस्सा नहीं हैं तो भारतीय खिलाड़ियों के फाइनल से एक दिन पहले कैसे बयान दे सकते हैं कि कौन जीतेगा और कौन हारेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने खिलाड़ियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव डाला जो एक तरह से राष्ट्र विरोधी होने की तरह है। राष्ट्र विरोधी इसलिए बोल रहा हूं क्योंकि वह खिलाड़ियों को परेशान करना चाहता था।’’
प्रभाकर राव ने कहा कि पूर्व कोच होने के नाते खन्ना पूछने पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं लेकिन इस तरह का बयान देकर खिलाड़ियों को परेशान कैसे कर सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘आपसे पुराना कोच होने के नाते खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बारे में पूछा जाता है तो आप उस पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं लेकिन आप अपने आप बयान कैसे दे सके हैं और वह भी फाइनल से ठीक पहले।

जो खिलाड़ी उनकी अकादमी में नहीं है उन पर मानसिक दबाव बनाने के लिए ऐसा किया गया। हमारा मानना है कि उनकी वजह से हम दो और स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए।’’
भारतीय पैरा बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष ने कहा, ‘‘इस तरह की चीजें लिखकर खिलाड़ियों के बीच मानसिक दबाव बनाने की हम निंदा करते हैं। उनकी मंशा गलत थी और उन्होंने बौखलाहट में यह किया।’’
प्रभाकर राव ने कहा कि इस मुद्दे को जल्द की बीएआई के समक्ष रखा जाएगा और शीर्ष अधिकारी बैठक बुलाकर खन्ना पर कार्रवाई को लेकर फैसला करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘बाइ के समक्ष इस मुद्दे को रखा जाएगा। शीर्ष अधिकारी बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर पर फैसला करेंगे।’’
इससे पहले खिलाड़ियों ने बीएआई से मामले को गंभीरता से लेने, औपचारिक जांच कराने और संबंधित नियमों तथा आचार संहिता के तहत उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का आग्रह किया। खिलाड़ियों ने कहा कि किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों का मनोबल गिराने वाली सार्वजनिक टिप्पणियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

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