खगड़िया में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार मांझी के खिलाफ खगड़िया सिविल कोर्ट में नालसी परिवाद दायर किया गया है। मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर युवाओं को लेकर की गई एक टिप्पणी से जुड़ा है। खगड़िया जिले के अलौली थाना क्षेत्र के चातरघाट निवासी शिव नारायण सिंह ने दोनों मंत्रियों के खिलाफ ऑनलाइन परिवाद दायर किया है। परिवादी के अधिवक्ता ने इसकी पुष्टि की है। युवाओं की तुलना ‘तिलचट्टे और झींगुर’ से करने का आरोप परिवाद पत्र के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने 11 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर युवाओं और आंदोलनकारियों को लेकर एक पोस्ट किया था। आरोप है कि इस पोस्ट में उन्होंने युवाओं की तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने ‘तिलचट्टे और झींगुर’ से की थी। परिवाद में कहा गया है कि बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार मांझी ने भी इस पोस्ट का समर्थन किया था। युवाओं का मान-सम्मान आहत होने का दावा परिवादी शिव नारायण सिंह ने आरोप लगाया है कि दोनों मंत्रियों की टिप्पणी से देश के युवाओं की भावनाएं आहत हुई हैं और उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंची है। परिवाद पत्र में कहा गया है कि देश के युवाओं के साहस और शौर्य को दुनिया ने सराहा है। ऐसे में इस तरह की टिप्पणी से युवा वर्ग आहत हुआ है। परिवाद के मुताबिक, इस टिप्पणी पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने भी आपत्ति जताई थी। परिवादी ने समाचार पत्र में प्रकाशित खबर का उल्लेख करते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की है। पुलिस से कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट पहुंचे परिवादी परिवाद पत्र में बताया गया है कि शिव नारायण सिंह ने मामले में कार्रवाई के लिए खगड़िया के पुलिस अधीक्षक और अलौली थानाध्यक्ष को आवेदन दिया था। परिवादी का आरोप है कि आवेदन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और मामला दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया। BNS की धाराओं में कार्रवाई की मांग मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, खगड़िया की अदालत में दायर परिवाद में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356(2), 356(3), 356(4), 353(1) और 353(2) का उल्लेख किया गया है। परिवादी ने अदालत से अपना बयान दर्ज करने, दोनों आरोपितों के खिलाफ संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई करने की प्रार्थना की है। परिवाद पत्र में चिराग पासवान समेत पांच लोगों को गवाह के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत में परिवाद दायर होने की पुष्टि हुई है। अदालत ने मामले में संज्ञान लिया है या आगे की कोई कार्रवाई की है, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं है। खगड़िया में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार मांझी के खिलाफ खगड़िया सिविल कोर्ट में नालसी परिवाद दायर किया गया है। मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर युवाओं को लेकर की गई एक टिप्पणी से जुड़ा है। खगड़िया जिले के अलौली थाना क्षेत्र के चातरघाट निवासी शिव नारायण सिंह ने दोनों मंत्रियों के खिलाफ ऑनलाइन परिवाद दायर किया है। परिवादी के अधिवक्ता ने इसकी पुष्टि की है। युवाओं की तुलना ‘तिलचट्टे और झींगुर’ से करने का आरोप परिवाद पत्र के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने 11 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर युवाओं और आंदोलनकारियों को लेकर एक पोस्ट किया था। आरोप है कि इस पोस्ट में उन्होंने युवाओं की तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने ‘तिलचट्टे और झींगुर’ से की थी। परिवाद में कहा गया है कि बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार मांझी ने भी इस पोस्ट का समर्थन किया था। युवाओं का मान-सम्मान आहत होने का दावा परिवादी शिव नारायण सिंह ने आरोप लगाया है कि दोनों मंत्रियों की टिप्पणी से देश के युवाओं की भावनाएं आहत हुई हैं और उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंची है। परिवाद पत्र में कहा गया है कि देश के युवाओं के साहस और शौर्य को दुनिया ने सराहा है। ऐसे में इस तरह की टिप्पणी से युवा वर्ग आहत हुआ है। परिवाद के मुताबिक, इस टिप्पणी पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने भी आपत्ति जताई थी। परिवादी ने समाचार पत्र में प्रकाशित खबर का उल्लेख करते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की है। पुलिस से कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट पहुंचे परिवादी परिवाद पत्र में बताया गया है कि शिव नारायण सिंह ने मामले में कार्रवाई के लिए खगड़िया के पुलिस अधीक्षक और अलौली थानाध्यक्ष को आवेदन दिया था। परिवादी का आरोप है कि आवेदन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और मामला दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया। BNS की धाराओं में कार्रवाई की मांग मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, खगड़िया की अदालत में दायर परिवाद में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356(2), 356(3), 356(4), 353(1) और 353(2) का उल्लेख किया गया है। परिवादी ने अदालत से अपना बयान दर्ज करने, दोनों आरोपितों के खिलाफ संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई करने की प्रार्थना की है। परिवाद पत्र में चिराग पासवान समेत पांच लोगों को गवाह के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत में परिवाद दायर होने की पुष्टि हुई है। अदालत ने मामले में संज्ञान लिया है या आगे की कोई कार्रवाई की है, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं है।

