भुजाहीन तीरंदाज शीतल देवी ने दो घंटे से भी कम समय में दो स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया जबकि एथलेटिक्स दल ने यहां एशियाई पैरा खेलों में भारत के पदकों की संख्या 88 तक पहुंचाने में सबसे अहम योगदान दिया। मौजूदा विश्व चैंपियन और दुनिया की नंबर एक तीरंदाज 19 वर्षीय शीतल ने सबसे पहले तोमन कुमार के साथ मिलकर मिश्रित टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक बरकरार रखा। भारतीय जोड़ी ने इंडोनेशिया की तेओडोरा ऑडी आयुडिया फेरेली और केन स्वागुमिलंग को 151-148 से हराया।इसके बाद शीतल ने चार अंक से पिछड़ने के बावजूद सिंगापुर की अलीम नूर शाहिदा को 142-139 से हराकर व्यक्तिगत स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। यह मुकाबला हांगझोउ में 2023 में हुए पिछले सत्र के व्यक्तिगत फाइनल का दोहराव था। भारत के लिए दिन की शुरुआत शानदार रही।सुवर्णा राज ने महिलाओं की एफ54 चक्का फेंक स्पर्धा में 15.66 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ स्वर्ण पदक जीता। व्हीलचेयर पर निर्भर 44 वर्षीय खिलाड़ी ने लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए चार बार चक्का 15 मीटर से अधिक दूर फेंका और अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। दिन बढ़ने के साथ भारत की पदक तालिका में और इजाफा हुआ।भारत के कुल पदकों की संख्या 88 हो गई है जिसमें 21 स्वर्ण, 26 रजत और 41 कांस्य पदक शामिल हैं। पैरा तैराकी, पैरा बैडमिंटन और पैरा टेबल टेनिस में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीते। भारत के पदकों में पैरा एथलेटिक्स का योगदान सबसे अधिक रहा है।इस प्रतियोगिता में भारत ने 18 स्वर्ण, 16 रजत और 18 कांस्य सहित कुल 52 पदक जीते हैं। दिन के प्रमुख प्रदर्शनों में शैलेश कुमार की अगुवाई में पुरुषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों का क्लीन स्वीप और महिलाओं तथा पुरुषों की 400 मीटर टी47 दौड़ में क्रमश: अंजनाबेन बुंबाडिया और दिलीप महादू गावित के स्वर्ण पदक शामिल रहे। बुंबाडिया ने महिलाओं की 400 मीटर टी47 दौड़ में 59.97 सेकेंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि भारत की जयंति बेहेडा एक मिनट 0.65 सेकेंड के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहीं।पुरुषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में शैलेश कुमार ने 1.89 मीटर की छलांग लगाकर खेलों का रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने बुधवार को लंबी कूद में कांस्य पदक जीता था। पूर्व पैरालंपिक कांस्य पदक विजेता वरुण भाटी ने सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 1.84 मीटर की छलांग के साथ रजत पदक जीता जबकि राहुल 1.81 मीटर की छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर रहे।इसके बाद गावित ने पुरुषों की 400 मीटर टी47 दौड़ में 48.27 सेकेंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने बुधवार को 100 मीटर स्पर्धा में भी पहला स्थान हासिल किया था। दिन का समापन लंबी कूद के खिलाड़ी सोलाइराज धर्मराज के स्वर्ण पदक के साथ हुआ।उन्होंने टी44/टी62/टी64 की संयुक्त स्पर्धा में 7.15 मीटर की छलांग लगाकर एशियाई रिकॉर्ड बनाया और अपना खिताब बरकरार रखा। महिलाओं की 400 मीटर टी12 स्पर्धा में दृष्टिबाधित तेजलबेन दामोर ने 57.60 सेकेंड का समय लेकर रजत पदक जीता। यह इन खेलों में उनका दूसरा पदक है।इससे पहले उन्होंने 200 मीटर टी12 स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया था। तीरंदाजी में स्वाति चौधरी ने भी इतिहास रचा। वह डब्ल्यू1 वर्ग में एशियाई पैरा खेलों में भारत का पहला पदक जीतने वाली खिलाड़ी बनीं।हालांकि, महिलाओं की व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में उन्हें चीन की सेन मेंगकान के खिलाफ 4-6 से हार के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा। किशोर पैरा तैराक रवि बुडिगिना ने पुरुषों की 50 मीटर फ्रीस्टाइल एस13 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर पदकों की हैट्रिक पूरी की। उनके अलावा तीन अन्य भारतीय तैराकों ने भी पदक जीते।कपिल कुमार ने रजत पदक हासिल किया जबकि स्वातिक पाटिल और तेजस नंदकुमार ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में कांस्य पदक जीते। इसके साथ ही तैराकी में भारत के पदकों की संख्या 10 हो गई। भारतीय दल को हालांकि अब भी स्वर्ण पदक का इंतजार है।रवि इससे पहले इस सप्ताह पुरुषों की एस13 100 मीटर बैकस्ट्रोक और फ्रीस्टाइल स्पर्धाओं में रजत पदक जीत चुके हैं। आंध्र प्रदेश के 18 वर्षीय दृष्टिबाधित तैराक ने 50 मीटर फ्रीस्टाइल में 25.89 सेकेंड का समय लेकर तीसरा स्थान हासिल किया। छब्बीस वर्षीय कपिल ने पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस10 स्पर्धा में चार मिनट 38.44 सेकेंड का समय लेकर रजत पदक जीता।जापान के अकितो मिनाई ने चार मिनट 27.44 सेकेंड के खेलों के रिकॉर्ड समय के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। चौबीस वर्षीय स्वातिक ने पुरुषों की 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एसबी9 स्पर्धा में एक मिनट 13.77 सेकेंड का समय लेकर भारत को एक और पदक दिलाया। एसबी9 वर्ग न्यूनतम शारीरिक अक्षमता वाले तैराकों के लिए है, जबकि एस13 वर्ग में दृष्टिबाधित खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जिनकी दृष्टि संबंधी अक्षमता के बावजूद पात्र दृष्टिबाधित वर्गों में सबसे कम दृष्टि हानि होती है।दिन में पूल में उतरने वाले अंतिम भारतीय तेजस ने पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक एस7 स्पर्धा में एक मिनट 18.58 सेकेंड का समय लेकर कांस्य पदक जीता। इस वर्ग में ऐसे खिलाड़ी शामिल होते हैं जिन्हें शारीरिक अक्षमता होती है और जिनका बांहों तथा धड़ पर नियंत्रण होता है लेकिन पैरों की कार्यक्षमता सीमित होती है या अंगों में कुछ विशेष कमियां होती हैं। भारत ने पुरुष एकल एसएल3 बैडमिंटन स्पर्धा में कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया जब प्रमोद भगत ने रोमांचक तीन गेम के सेमीफाइनल में कोरिया के ली सियुंघू को हराकर फाइनल में जगह बनाई।अब खिताबी मुकाबले में उनका सामना हमवतन नितेश कुमार से होगा। छह बार के विश्व चैंपियन और तोक्यो पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता 38 वर्षीय भगत ने दो घंटे नौ मिनट तक चले कड़े मुकाबले में ली को 16-21, 21-18, 21-17 से हराया। इससे पहले पेरिस पैरालंपिक चैंपियन नितेश कुमार ने पुरुष एकल एसएल3 और मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 दोनों स्पर्धाओं के फाइनल में पहुंचकर दो स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद कायम रखी।वहीं नवीन शिवकुमार ने पुरुष एकल एसएल4 के फाइनल में जगह बनाई। नितेश ने 52 मिनट तक चले मुकाबले में इंडोनेशिया के एम इमरान को 21-19, 21-16 से हराकर पुरुष एकल एसएल3 के फाइनल में प्रवेश किया। इससे पहले उन्होंने थुलासिमथी मुरुगेसन के साथ मिलकर 42 मिनट के रोमांचक सेमीफाइनल में चीन की ली मिंगपिन और शियाओ जूशियान की जोड़ी को 21-19, 14-21, 21-17 से हराया।भारतीय खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में पांच कांस्य पदक भी जीते। भारत की भाविना पटेल और शुभम वाधवा ने मिश्रित युगल एक्सडी7 टेबल टेनिस स्पर्धा में कांस्य पदक के साथ अपना अभियान समाप्त किया। सेमीफाइनल में उन्हें दक्षिण कोरिया के जांग योंगजिन और ली मिग्यू के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा।भारतीय जोड़ी को अंतिम चार के मुकाबले में 6-11, 11-8, 5-11, 8-11 से हार मिली। हालांकि, क्वार्टर फाइनल में जापान की किमी बेस्शो और मासानोरी ऊनो की जोड़ी को सीधे गेम में हराकर उन्होंने पदक पक्का कर लिया था। भाविना और शुभम ने जापानी जोड़ी को 11-9, 11-3, 11-6 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी।
भुजाहीन तीरंदाज शीतल देवी ने दो घंटे से भी कम समय में दो स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया जबकि एथलेटिक्स दल ने यहां एशियाई पैरा खेलों में भारत के पदकों की संख्या 88 तक पहुंचाने में सबसे अहम योगदान दिया। मौजूदा विश्व चैंपियन और दुनिया की नंबर एक तीरंदाज 19 वर्षीय शीतल ने सबसे पहले तोमन कुमार के साथ मिलकर मिश्रित टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक बरकरार रखा। भारतीय जोड़ी ने इंडोनेशिया की तेओडोरा ऑडी आयुडिया फेरेली और केन स्वागुमिलंग को 151-148 से हराया।
इसके बाद शीतल ने चार अंक से पिछड़ने के बावजूद सिंगापुर की अलीम नूर शाहिदा को 142-139 से हराकर व्यक्तिगत स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। यह मुकाबला हांगझोउ में 2023 में हुए पिछले सत्र के व्यक्तिगत फाइनल का दोहराव था। भारत के लिए दिन की शुरुआत शानदार रही।
सुवर्णा राज ने महिलाओं की एफ54 चक्का फेंक स्पर्धा में 15.66 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ स्वर्ण पदक जीता। व्हीलचेयर पर निर्भर 44 वर्षीय खिलाड़ी ने लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए चार बार चक्का 15 मीटर से अधिक दूर फेंका और अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। दिन बढ़ने के साथ भारत की पदक तालिका में और इजाफा हुआ।
भारत के कुल पदकों की संख्या 88 हो गई है जिसमें 21 स्वर्ण, 26 रजत और 41 कांस्य पदक शामिल हैं। पैरा तैराकी, पैरा बैडमिंटन और पैरा टेबल टेनिस में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीते। भारत के पदकों में पैरा एथलेटिक्स का योगदान सबसे अधिक रहा है।
इस प्रतियोगिता में भारत ने 18 स्वर्ण, 16 रजत और 18 कांस्य सहित कुल 52 पदक जीते हैं। दिन के प्रमुख प्रदर्शनों में शैलेश कुमार की अगुवाई में पुरुषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों का क्लीन स्वीप और महिलाओं तथा पुरुषों की 400 मीटर टी47 दौड़ में क्रमश: अंजनाबेन बुंबाडिया और दिलीप महादू गावित के स्वर्ण पदक शामिल रहे। बुंबाडिया ने महिलाओं की 400 मीटर टी47 दौड़ में 59.97 सेकेंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि भारत की जयंति बेहेडा एक मिनट 0.65 सेकेंड के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहीं।
पुरुषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में शैलेश कुमार ने 1.89 मीटर की छलांग लगाकर खेलों का रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने बुधवार को लंबी कूद में कांस्य पदक जीता था। पूर्व पैरालंपिक कांस्य पदक विजेता वरुण भाटी ने सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 1.84 मीटर की छलांग के साथ रजत पदक जीता जबकि राहुल 1.81 मीटर की छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर रहे।
इसके बाद गावित ने पुरुषों की 400 मीटर टी47 दौड़ में 48.27 सेकेंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने बुधवार को 100 मीटर स्पर्धा में भी पहला स्थान हासिल किया था। दिन का समापन लंबी कूद के खिलाड़ी सोलाइराज धर्मराज के स्वर्ण पदक के साथ हुआ।
उन्होंने टी44/टी62/टी64 की संयुक्त स्पर्धा में 7.15 मीटर की छलांग लगाकर एशियाई रिकॉर्ड बनाया और अपना खिताब बरकरार रखा। महिलाओं की 400 मीटर टी12 स्पर्धा में दृष्टिबाधित तेजलबेन दामोर ने 57.60 सेकेंड का समय लेकर रजत पदक जीता। यह इन खेलों में उनका दूसरा पदक है।
इससे पहले उन्होंने 200 मीटर टी12 स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया था। तीरंदाजी में स्वाति चौधरी ने भी इतिहास रचा। वह डब्ल्यू1 वर्ग में एशियाई पैरा खेलों में भारत का पहला पदक जीतने वाली खिलाड़ी बनीं।
हालांकि, महिलाओं की व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में उन्हें चीन की सेन मेंगकान के खिलाफ 4-6 से हार के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा। किशोर पैरा तैराक रवि बुडिगिना ने पुरुषों की 50 मीटर फ्रीस्टाइल एस13 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर पदकों की हैट्रिक पूरी की। उनके अलावा तीन अन्य भारतीय तैराकों ने भी पदक जीते।
कपिल कुमार ने रजत पदक हासिल किया जबकि स्वातिक पाटिल और तेजस नंदकुमार ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में कांस्य पदक जीते। इसके साथ ही तैराकी में भारत के पदकों की संख्या 10 हो गई। भारतीय दल को हालांकि अब भी स्वर्ण पदक का इंतजार है।
रवि इससे पहले इस सप्ताह पुरुषों की एस13 100 मीटर बैकस्ट्रोक और फ्रीस्टाइल स्पर्धाओं में रजत पदक जीत चुके हैं। आंध्र प्रदेश के 18 वर्षीय दृष्टिबाधित तैराक ने 50 मीटर फ्रीस्टाइल में 25.89 सेकेंड का समय लेकर तीसरा स्थान हासिल किया। छब्बीस वर्षीय कपिल ने पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस10 स्पर्धा में चार मिनट 38.44 सेकेंड का समय लेकर रजत पदक जीता।
जापान के अकितो मिनाई ने चार मिनट 27.44 सेकेंड के खेलों के रिकॉर्ड समय के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। चौबीस वर्षीय स्वातिक ने पुरुषों की 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एसबी9 स्पर्धा में एक मिनट 13.77 सेकेंड का समय लेकर भारत को एक और पदक दिलाया। एसबी9 वर्ग न्यूनतम शारीरिक अक्षमता वाले तैराकों के लिए है, जबकि एस13 वर्ग में दृष्टिबाधित खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जिनकी दृष्टि संबंधी अक्षमता के बावजूद पात्र दृष्टिबाधित वर्गों में सबसे कम दृष्टि हानि होती है।
दिन में पूल में उतरने वाले अंतिम भारतीय तेजस ने पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक एस7 स्पर्धा में एक मिनट 18.58 सेकेंड का समय लेकर कांस्य पदक जीता। इस वर्ग में ऐसे खिलाड़ी शामिल होते हैं जिन्हें शारीरिक अक्षमता होती है और जिनका बांहों तथा धड़ पर नियंत्रण होता है लेकिन पैरों की कार्यक्षमता सीमित होती है या अंगों में कुछ विशेष कमियां होती हैं। भारत ने पुरुष एकल एसएल3 बैडमिंटन स्पर्धा में कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया जब प्रमोद भगत ने रोमांचक तीन गेम के सेमीफाइनल में कोरिया के ली सियुंघू को हराकर फाइनल में जगह बनाई।
अब खिताबी मुकाबले में उनका सामना हमवतन नितेश कुमार से होगा। छह बार के विश्व चैंपियन और तोक्यो पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता 38 वर्षीय भगत ने दो घंटे नौ मिनट तक चले कड़े मुकाबले में ली को 16-21, 21-18, 21-17 से हराया। इससे पहले पेरिस पैरालंपिक चैंपियन नितेश कुमार ने पुरुष एकल एसएल3 और मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 दोनों स्पर्धाओं के फाइनल में पहुंचकर दो स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद कायम रखी।
वहीं नवीन शिवकुमार ने पुरुष एकल एसएल4 के फाइनल में जगह बनाई। नितेश ने 52 मिनट तक चले मुकाबले में इंडोनेशिया के एम इमरान को 21-19, 21-16 से हराकर पुरुष एकल एसएल3 के फाइनल में प्रवेश किया। इससे पहले उन्होंने थुलासिमथी मुरुगेसन के साथ मिलकर 42 मिनट के रोमांचक सेमीफाइनल में चीन की ली मिंगपिन और शियाओ जूशियान की जोड़ी को 21-19, 14-21, 21-17 से हराया।
भारतीय खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में पांच कांस्य पदक भी जीते। भारत की भाविना पटेल और शुभम वाधवा ने मिश्रित युगल एक्सडी7 टेबल टेनिस स्पर्धा में कांस्य पदक के साथ अपना अभियान समाप्त किया। सेमीफाइनल में उन्हें दक्षिण कोरिया के जांग योंगजिन और ली मिग्यू के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा।
भारतीय जोड़ी को अंतिम चार के मुकाबले में 6-11, 11-8, 5-11, 8-11 से हार मिली। हालांकि, क्वार्टर फाइनल में जापान की किमी बेस्शो और मासानोरी ऊनो की जोड़ी को सीधे गेम में हराकर उन्होंने पदक पक्का कर लिया था। भाविना और शुभम ने जापानी जोड़ी को 11-9, 11-3, 11-6 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी।
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