दिल्ली की एक अदालत ने शादी का झूठा वादा कर एक महिला से यौन संबंध बनाने के आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि वह अपनी गिरफ्तारी से पहले जांच में शामिल हुआ था और जांच अधिकारी उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं बता सके। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजिंदर कुमार उस व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे 16 सितंबर को कीर्ति नगर थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 के तहत दर्ज एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोपी पहले से विवाहित है।
उसने दावा किया कि उनका रिश्ता आपसी सहमति से था। धारा 69 छलपूर्ण तरीकों का इस्तेमाल करके बनाए गए यौन संबंधों से संबंधित है, जिसमें विवाह का ऐसा झूठा वादा भी शामिल है जिसे पूरा करने का इरादा न हो। अदालत ने 16 अक्टूबर के आदेश में कहा, “आवेदक अपनी गिरफ्तारी से पहले इस मामले की जांच में शामिल हो चुका है।
आरोपी से/आरोपी के कहने पर कुछ भी बरामद नहीं किया जाना है…। जांच अधिकारी यह बताने में विफल रहा है कि ऐसा कौन-सा आधार है जिसके लिए आवेदक से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।”
अदालत ने उस व्यक्ति को 25,000 रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और इतनी ही राशि का एक जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया। बचाव पक्ष के वकील ने दावा किया कि उस व्यक्ति को फंसाया गया था और वह तथा शिकायतकर्ता 2024 से रिश्ते में थे।
उन्होंने दावा किया कि दोनों वयस्क और स्नातक थे तथा यह रिश्ता सहमति से था।

