Asian Para Games: शीतल देवी और पायल नाग ने जीता कंपाउंड तीरंदाजी में रजत पदक

Asian Para Games: शीतल देवी और पायल नाग ने जीता कंपाउंड तीरंदाजी में रजत पदक

शीतल देवी और पायल नाग की भारतीय महिला युगल जोड़ी ने बुधवार को यहां एशियाई पैरा खेलों में फाइनल में हारने के कारण रजत पदक हासिल किया। जन्म से ही बिना हाथों वाली शीतल तथा हाथ और पांव से दिव्यांग पायल स्वर्ण पदक के मुकाबले में चीन की जू ज़ुएक़िंग और झाओ जिंग से 141-150 से हार गईं। भारतीय खिलाड़ी शुरू से ही चीन की खिलाड़ियों के सामने संघर्ष करती हुई दिखी।शीतल ने बेहतर खेल दिखाया और उन्होंने चार 10 अंक हासिल किए लेकिन पायल उनकी तरह प्रदर्शन नहीं कर पाई। उन्होंने अपने अंतिम तीर पर सात अंक बनाए। इससे पहले वह केवल नौ और आठ अंक ही हासिल कर पाईं थी।शीतल ने इस स्पर्धा में लगातार दूसरा रजत पदक जीता है। पिछले एशियाई पैरा खेलों में उन्होंने सरिता देवी के साथ जोड़ी बनाकर दूसरा स्थान हासिल किया था। व्यक्तिगत स्पर्धा में भी वह स्वर्ण पदक की दावेदार हैं।जम्मू और कश्मीर के किश्तवार जिले में बसे लॉइधर गांव की रहने वाली शीतल फोकोमेलिया नामक एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति के कारण भुजाहीन पैदा हुई थी। आठ साल की उम्र में पायल 11,000 वोल्ट की हाई-टेंशन बिजली की लाइन के संपर्क में आ गई जिससे उनके हाथ और पांवों को काटना पड़ा था। इस बीच तोमन कुमार और श्याम सुंदर स्वामी की पुरुष युगल जोड़ी कांस्य पदक से चूक गई।उन्हें चीन के ऐ शिनलियांग और झांग यिचेंग से 153-154 से हार का सामना करना पड़ा। 

शीतल देवी और पायल नाग की भारतीय महिला युगल जोड़ी ने बुधवार को यहां एशियाई पैरा खेलों में फाइनल में हारने के कारण रजत पदक हासिल किया। जन्म से ही बिना हाथों वाली शीतल तथा हाथ और पांव से दिव्यांग पायल स्वर्ण पदक के मुकाबले में चीन की जू ज़ुएक़िंग और झाओ जिंग से 141-150 से हार गईं। भारतीय खिलाड़ी शुरू से ही चीन की खिलाड़ियों के सामने संघर्ष करती हुई दिखी।

शीतल ने बेहतर खेल दिखाया और उन्होंने चार 10 अंक हासिल किए लेकिन पायल उनकी तरह प्रदर्शन नहीं कर पाई। उन्होंने अपने अंतिम तीर पर सात अंक बनाए। इससे पहले वह केवल नौ और आठ अंक ही हासिल कर पाईं थी।

शीतल ने इस स्पर्धा में लगातार दूसरा रजत पदक जीता है। पिछले एशियाई पैरा खेलों में उन्होंने सरिता देवी के साथ जोड़ी बनाकर दूसरा स्थान हासिल किया था। व्यक्तिगत स्पर्धा में भी वह स्वर्ण पदक की दावेदार हैं।

जम्मू और कश्मीर के किश्तवार जिले में बसे लॉइधर गांव की रहने वाली शीतल फोकोमेलिया नामक एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति के कारण भुजाहीन पैदा हुई थी। आठ साल की उम्र में पायल 11,000 वोल्ट की हाई-टेंशन बिजली की लाइन के संपर्क में आ गई जिससे उनके हाथ और पांवों को काटना पड़ा था। इस बीच तोमन कुमार और श्याम सुंदर स्वामी की पुरुष युगल जोड़ी कांस्य पदक से चूक गई।

उन्हें चीन के ऐ शिनलियांग और झांग यिचेंग से 153-154 से हार का सामना करना पड़ा।

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