US Iran War News: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के सामने झुकने से इनकार कर दिया है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि उसका संवर्धित यूरेनियम देश की सीमा से बाहर नहीं भेजा जाएगा। इस बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की ईरान यात्रा ने कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन ने नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर हमले की योजना से इनकार किया है, लेकिन सैन्य गतिविधियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
Iran Enriched Uranium: रूस को यूरेनियम सौंपने की पेशकश नामंजूर
ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम को रूस की निगरानी में रखने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 400 किलोग्राम परमाणु सामग्री को देश से बाहर स्थानांतरित करने पर चर्चा हुई थी। हालांकि, तेहरान का रुख स्पष्ट है कि परमाणु सामग्री ईरानी क्षेत्र में ही रहेगी। इस फैसले से अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु विवाद सुलझाने की कोशिशों को नया झटका लग सकता है।
Iran US tensions: भरोसा बहाल किए बिना बातचीत नहीं
ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वाशिंगटन को पहले अपने ऊपर कायम अविश्वास दूर करना होगा। तेहरान का आरोप है कि पहले भी कूटनीतिक बातचीत के दौरान अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की थी। इसी अनुभव के कारण ईरान अब किसी समझौते की दिशा में आगे बढ़ने से पहले ठोस भरोसे की मांग कर रहा है।
ईरान ने अपनी सात सूत्रीय पेशकश पर भी समझौता करने से इनकार किया है। हालांकि, इन शर्तों का पूरा विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है। ऐसे में बातचीत की अगली दिशा दोनों पक्षों की शर्तों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर निर्भर करेगी।
Asim Munir Iran Visit: पाकिस्तान की मध्यस्थता से बढ़ी उम्मीद
पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की तेहरान यात्रा को इस गतिरोध के बीच अहम माना जा रहा है। उनकी यात्रा का उद्देश्य ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता के प्रयासों को आगे बढ़ाना है। पाकिस्तान के लिए यह पहल क्षेत्रीय स्थिरता और अपने पड़ोस में तनाव कम करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, किसी ठोस समझौते या वार्ता की बहाली की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
अमेरिकी हमले पर बयान, लेकिन सैन्य तैनाती से सवाल
अमेरिका की तीन नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर हमला करने की कोई योजना नहीं है। इसके बावजूद क्षेत्र में तीन अमेरिकी विमानवाहक पोतों के स्ट्राइक ग्रुप की तैनाती और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की इजरायल यात्रा ने अमेरिकी रणनीति को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं।
यहां एक अहम अंतर समझना जरूरी है: चुनावों से पहले हमले की योजना न होने का बयान भविष्य की हर सैन्य कार्रवाई पर स्थायी रोक की गारंटी नहीं देता। दूसरी ओर, सैन्य तैनाती अपने आप में हमले का प्रमाण भी नहीं है।
परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी अविश्वास के बीच फिलहाल कूटनीति की राह कठिन बनी हुई है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान की पहल और वाशिंगटन-तेहरान के रुख से ही स्पष्ट होगा कि तनाव कम करने का अवसर बनता है या टकराव का खतरा बढ़ता है।

