दिल्ली के एक न्यायाधिकरण ने 2022 में एक कार दुर्घटना में मार गए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के 59 वर्षीय अधिशासी अभियंता के परिवार को 1.43 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के पीठासीन अधिकारी अभिलाष मल्होत्रा ने 13 अक्टूबर को पारित एक आदेश में कार की बीमा कंपनी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस को मुआवजे की राशि जमा करने का निर्देश दिया। मृतक की पत्नी द्वारा दायर याचिका के अनुसार, जैन 17 सितंबर, 2022 को कार की आगे वाली यात्री सीट पर बैठे थे।
यह कार यहां आर के पुरम में आउटर रिंग रोड पर एक सीएनजी पंप के पास बस स्टॉप पर खड़ी एक बस के पिछले हिस्से से टकरा गई थी। याचिका में कहा गया है कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया और बाद में वसंत कुंज स्थित इंडियन स्पाइनल इंजुरीज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 2022 में 20 सितंबर को उनकी मृत्यु हो गई। याचिका के मुताबिक, कार चालक गुल्फाम के पास केवल लर्नर लाइसेंस (वाहन सीखने के लिए मिलने वाला अस्थायी परमिट) था।
वह जैन से गाड़ी चलाना सीख रहा था, गंतव्य तक पहुंचने की जल्दबाजी में उसने ब्रेक की जगह गलती से एक्सीलेटर दबा दिया था। न्यायाधिकरण ने पाया कि कार मालिक और चालक की मां रहमीना खातून ने अपने बयान में स्वीकार किया कि डीडीए (दिल्ली विकास प्राधिकरण) अभियंता ने गुल्फाम को कार चालक के रूप में काम पर रखा था और उसे 20,000 रुपये प्रतिमाह का वेतन देते थे। न्यायाधिकरण ने कहा कि इससे साफ होता है कि कार का इस्तेमाल किराए पर किया जा रहा था और जैन एक भुगतान करने वाले यात्री थे, न कि ड्राइविंग सिखाने वाले प्रशिक्षक।
न्यायाधिकरण ने कहा, “यह स्पष्ट है कि मृतक कार में किराए पर यात्रा करने वाला एक यात्री था और उसे प्रशिक्षक नहीं माना जा सकता। इसलिए, प्रतिवादी 1 (चालक) स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस धारक योग्य व्यक्ति की सहायता के बिना वाहन चलाने में लापरवाही बरत रहा था।”
न्यायाधिकरण ने यह भी कहा, “यदि प्रतिवादी 1 का यह दावा मान भी लिया जाए कि उसने ब्रेक की जगह गलती से एक्सीलेटर दबा दिया था, तब भी लापरवाही के तत्व को नकारा नहीं जा सकता।”
नीतिगत शर्तों के उल्लंघन को स्वीकार करते हुए न्यायाधिकरण ने भुगतान करें और वसूली करें का सिद्धांत लागू किया। इसके तहत बीमा कंपनी को पहले तीसरे पक्ष (पीड़ित) को मुआवजे का भुगतान करना होता है और बाद में वह बीमित व्यक्ति (वाहन मालिक) से वह राशि वसूल सकती है।
न्यायाधिकरण ने चालक, मालिक और बीमा कंपनी को मुआवजे के भुगतान के लिए संयुक्त रूप से उत्तरदायी ठहराया, लेकिन बीमा कंपनी को मालिक व चालक से पूरी राशि वसूलने का अधिकार दिया। मुआवजे की राशि की गणना के लिए न्यायाधिकरण ने जुलाई 2022 की वेतन पर्ची के आधार पर जैन की कर-पश्चात मासिक आय को आधार बनाया और उनकी आयु को देखते हुए भविष्य की संभावनाओं के लिए इसमें 15 प्रतिशत अतिरिक्त राशि जोड़ी। व्यक्तिगत खर्चों के लिए एक-तिहाई राशि काटने के बाद, परिजनों की वित्तीय निर्भरता के नुकसान की गणना लगभग 1.4 करोड़ रुपये की गई।
इसके बाद न्यायाधिकरण ने अन्य मदों में मुआवजा जोड़ा, जिसमें संगति का नुकसान (पति/पिता का साथ खोने का दुख), संपत्ति का नुकसान, अंतिम संस्कार के खर्च और ब्याज शामिल हैं।

