न्यू चंडीगढ़ की शामलात जमीन पर कोर्ट का बड़ा फैसला:मुआवजे पर पंचायत का नहीं, जमीन मालिकों का हक; हिस्सेदारी के हिसाब से बंटेगी राशि

न्यू चंडीगढ़ की शामलात जमीन पर कोर्ट का बड़ा फैसला:मुआवजे पर पंचायत का नहीं, जमीन मालिकों का हक; हिस्सेदारी के हिसाब से बंटेगी राशि

मोहाली अदालत ने न्यू चंडीगढ़ की शामलात यानी गांव की साझी जमीन के मुआवजे को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चकबंदी के दौरान गांव के लोगों की निजी जमीन से कटौती करके बनाई गई साझी जमीन के अधिग्रहण का मुआवजा ग्राम पंचायत का नहीं, बल्कि संबंधित खेवटदारों यानी जमीन के मूल मालिकों का हक है। अदालत ने पंचायत के नाम आवंटित मुआवजा राशि कोर्ट में जमा कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, राजस्व अधिकारियों को मालिकों की हिस्सेदारी की जांच करके मुआवजा बांटने को कहा है। 2013 में मुल्लांपुर अर्बन स्टेट के लिए हुआ था अधिग्रहण पंजाब सरकार ने मुल्लांपुर अर्बन स्टेट परियोजना के लिए 12 सितंबर 2013 को अवार्ड नंबर 540 के तहत गांव भड़ोंजियां, तहसील खरड़ की जमीन का अधिग्रहण किया था। राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का मालिकाना हक ग्राम पंचायत देह के नाम दर्ज होने के कारण भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने मुआवजे की राशि पंचायत के नाम आवंटित कर दी थी। इसके खिलाफ जसवंत सिंह, उजागर सिंह समेत गांव के 41 खेवटदारों ने भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 30 के तहत अदालत में याचिका दायर की थी। उन्होंने मांग की थी कि मुआवजे की राशि ग्राम पंचायत के बजाय जमीन के मूल मालिकों में उनकी हिस्सेदारी के अनुसार बांटी जाए। निजी जमीन से कटौती कर बनाई गई थी साझी जमीन याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि चकबंदी के दौरान गांव के रास्तों और अन्य साझा जरूरतों के लिए खेवटदारों की निजी जमीन में से अनुपात के अनुसार कटौती करके यह जमीन बनाई गई थी। राजस्व रिकॉर्ड के खेती वाले कॉलम में भी ‘मकबूजा मालकान’ यानी मालिकों का कब्जा दर्ज था। उनका कहना था कि जमीन का इस्तेमाल गांव की साझा जरूरतों के लिए होने और रिकॉर्ड में पंचायत का नाम दर्ज होने मात्र से मुआवजे पर पंचायत का अधिकार नहीं बनता। जमीन के मूल मालिकों को उनकी हिस्सेदारी के अनुसार मुआवजा मिलना चाहिए। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की फुल बेंच और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। इनमें सूरज भान बनाम हरियाणा राज्य और हरियाणा राज्य बनाम जय सिंह के मामले शामिल थे। अदालत ने माना कि चकबंदी के दौरान गांव की साझा जरूरतों के लिए बनाई गई ऐसी जमीन, जिसका विशिष्ट इस्तेमाल पंचायत के अधिकार क्षेत्र में नहीं था, उसके अधिग्रहण का मुआवजा खेवटदारों को उनकी हिस्सेदारी के अनुसार मिलना चाहिए। कोर्ट में जमा होगी राशि, रिकॉर्ड जांचकर बांटेगा राजस्व विभाग अदालत ने पंचायत के नाम आवंटित मुआवजा राशि कोर्ट में जमा कराने के निर्देश दिए हैं। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर और राजस्व अधिकारी खेवटदारों के राजस्व रिकॉर्ड तथा ‘हसब रसद खेवट’ यानी खेवट में दर्ज हिस्सेदारी के आधार पर जांच करेंगे। इसके बाद मुआवजे की राशि संबंधित जमीन मालिकों में उनकी हिस्सेदारी के अनुसार बांटी जाएगी।

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