भास्कर अपडेट्स:पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन स्कॉलरशिप में आधार जरूरी; जिनके पास नहीं, उनका कार्ड बनवाने में मदद की जाएगी

भास्कर अपडेट्स:पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन स्कॉलरशिप में आधार जरूरी; जिनके पास नहीं, उनका कार्ड बनवाने में मदद की जाएगी

सरकार ने PM CARES for Children योजना के तहत मिलने वाली स्कॉलरशिप (कक्षा 1 से 12) के लिए आधार ऑथेंटिकेशन जरूरी कर दिया है। यानी बच्चे को आधार से पहचान बतानी होगी। लेकिन सरकार ने साथ में यह भी साफ कहा है कि अगर किसी बच्चे के पास आधार नहीं है या उसका आधार वेरिफिकेशन फेल हो जाता है, तो भी उसे स्कॉलरशिप से वंचित नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल सर्टिफिकेट, राशन कार्ड जैसे दूसरे दस्तावेजों से पहचान और माता-पिता से रिश्ता साबित करके मदद दी जाएगी, और विभाग खुद उसका आधार बनवाने में मदद करेगा। आज की बाकी बड़ी खबरें… सुप्रीम कोर्ट बोला- चुनावी हलफनामों में गलत जानकारी देने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ कोई भी शिकायत कर सकता है सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि आम नागरिक, चुनाव हलफनामों में गलत जानकारी देने या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने वाले निर्वाचित उम्मीदवारों के खिलाफ ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ (RoP Act) के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘दंड प्रक्रिया संहिता’ (CrPC) की धारा 195 के तहत लगाई गई पाबंदियां, ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज करने के रास्ते में नहीं आएंगी। अंकिता के माता-पिता CBI से मिले, पूर्व विधायक के नार्को टेस्ट की मांग अंकिता भंडारी हत्याकांड में शुक्रवार को उसके माता-पिता ने दिल्ली में सीबीआई अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौड़ और उर्मिला सनावर के नार्को टेस्ट की मांग की। सनावर ने बातचीत के ऑडियो-वीडियो जारी किए थे, जिनमें एक ‘वीआईपी’ की भूमिका का दावा था। सीबीआई के विशेष निदेशक मनोज शशिधर और संपत मीणा ने पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और मां सोनी देवी को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। राष्ट्रपति ने 12 अक्टूबर को गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया। वे 19 अक्टूबर को शपथ लेंगे। तलाक के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तलाक के सभी तरीकों के लिए एकसमान प्रक्रिया संबंधी दिशा-निर्देश बनाने की मांग पर शुक्रवार को केंद्र से जवाब मांगा। कोर्ट ने याचिका को तलाक-ए-हसन को चुनौती देने वाली लंबित याचिका के साथ जोड़ दिया। तलाक-ए-हसन में पति 3 माह तक हर माह 1 बार तलाक बोलता है। याचिका में तलाकशुदा महिलाओं व बच्चों को आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा की भी मांग की गई।

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