मुख्य चुनाव आयुक्त की बर्खास्तगी, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया रद्द करने और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों व वकीलों पर कथित पुलिस दमन बंद करने की मांग को लेकर दिशा छात्र संगठन ने शुक्रवार को छोटा बघाड़ा में आक्रोश मार्च निकाला। छात्रों और युवाओं ने जंतर-मंतर को दोबारा नियमित विरोध स्थल का दर्जा देने तथा हिरासत में लिए गए लोगों की तत्काल रिहाई की मांग उठाई। मार्च पूर्वांचल चौराहे से शुरू होकर एनी बेसेंट स्कूल होते हुए सब्जी मंडी पर समाप्त हुआ। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर सभाएं कर लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे उठाए गए। दिशा छात्र संगठन के अमन ने कहा कि जंतर-मंतर को नियमित विरोध स्थल के दर्जे से हटाए जाने के बाद से ही संगठन इसे बहाल कराने के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के सामने अपनी मांग रखना और विरोध दर्ज कराना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है। शासन को असहमति की आवाजों को दबाने के बजाय लोगों को अपनी बात रखने का अवसर देना चाहिए। संगठन इस अधिकार की बहाली के लिए संघर्ष जारी रखेगा। नौजवान भारत सभा के प्रशांत ने दिल्ली में पत्रकारों और वकीलों के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकारों को रिपोर्टिंग करने से रोका जा रहा है और हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने कुछ स्थानों पर पत्रकारों के साथ मारपीट और महिला पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतों का भी उल्लेख किया। प्रशांत ने कहा कि मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से काम करने से रोकना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। प्रदर्शनकारियों ने सिटिजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) से जुड़े आशुतोष रांका और सौरभ दास की रिहाई की मांग भी उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने दोनों को अवैध रूप से पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है। प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल रिहा करने की मांग की। मार्च में शामिल छात्रों और युवाओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने, SIR की प्रक्रिया तत्काल रद्द करने, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई बंद करने और पत्रकारों-वकीलों को बिना बाधा अपना काम करने देने की मांग की। उन्होंने जंतर-मंतर को नियमित विरोध स्थल के रूप में बहाल करने पर भी जोर दिया।
मार्च में निधि, प्रियांश, सूरज, चन्द्रप्रकाश, जय, हर्ष, पूजा, आरती, सनी और विंदरेश समेत सैकड़ों छात्र-युवा शामिल रहे।

