चर्चा में आ गई भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष की पोस्ट:’कान का कच्चा’ न होने की नसीहत दी थी; कुछ घंटों में डिलीट हो गई

चर्चा में आ गई भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष की पोस्ट:’कान का कच्चा’ न होने की नसीहत दी थी; कुछ घंटों में डिलीट हो गई

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डा. धर्मेंद्र सिंह की गुरुवार की सुबह फेसबुक पर की गई एक पोस्ट खूब चर्चा में रही। इसमें उन्होंने रामायण से लेकर महाभारत तक उन उदाहरणों का जिक्र किया था, जिसके कारण कुछ गलत हुआ। उन्होंने अपनी पोस्ट में यह नसीहत भी दी थी कि कान का कच्चा नहीं होना चाहिए। जैसे ही यह पोस्ट सार्वजनिक हुई, इसके निहितार्थ निकाले जाने लगे। कुछ घंटे बाद ही इसे डिलीट कर दिया गया। लेकिन राजनीतिक गलियारों में अब भी इसकी चर्चा है। इस मामले में डा. धर्मेंद्र सिंह के कुछ करीबी सफाई देते हैं कि यह सूक्ति थी, जिसे पोस्ट कर दिया गया। इसका कोई राजनीतिक कारण या निहितार्थ नहीं है। पोस्ट के बाद काफी फोन होने लगे, लोगों को गलतफहमी होने लगी, इसलिए उस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया। पहले जानिए पोस्ट में क्या लिखा था डा. धर्मेंद्र सिंह ने लिखा था कि ”रामायण से लेकर महाभारत तक विनाश की शुरुआत कभी हथियारों से नहीं हुई। विनाश की शुरुआत हुई गलत बातें सुनने से, मंथरा की सुनी रामजी को वनवास हुआ,सूर्पनखा की सुनी लंका जलकर राख हुई,शकुनि की सुनी तो कुरु वंश का नाश हो गया और एक धोबी की बातों से तो अयोध्या ही सुनी हो गई।
इसलिए इतिहास से सीख लेनी चाहिए की कान के कच्चे मत बनो कोई आपके कान भरे तो बुद्धि का इस्तेमाल कीजिए, वरना पछतावे के अलावा कुछ हाथ नहीं लगेगा। जय सियाराम जी।” अब पढ़िए, क्यों निकाले जा रहे राजनीतिक निहितार्थ डा. धर्मेंद्र सिंह गोरखपुर महानगर के अध्यक्ष रहे, दो बार क्षेत्रीय अध्यक्ष रहे और लगातार दूसरी बार से प्रदेश में उपाध्यक्ष हैं। उन्हें एमएलसी भी बनाया गया है। वह काफी शांत स्वभाव के और विवादों से दूर रहने वाले नेता माने जाते हैं। सोशल मीडिया पर कुछ पता-तुला ही लिखते हैं। उनकी अधिकतर पोस्ट उनकी दिनभर की गतिविधि से जुड़ी ही रहती है। लेकिन इस तरह की पोस्ट अक्सर आहत होकर लिखी जाती है। ‘कान के कच्चे’ से आशय किसी को सलाह देने से है। कोई ऐसा, जिससे लिखने वाले के अच्छे संबंध हों। इस मामले को कुछ भाजपा पदाधिकारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जो पहले उनके करीबी हुआ करते थे लेकिन अब अंदरखाने विरोध करते नजर आते हैं। पोस्ट लिखने के बाद उसे डिलीट कर देने से लोगों की जिज्ञासा और बढ़ गई है। एक भाजपा नेता ने बताया कि कुछ समय पहले भी डा. धर्मेंद्र सिंह ने एक पोस्ट डिलीट की थी। उसमें भी किसी करीबी से हुए दुख की ओर इशारा किया गया था।

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