सुपौल के स्कूल में ₹20.91 लाख खर्च का हिसाब नहीं:2 महीने बाद भी कार्रवाई नहीं: जांच में बिल-विपत्र और निर्माण कार्यों के साक्ष्य नहीं मिले

सुपौल के स्कूल में ₹20.91 लाख खर्च का हिसाब नहीं:2 महीने बाद भी कार्रवाई नहीं: जांच में बिल-विपत्र और निर्माण कार्यों के साक्ष्य नहीं मिले

सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड स्थित भागीरथ उच्च माध्यमिक विद्यालय, निर्मली में विद्यालय विकास मद के 20.91 लाख रुपए के खर्च का हिसाब नहीं मिल रहा है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) की जांच रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रभारी प्रधानाध्यापक सुनील कुमार सिंह के कार्यकाल में विकास कोष से राशि खर्च की गई, लेकिन इससे जुड़े जरूरी अभिलेख और कराए गए निर्माण कार्यों के साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए। मामले में दो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायत के बाद शुरू हुई जांच मामला कमांड कंट्रोल पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत में पूर्व प्रभारी प्रधानाध्यापक पर वित्तीय राशि के दुरुपयोग और नवपदस्थापित प्रधानाध्यापक को वित्तीय प्रभार नहीं सौंपने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद बीईओ पिपरा मनीकांत कुमार को जांच की जिम्मेदारी दी गई। दो बार स्कूल पहुंचे बीईओ, नहीं मिले जरूरी कागजात बीईओ ने 20 जुलाई 2026 को विद्यालय पहुंचकर जांच की। इस दौरान विद्यालय के लिपिक सनोज कुमार से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की बात सामने आई। 23 जुलाई को बीईओ दोबारा विद्यालय पहुंचे और अभिलेख मांगे, लेकिन संबंधित कागजात उपलब्ध नहीं कराए गए। बीईओ कार्यालय ने छात्र कोष, विकास कोष, जमीन की नीलामी प्रक्रिया से संबंधित पंजी, रोकड़ पंजी और पासबुक समेत अन्य जरूरी अभिलेख उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसके लिए 24 जुलाई तक का समय दिया गया था। ₹20.91 लाख के खर्च का साक्ष्य नहीं मिला बीईओ की जांच रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रभारी प्रधानाध्यापक सुनील कुमार सिंह के कार्यकाल में विकास कोष से 20,91,003.70 रुपए खर्च किए गए। लेकिन जांच के दौरान बैठक पंजी, सूचना पंजी, स्टॉक पंजी और बिल-विपत्र उपलब्ध नहीं कराए गए। इस राशि से कराए गए निर्माण कार्यों के साक्ष्य भी नहीं मिले। विभागीय पत्र में इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए राशि के गबन की आशंका जताई गई है। 29 जुलाई को डीईओ को भेजी गई रिपोर्ट बीईओ ने 29 जुलाई को जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) को जांच रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानाध्यापक ने सभी अभिलेख डीईओ कार्यालय में जमा होने की बात कही थी, लेकिन जांच के लिए बीईओ को रिकॉर्ड नहीं मिले। उपलब्ध अभिलेखों की जांच में जमीन की डाक प्रक्रिया में भी अनियमितता की बात सामने आई। इसके बाद 1 सितंबर को दोबारा जांच रिपोर्ट जारी की गई। हालांकि, अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। जांच के बाद होगी कार्रवाई डीपीओ माध्यमिक आलोक शेखर आनंद ने बताया कि मामला फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं है। यदि राशि का हिसाब नहीं मिल रहा है या गबन का मामला है, तो जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं, बीईओ पिपरा मनीकांत कुमार ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद जांच की गई थी। संबंधित कागजात उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके बाद जिला स्तर पर जांच रिपोर्ट सौंप दी गई है। सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड स्थित भागीरथ उच्च माध्यमिक विद्यालय, निर्मली में विद्यालय विकास मद के 20.91 लाख रुपए के खर्च का हिसाब नहीं मिल रहा है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) की जांच रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रभारी प्रधानाध्यापक सुनील कुमार सिंह के कार्यकाल में विकास कोष से राशि खर्च की गई, लेकिन इससे जुड़े जरूरी अभिलेख और कराए गए निर्माण कार्यों के साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए। मामले में दो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायत के बाद शुरू हुई जांच मामला कमांड कंट्रोल पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत में पूर्व प्रभारी प्रधानाध्यापक पर वित्तीय राशि के दुरुपयोग और नवपदस्थापित प्रधानाध्यापक को वित्तीय प्रभार नहीं सौंपने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद बीईओ पिपरा मनीकांत कुमार को जांच की जिम्मेदारी दी गई। दो बार स्कूल पहुंचे बीईओ, नहीं मिले जरूरी कागजात बीईओ ने 20 जुलाई 2026 को विद्यालय पहुंचकर जांच की। इस दौरान विद्यालय के लिपिक सनोज कुमार से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की बात सामने आई। 23 जुलाई को बीईओ दोबारा विद्यालय पहुंचे और अभिलेख मांगे, लेकिन संबंधित कागजात उपलब्ध नहीं कराए गए। बीईओ कार्यालय ने छात्र कोष, विकास कोष, जमीन की नीलामी प्रक्रिया से संबंधित पंजी, रोकड़ पंजी और पासबुक समेत अन्य जरूरी अभिलेख उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसके लिए 24 जुलाई तक का समय दिया गया था। ₹20.91 लाख के खर्च का साक्ष्य नहीं मिला बीईओ की जांच रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रभारी प्रधानाध्यापक सुनील कुमार सिंह के कार्यकाल में विकास कोष से 20,91,003.70 रुपए खर्च किए गए। लेकिन जांच के दौरान बैठक पंजी, सूचना पंजी, स्टॉक पंजी और बिल-विपत्र उपलब्ध नहीं कराए गए। इस राशि से कराए गए निर्माण कार्यों के साक्ष्य भी नहीं मिले। विभागीय पत्र में इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए राशि के गबन की आशंका जताई गई है। 29 जुलाई को डीईओ को भेजी गई रिपोर्ट बीईओ ने 29 जुलाई को जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) को जांच रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानाध्यापक ने सभी अभिलेख डीईओ कार्यालय में जमा होने की बात कही थी, लेकिन जांच के लिए बीईओ को रिकॉर्ड नहीं मिले। उपलब्ध अभिलेखों की जांच में जमीन की डाक प्रक्रिया में भी अनियमितता की बात सामने आई। इसके बाद 1 सितंबर को दोबारा जांच रिपोर्ट जारी की गई। हालांकि, अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। जांच के बाद होगी कार्रवाई डीपीओ माध्यमिक आलोक शेखर आनंद ने बताया कि मामला फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं है। यदि राशि का हिसाब नहीं मिल रहा है या गबन का मामला है, तो जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं, बीईओ पिपरा मनीकांत कुमार ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद जांच की गई थी। संबंधित कागजात उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके बाद जिला स्तर पर जांच रिपोर्ट सौंप दी गई है।  

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