दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान, पुलिस द्वारा समय रहते, उचित और कानूनी कदम उठाए जाने से कानून-व्यवस्था की एक बड़ी समस्या टल गई। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार, जिन्होंने अदालत की अवमानना के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है, ने कहा कि 10 अक्टूबर को – जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था – तब उठाए गए एहतियाती कदम खुफिया इनपुट और ज़मीनी हालात के आकलन पर आधारित थे, जो लगातार बदल रहे थे।
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दिल्ली पुलिस ने पुलिस प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों का जिक्र किया
सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने पुलिस प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों का जिक्र किया, जिसमें दिल्ली में मेट्रो रेल सेवाओं को विनियमित करना भी शामिल है। उन्होंने कहा ये कदम राष्ट्रीय राजधानी में शांति और व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए उठाए गए थे। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने कहा कि पुलिस द्वारा किए गए प्रयासों और उठाए गए कदमों को इस संदर्भ में देखा जाना चाहिए कि दिल्ली देश की राजधानी है, और हर राष्ट्रीय राजधानी की अपनी कुछ संवेदनशील बातें होती हैं। हलफनामे में उन्होंने कहा कोई भी पुलिस प्रशासन राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक व्यवस्था के उल्लंघन की अनुमति नहीं दे सकता। खासकर तब, जब ऐसा आह्वान किसी ऐसे संगठन की ओर से किया गया हो, जिसका हालिया इतिहास भीड़ द्वारा हिंसा, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, और ऐसी घटनाओं का रहा हो जिनमें कई लोग घायल हुए हों—साथ ही 6, 7 और 8 अक्टूबर की घटनाएं भी इसमें शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा पुलिस प्रशासन के नेक इरादों से किए गए प्रयासों के बावजूद, उनके द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर एक गलत नैरेटिव (धारणा) फैलाने की कोशिश की जा रही है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर अवमानना मामले में हलफनामा दाखिल किया गया
गौरतलब है कि यह हलफनामा एक अवमानना मामले में दाखिल किया गया है। यह मामला 10 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर “पूर्ण प्रतिबंध” न लगाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के कथित उल्लंघन से जुड़ा है। 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने, जिन्होंने विरोध-प्रदर्शन के कारण दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध न लगाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के उल्लंघन का आरोप लगाया था, एक “प्रथम दृष्टया” (prima facie) मामला बना दिया है।

