किशनगंज के दल्लेगांव पंचायत के पश्चिम टोला में अधूरे अप्रोच रोड और मेची नदी में पुल के अभाव ने एक बार फिर एक परिवार की खुशियां छीन ली। पश्चिम टोला निवासी कमरूज्जमा उर्फ गली की पत्नी हैजून निशा का आज सुबह अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही इंतकाल हो गया। उन्हें हार्ट अटैक आया था। परिजन और ग्रामीणों का आरोप है कि अगर अप्रोच रोड और नदी पर पुल बना होता तो उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था। ग्रामीणों के मुताबिक, दल्लेगांव में यह कोई पहली घटना नहीं है। यहां के लोगों को सालों से आवागमन की गंभीर समस्या झेलनी पड़ रही है। बरसात में हालात और बदतर हो जाते हैं। सामाजिक कार्यों में भी आती है दिक्कत इमरजेंसी में मरीजों, गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। लोगों को मरीज को कंधे पर या नाव के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। इस समस्या का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ रहा है। किसी के इंतकाल के बाद मैयत को लाने-ले जाने में भी इसी तरह परेशानी होती है। आज भी महिला की मैयत को नाव और कंधे के सहारे लाना पड़ा। इसके अलावा शादी-विवाह जैसे सामाजिक कार्यों में भी दिक्कत आती है। प्रशासन से जल्द निर्माण की मांग की ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत देखकर कई बार लोग रिश्ता करने से भी पीछे हट जाते हैं। इस मुद्दे को लेकर दल्लेगांव पंचायत संघर्ष कमेटी लगातार आवाज उठा रही है। कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद जहुर रज़वी ने कहा, “अगर अप्रोच रोड बना होता तो मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में आसानी होती। आज जो परेशानी मैयत लाने में हुई, उससे भी राहत मिलती।” सचिव डॉ. रिजवान और कोषाध्यक्ष सोहेल अख्तर ने भी प्रशासन से जल्द निर्माण की मांग की है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता पर लेते हुए अप्रोच रोड का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए, ताकि आगे किसी की जान सड़क के अभाव में न जाए। किशनगंज के दल्लेगांव पंचायत के पश्चिम टोला में अधूरे अप्रोच रोड और मेची नदी में पुल के अभाव ने एक बार फिर एक परिवार की खुशियां छीन ली। पश्चिम टोला निवासी कमरूज्जमा उर्फ गली की पत्नी हैजून निशा का आज सुबह अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही इंतकाल हो गया। उन्हें हार्ट अटैक आया था। परिजन और ग्रामीणों का आरोप है कि अगर अप्रोच रोड और नदी पर पुल बना होता तो उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था। ग्रामीणों के मुताबिक, दल्लेगांव में यह कोई पहली घटना नहीं है। यहां के लोगों को सालों से आवागमन की गंभीर समस्या झेलनी पड़ रही है। बरसात में हालात और बदतर हो जाते हैं। सामाजिक कार्यों में भी आती है दिक्कत इमरजेंसी में मरीजों, गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। लोगों को मरीज को कंधे पर या नाव के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। इस समस्या का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ रहा है। किसी के इंतकाल के बाद मैयत को लाने-ले जाने में भी इसी तरह परेशानी होती है। आज भी महिला की मैयत को नाव और कंधे के सहारे लाना पड़ा। इसके अलावा शादी-विवाह जैसे सामाजिक कार्यों में भी दिक्कत आती है। प्रशासन से जल्द निर्माण की मांग की ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत देखकर कई बार लोग रिश्ता करने से भी पीछे हट जाते हैं। इस मुद्दे को लेकर दल्लेगांव पंचायत संघर्ष कमेटी लगातार आवाज उठा रही है। कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद जहुर रज़वी ने कहा, “अगर अप्रोच रोड बना होता तो मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में आसानी होती। आज जो परेशानी मैयत लाने में हुई, उससे भी राहत मिलती।” सचिव डॉ. रिजवान और कोषाध्यक्ष सोहेल अख्तर ने भी प्रशासन से जल्द निर्माण की मांग की है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता पर लेते हुए अप्रोच रोड का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए, ताकि आगे किसी की जान सड़क के अभाव में न जाए।

