बेमौसम बारिश से सोनीपत-गोहाना की मंडियों में जलभराव:अनाज मंडी में भीगी धान की ढेरियां; सुबह 8 बजे छाया अंधेरा, तेज आंधी से उड़े टीन शेड

बेमौसम बारिश से सोनीपत-गोहाना की मंडियों में जलभराव:अनाज मंडी में भीगी धान की ढेरियां; सुबह 8 बजे छाया अंधेरा, तेज आंधी से उड़े टीन शेड

हरियाणा में मौसम बदलने के बाद सोनीपत जिले में बेमौसम बारिश ने जनजीवन के साथ किसानों की परेशानी भी बढ़ा दी। सुबह करीब 8 बजे सोनीपत और गोहाना में अंधेरा छाने से रात जैसा नजारा देखने को मिला। सुबह से दोपहर तक रुक-रुककर झमाझम बारिश हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में तेज आंधी के चलते दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ी, वहीं कई जगह टीन शेड उड़कर गिर गए। बारिश से सोनीपत शहर की सड़कों और गोहाना की अनाज मंडी में जलभराव हो गया। मंडी में खुले में रखी धान की ढेरियां भीगने से किसानों की चिंता बढ़ गई। खेतों में पककर तैयार खड़ी फसल पर भी तेज हवाओं का असर पड़ा है। दोपहर बाद हल्की धूप निकली। लेकिन मौसम में बदलाव के चलते दिन में भी लोगों को ठंड महसूस हुई। सोनीपत में बारिश की अलग-अलग तस्वीर देखिए…
सुबह 8 बजे ही छाया अंधेरा, तेज आंधी से परेशानी सोनीपत और गोहाना में सुबह के समय आसमान में बादल छाने के साथ तेज बारिश हुई। सुबह करीब 8 बजे अंधेरा होने से रात जैसा माहौल बन गया। सोनीपत के ग्रामीण क्षेत्रों में तेज आंधी चली, जिससे दोपहिया वाहन चालकों को आवाजाही में परेशानी हुई। कई जगह टीन शेड उड़कर गिर गए। सुबह से दोपहर तक रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी रहा। मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण दिन के समय भी लोगों को ठंड महसूस हुई। गोहाना की अनाज मंडी में भरा पानी, धान की ढेरियां भीगीं बारिश के कारण गोहाना की सड़कों पर पानी भर गया। अनाज मंडी में भी जलभराव की स्थिति बन गई। बिक्री के लिए खुले में रखी किसानों की धान की ढेरियां बारिश में भीग गईं। सोनीपत शहर की मंडी में भी कुछ ढेरियों के नीचे पानी जमा दिखाई दिया। किसानों का कहना है कि तीन-चार दिन पहले हुई बारिश में भी धान भीग गया था। अब दोबारा बारिश होने से फसल को सुरक्षित रखने की चिंता बढ़ गई है। पानी निकासी के इंतजाम नहीं होने का आरोप किसानों ने आरोप लगाया कि मंडी में बारिश के पानी की निकासी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। बारिश के बाद पानी जमा होने से खुले में रखी धान की ढेरियों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि मंडी में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए, ताकि बारिश के दौरान उनकी फसल सुरक्षित रह सके। धान सूखने तक खरीद प्रभावित होने की आशंका किसानों के मुताबिक, जब तक बारिश में भीगा धान अच्छी तरह सूख नहीं जाता, तब तक सरकारी खरीद और राइस मिलों की ओर से खरीद प्रभावित हो सकती है। ऐसे में मंडी में धान लेकर पहुंचे किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। पहले से ही धान के कम भाव मिलने से परेशान किसानों की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। तेज हवाओं से खेतों में खड़ी फसल गिरने का खतरा बेमौसम बारिश और तेज हवाओं का असर खेतों में पककर तैयार खड़ी फसल पर भी पड़ा है। किसानों के अनुसार, तेज हवाओं के कारण कई जगह फसल गिर गई है। इससे उत्पादन प्रभावित होने और नुकसान होने की आशंका है। किसानों को डर है कि यदि मौसम इसी तरह खराब रहा तो फसल की गुणवत्ता और पैदावार पर असर पड़ सकता है। लागत निकालना और कर्ज चुकाना मुश्किल किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद, बुआई, कटाई और अन्य कृषि कार्यों पर काफी खर्च करना पड़ता है। कई किसानों को इन खर्चों के लिए कर्ज भी लेना पड़ता है। ऐसे में बारिश से फसल खराब होने और मंडी में उचित भाव नहीं मिलने पर लागत निकालना तथा कर्ज चुकाना मुश्किल हो सकता है। किसानों के अनुसार, मौसम की मार और धान के कम भाव दोनों मिलकर उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ा रहे हैं। सरकार और प्रशासन से राहत की मांग किसानों ने सरकार और प्रशासन से मंडियों में पानी निकासी की उचित व्यवस्था करने तथा बारिश से प्रभावित किसानों को राहत देने की मांग की है। उनका कहना है कि मंडियों में जलभराव रोकने के लिए समय रहते इंतजाम किए जाने चाहिए, ताकि खुले में रखी फसल को नुकसान से बचाया जा सके। फिलहाल बेमौसम बारिश ने गोहाना की मंडी में व्यवस्थाओं और किसानों की समस्याओं को फिर उजागर कर दिया है। दोपहर बाद निकली हल्की धूप सुबह से दोपहर तक रुक-रुककर बारिश होने के बाद दोपहर के समय हल्की धूप निकली। हालांकि, मौसम में बदलाव के कारण दिन के समय भी ठंड का अहसास हुआ। बारिश और तेज हवाओं के चलते जहां आम जनजीवन प्रभावित हुआ, वहीं किसानों को अपनी धान की फसल बचाने की चिंता सताने लगी है। अब किसानों की नजर मौसम पर टिकी है, ताकि मंडी में भीगी धान की फसल सूख सके और खरीद प्रक्रिया प्रभावित न हो।

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