Pope Leo lung Cancer: जब दुनिया के बड़े आध्यात्मिक गुरुओं में से किसी की सेहत पर कोई संकट आता है, तो लोगों की चिंता बढ़ जाना लाजिमी है। कुछ ऐसा ही माहौल इन दिनों वेटिकन में बना हुआ है, कैथोलिक गिरजाघर के पोप और वैटिकन सिटी के प्रमुख XIV पोप लियो (Pope Leo) की लंग कैंसर सर्जरी की खबर सामने आई है। इसका खुलासा खुद पोप लियो ने किया था। उन्होंने अपने एक संबोधन के दौरान बताया था कि हाल ही में उनके कुछ नियमित मेडिकल चेकअप्स और रूटीन परिक्षण किए गए थे। इन्हीं जांचों के दौरान डॉक्टर्स ने उनके फेफड़े (lung) में एक छोटा सा नोड्यूल (nodule या गांठ) देखा। आइए जानते हैं कि पूरी खबर क्या है।
ये कब हुआ और पोप लियो इसके बारे में कैसे पता चला?
रॉयटर्स के मुताबिक, 71 वर्षीय पोप लियो को इस शुरुआती गांठ के बारे में अक्टूबर 2026 के दूसरे हफ्ते में पता चला। इसके तुरंत बाद, 13 अक्टूबर 2026 को उन्हें रोम के प्रसिद्ध जेमेली यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल (Gemelli University Hospital) में भर्ती कराया गया। उसी दिन उनके फेफड़े की सर्जरी की गई। वेटिकन और डॉक्टरों के मुताबिक, यह सर्जरी लगभग 90 मिनट तक चली (जबकि पूरी प्रक्रिया में करीब 3 घंटे का समय लगा)। सर्जरी के बाद डॉक्टर्स ने पुष्टि की कि प्रक्रिया पूरी तरह सफल रही और पोप ने अस्पताल में एक शांत व आरामदायक रात बिताई।
लंग कैंसर क्या है? (What is Lung Cancer)
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, लंग कैंसर (Lung Cancer) एक ऐसी बीमारी है जिसमें फेफड़ों की कोशिकाओं में असामान्य रूप से अनियंत्रित वृद्धि होने लगती है। पोप लियो के मामले में डॉक्टर्स ने सर्जरी के दौरान निकाली गई टिश्यू (ऊतक) की जांच के बाद लंग एडेनोकार्सिनोमा (Lung Adenocarcinoma) की पुष्टि की है। यह Non-small-cell lung cancer का एक बहुत ही आम प्रकार है, जो आमतौर पर फेफड़ों के बाहरी हिस्सों की कोशिकाओं में शुरू होता है।
किसी भी कैंसर के खतरे का स्तर मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी का पता किस स्टेज पर चला है, पोप लियो के मामले में यह नोड्यूल बहुत शुरुआती और प्रारंभिक चरण में ही डिटेक्ट हो गया था, विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती अवस्था के लंग कैंसर का इलाज सर्जरी के जरिए सफलता पूर्वक किया जा सकता है और इसके ठीक होने की दर (Survival Rate) काफी अधिक होती है। डॉक्टरों ने उनके दाहिने फेफड़े के निचले हिस्से (lower lobe) को वीडियो-असिस्टेड तकनीक के जरिए सफलतापूर्वक निकाल दिया है। यदि कैंसर लिम्फ नोड्स तक नहीं फैला है, तो इस प्रकार की शुरुआती सर्जरी को काफी प्रभावी और इलाज में मददगार माना जाता है।
फेफड़े के एडेनोकार्सिनोमा के लक्षण (Symptoms)
मेयो क्लिनिक के अनुसार, शुरुआती चरणों में इसके लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते या सामान्य सर्दी-खांसी जैसे लगते हैं। बीमारी बढ़ने पर ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं;
- लगातार खांसी होना।
- खांसी में खून आना।
- सांस लेने में तकलीफ।
- छाती में दर्द होना।
- अकारण वजन घटना और भूख न लगना।
- थकान और कमजोरी होना।
- बार-बार लंग इंफेक्शन होना।

