रायसेन में नवरात्रि में कहीं माता के भव्य दरबार सजे हैं तो कहीं विशाल प्रतिमाओं के दर्शन हो रहे है। शहर के वार्ड 14 स्थित राहुल नगर में एक ऐसा पंडाल तैयार किया गया है, जहां माता के दर्शन करने से पहले श्रद्धालुओं का सामना 15 भूतों से होता है। काले कपड़ों, लटकती बेलों और डरावने चेहरों के बीच तैयार इस रहस्यमयी ‘भूत बंगले’ को देखने के लिए शहरभर से लोग पहुंच रहे हैं। इस झांकी की खासियत यह है कि यहां प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को किसी रहस्यमयी दुनिया में पहुंचने जैसा अनुभव होता है। पंडाल के मुख्य द्वार से लेकर अंदर तक अलग-अलग रूपों में भूतों लटकाया गया है। कहीं भूत द्वारपाल बनकर खड़ा है तो कहीं भूत दूल्हा-दुल्हन झूला झूलते नजर आते हैं। एक स्थान पर लेटी हुई लाश का दृश्य भी बनाया गया है, जिसे समिति अध्यक्ष पृथ्वी चौहान ने मोक्ष के अंतिम द्वार की कल्पना से जोड़ा है। काले पर्दों के पीछे छिपा है आस्था का अनोखा संसार
पूरे पंडाल को काले कपड़ों और बेलों से सजाकर ऐसा दृश्य तैयार किया गया है, जो बाहर से किसी डरावने भूत बंगले जैसा दिखाई देता है। बेलों पर भी अलग-अलग भूतों की आकृतियां लटकाई गई हैं। अंदर प्रवेश करने पर एक के बाद एक रहस्यमयी दृश्य सामने आते हैं। डरावने माहौल के बीच श्रद्धालुओं की उत्सुकता उस समय और बढ़ जाती है, जब वे पंडाल के अंतिम हिस्से में पहुंचते हैं। 15 फीट की झांकी में माता भद्रकाली और भगवान कालभैरव
भूतों के इस संसार के अंतिम हिस्से में माता भद्रकाली और भगवान कालभैरव की करीब 15 फीट ऊंची भव्य झांकी स्थापित की गई है। भगवान कालभैरव के गले में नरमुंडों की माला दिखाई गई है। झांकी समिति अध्यक्ष पृथ्वी चौहान के अनुसार, भगवान कालभैरव और माता भद्रकाली के साथ भूत-पिशाचों को सेवा में रहने वाला माना जाता है। इसी स्वरूप को लोगों के सामने प्रस्तुत करने के उद्देश्य से इस बार सामान्य सजावट से हटकर भूतों वाला पंडाल बनाया गया है।

