चेक बाउंस पड़ा भारी, 6 महीने की जेल:झज्जर में ट्रैक्टर के लिए लिया था 4 लाख का लोन,कोर्ट ने दिए 4.50 लाख देने के आदेश

चेक बाउंस पड़ा भारी, 6 महीने की जेल:झज्जर में ट्रैक्टर के लिए लिया था 4 लाख का लोन,कोर्ट ने दिए 4.50 लाख देने के आदेश

झज्जर में ट्रैक्टर खरीदने के लिए फाइनेंस कंपनी से 4 लाख का लोन लिया, लेकिन किस्तें नहीं चुकाईं। बकाया राशि के भुगतान के लिए दिया गया चेक भी बैंक में बाउंस हो गया। करीब साढ़े चार साल तक चले कानूनी मामले में अब कोर्ट ने आरोपी को 6 महीने की कैद की सजा सुनाई है। साथ ही शिकायतकर्ता फाइनेंस कंपनी को 4.50 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है। ट्रैक्टर के लिए लिया था 4 लाख का लोन मामला झज्जर जिले के गांव कीलरोध निवासी सोनू से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, सोनू ने 31 मार्च 2021 को आयशर 333 ट्रैक्टर खरीदने के लिए श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड की झज्जर शाखा से 4 लाख का लोन लिया था। समझौते के मुताबिक, उसे यह रकम मासिक किस्तों में चुकानी थी, लेकिन उसने किस्तों का भुगतान बंद कर दिया। 4 लाख का चेक भी हो गया बाउंस कंपनी के अनुसार, बकाया राशि चुकाने के लिए सोनू ने उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक की झज्जर शाखा का 4 लाख का चेक दिया था। कंपनी ने चेक अपने बैंक खाते में जमा कराया तो 4 मार्च 2022 को वह खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद कंपनी ने 11 मार्च 2022 को आरोपी को रजिस्टर्ड डाक से कानूनी नोटिस भेजा। आरोप था कि नोटिस मिलने के बाद भी उसने निर्धारित 15 दिनों के भीतर बकाया राशि का भुगतान नहीं किया। इसके बाद कंपनी ने अधिकृत प्रतिनिधि राजेश कुमार के माध्यम से 19 अप्रैल 2022 को अदालत में शिकायत दायर की। बचाव में कहा- सिक्योरिटी चेक का किया इस्तेमाल सुनवाई के दौरान आरोपी ने दलील दी कि चेक सिक्योरिटी के तौर पर लिया गया था और कंपनी ने उसका दुरुपयोग किया। हालांकि, आरोपी की ओर से बचाव में कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया। अदालत ने मामले के दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों पर विचार किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल चेक को सिक्योरिटी चेक बताने से कानूनी देनदारी खत्म नहीं हो जाती। यदि बकाया कर्ज चुकाने के लिए दिया गया चेक निर्धारित परिस्थितियों में बाउंस होता है, तो परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत कार्रवाई हो सकती है। परिवार का हवाला देकर मांगी राहत 9 अक्टूबर 2026 को अदालत ने सोनू को दोषी ठहराया था। इसके बाद 13 अक्टूबर को सजा की मात्रा पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष के वकील मनोज गौर ने आरोपी के पारिवारिक हालात का हवाला देते हुए नरमी बरतने और प्रोबेशन का लाभ देने की मांग की। उन्होंने बताया कि आरोपी के तीन बच्चे और वृद्ध माता-पिता उस पर आश्रित हैं। वहीं, शिकायतकर्ता कंपनी के वकील कपिल चौहान ने आर्थिक अपराध का हवाला देते हुए सजा देने की मांग की। 6 महीने की कैद, 3 महीने में देना होगा मुआवजा दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद झज्जर की एनआई एक्ट विशेष अदालत में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी आदित्य वर्मा ने आरोपी सोनू को धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए 6 महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड को 4.50 लाख मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। यह रकम तीन महीने के भीतर जमा करनी होगी। मुआवजा नहीं देने पर आरोपी को एक महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।

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