सवाल- मेरी शादी को तीन साल हो चुके हैं। मैं और मेरे पति दोनों नौकरी करते हैं। हमारी कमाई अच्छी है और मैं अब तक यही समझती थी कि हम दोनों मिलकर भविष्य के लिए अच्छी बचत कर रहे हैं। पिछले दिनों घर के कुछ जरूरी कामों के लिए पैसे निकालने की बात हुई, तो पता चला कि मेरे पति पर लाखों रुपए का लोन है। उन्होंने यह बात मुझे कभी नहीं बताई। पूछने पर बोले कि वे मुझे परेशान नहीं करना चाहते थे और धीरे-धीरे कर्ज चुका देते। लेकिन मुझे इस बात से ज्यादा तकलीफ है कि उन्होंने इतना बड़ा आर्थिक फैसला मुझसे छिपाया। अब मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं उन पर भरोसा कैसे करूं? क्या ये धोखा है? मैं क्या महसूस करूं? क्या करूं? एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा पति के लाखों रुपए के कर्ज की जानकारी मिलने पर आपका भरोसा हिलना स्वाभाविक है। ऐसे में दुख, गुस्सा और धोखा महसूस हो सकता है। मन में यह सवाल भी उठना लाजिमी है कि जब पति ने इतनी बड़ी बात छिपाई, तो क्या वे आगे भी कुछ छिपा सकते हैं? अपनी भावनाओं को गलत न समझें। आपको दुखी होने, नाराजगी जताने और पति से इस फैसले की वजह पूछने का पूरा हक है। क्या इसे धोखा माना जाए? रिश्ते में बातें छिपाना पार्टनर का भरोसा तोड़ सकता है। अगर पति ने लाखों रुपए का कर्ज लिया और ये बात आपसे जानबूझकर छिपाकर रखी तो जाहिर तौर पर यह आपका भरोसा तोड़ना ही है। हालांकि, इसे किस हद तक धोखा कहा जाए, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कर्ज लेने की वजह क्या थी और उसे छिपाने की मंशा क्या थी। रिश्ते में दोनों को अपनी निजता और स्वतंत्रता बनाए रखने का हक है। लेकिन कर्ज जैसी बात छिपाना निजता और स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आता क्योंकि इसका असर दोनों के भविष्य पर पड़ता है। मसलन, इससे इन योजनाओं में बदलाव करना पड़ सकता है- आगे बढ़ने से पहले निजता और बात छिपाने में फर्क समझ लेते हैं- कमजोर होता भरोसा पार्टनर से कर्ज, खर्च या दूसरे जरूरी आर्थिक फैसले छिपाने को ‘फाइनेंशियल इनफिडेलिटी’ कहते हैं। थेरेपिस्ट टेरी गैस्पर्ड ने अपनी किताब ‘लेट्स टॉक अबाउट मनी: लो- कॉन्फ्लिक्ट कन्वर्सेशंस फॉर कपल्स’ में पैसों को लेकर बातचीत और रिश्तों में पैदा होने वाले तनाव पर चर्चा की है। टेरी गैस्पर्ड कहती हैं कि आर्थिक मामलों में जरूरी बातें छिपाने से पार्टनर के बीच भरोसा कमजोर होता है और रिश्ते में दूरी बढ़ सकती है। पति ने कर्ज की बात क्यों छिपाई होगी? संभव है कि पति को अपनी आर्थिक स्थिति पर शर्मिंदगी हो या वे आपके नाराज होने से डरते हों। कुछ लोग तनावपूर्ण स्थितियों का सामना करने की बजाय उनसे बचने की कोशिश करते हैं। मनोविज्ञान में इसे ‘अवॉइडेंस’ यानी समस्या से बचने वाला व्यवहार कहते हैं। इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं- रिश्ते में ओपन कम्युनिकेशन जरूरी कुछ लोग सोचते हैं कि बात छिपाने से फिलहाल परेशानी टल जाएगी और वो टल भी जाती है। लेकिन यह राहत सिर्फ थोड़े समय ही होती है। जैसे ही पार्टनर को सच का पता चलता है, उसे लगता है कि उसे धोखा दिया गया है। फिर यह अविश्वास ज्यादा बड़ी परेशानी खड़ी करता है। इसलिए बात छिपाने से समस्या खत्म नहीं होती। सबसे अच्छा और सही तरीका है, सच बोलना। चाहे वह सुनने में कितना भी कड़वा और तकलीफदेह क्यों न हो। थोड़ी देर परेशानी होती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में भरोसा मजबूत होता है। कहीं आपको कोई गिल्ट तो नहीं? कई बार ऐसे खुलासे के बाद व्यक्ति अपने ही फैसलों पर संदेह करने लगता है। उसे लगता है कि वह अपने साथी को ठीक से समझ ही नहीं पाया। लेकिन पति कोई बात क्यों छिपा रहा है, इसमें आपका कोई रोल नहीं है। इसलिए आपको खुद को दोष नहीं देना चाहिए। आगे का फैसला क्या होगा? अभी तुरंत यह फैसला करने का दबाव न लें कि आपको उन्हें माफ करना है या रिश्ता खत्म करना है। पहले पूरी जानकारी जुटाएं। खुद को थोड़ा समय दें। भावनाओं को दबाने की बजाय उन्हें समझने की कोशिश करें। इसके लिए पहचानें कि इस स्थिति में आप क्या महसूस कर रही हैं। इसे ऐसे समझिए- पति से खुलकर करें बात जब मन थोड़ा शांत हो, तब पति से खुलकर बात करें। इस दौरान आरोप न लगाएं। आपका मकसद सच जानना और आगे का रास्ता तय करना होना चाहिए। आप उनसे कुछ सीधे सवाल पूछ सकती हैं- बातचीत में यह भी साफ करें कि आपको कर्ज होने से ज्यादा उसे छिपाए जाने से चोट पहुंची है। कैसे करें फिर से भरोसा? सिर्फ माफी मांग लेने से भरोसा वापस नहीं आता। इसके लिए पति के व्यवहार में लगातार ईमानदारी और जिम्मेदारी दिखनी चाहिए। ध्यान दें कि पति आपकी परेशानी को समझते हैं या उसे छोटा बताकर टाल देते हैं, जैसेकि– अगर पति इन बातों पर अमल करते हैं, तो भरोसा धीरे-धीरे लौट सकता है। लेकिन अगर वे बार-बार झूठ बोलते हैं, कर्ज की जानकारी देने से इनकार करते हैं या आपको ही दोषी ठहराते हैं, तो इसे गंभीरता से लें। अंतिम बात आप भी अपनी भावनाओं को समझने और उनके व्यवहार में बदलाव देखने के लिए समय लें। जरूरत पड़े तो कपल काउंसलिंग की मदद लें। भरोसा दोबारा बन सकता है, लेकिन इसके लिए सिर्फ आपकी नहीं, बल्कि दोनों की साझी इच्छा और कोशिश जरूरी है। …………………. ग्राफिक- अजीत सिंह …………………… ये खबर भी पढ़ें….
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