केमिस्ट्री पढ़ाने के बदले लाखों लेता था आरोपी कोचिंग संचालक:गिरफ्तारी से बचने डॉक्यूमेंट्स देहरादून एड्रेस के बनवा लिए; उम्र ज्यादा होने पर नौकरी से निकाला

केमिस्ट्री पढ़ाने के बदले लाखों लेता था आरोपी कोचिंग संचालक:गिरफ्तारी से बचने डॉक्यूमेंट्स देहरादून एड्रेस के बनवा लिए; उम्र ज्यादा होने पर नौकरी से निकाला

सीकर में युवाओं से लाखों ठगने वाले शातिर आरोपी संचालक कल्याण सिंह (56) को ओवरएज होने के कारण अब नौकरी नहीं मिल रही थी। उसने घर पर ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया था। सीकर से फरार होने के बाद वह देहरादून में छिपा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने डॉक्यूमेंट्स भी देहरादून एड्रेस के बनवा लिए थे। आरोपी बीएड करवाने के नाम पर युवाओं से ठगी करता था। पुलिस ने आरोपी को टेक्निकल सोर्सेस और मुखबिर की इनफॉरमेशन के आधार पर देहरादून के प्रेम नगर से 10 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। पुलिस उसे 11 अक्टूबर को सीकर लेकर आई। जयपुर रेंज आईजी राहुल प्रकाश की टीम और सीकर कोतवाली थाना पुलिस एयरटेल फाइबर टेक्नीशियन बनकर पहुंची थी। जिसके बाद उसे घर से दबोच लिया। आरोपी ने शुरुआत में देहरादून में छिपने के बाद सबसे पहले अपने डॉक्यूमेंट्स देहरादून एड्रेस के बनवाए, जिससे कि पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर सके। वह 18 साल से फरार चल रहा था। आरोपी 18 साल फरारी के दौरान देश की कई बड़ी कोचिंगों में पढ़ाता था। उसने अपने परिवार और रिश्तेदारों से कांटेक्ट करना बंद कर दिया था, जिससे कि उसे पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सके। 23 मुकदमे होने के बाद भी कभी पुलिस के हाथ नहीं लगा। अब पढ़िए पूरी कहानी.… आरोपी कल्याण सिंह (56) पुत्र भूर सिंह निवासी भोरटा, जिला जालोर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव में ही की। इसके बाद 8वीं से 12वीं क्लास की पढ़ाई करने के लिए वह अपने जीजा के पास बाड़मेर चला गया। 1997 में इंजीनियरिंग की परीक्षा पास की। सरकारी नौकरी की तैयारी की, लेकिन नौकरी नहीं लगी तो जयपुर आ गया। जयपुर में साल 2005 तक विवेकानंद कोचिंग सहित कई कोचिंग में पढ़ाई करवाई। साल 2005 में आरोपी सीकर आ गया। यहां 4 महीने तक टारगेट कोचिंग में आईआईटी और पीएमटी की कोचिंग कार्रवाई। चार महीने तक कोचिंग करवाने के बाद खुद सीकर के अशोक विहार में जनरल एजुकेशन क्लासेस नाम से खुद की कोचिंग शुरु कर की। विकास से मुलाकात के बाद शुरू की ठगी देखते ही देखते कोचिंग अच्छी चलने लगी। इसी बीच आरोपी की मुलाकात विकास सक्सेना से हुई। इसके बाद दोनों ने मिलकर स्टूडेंट्स को बीएड करवाने का काम शुरू किया। आरोपी मेरठ यूनिवर्सिटी के अधीन आने वाली कई कॉलेजों से बीएड करवाते थे, लेकिन वहां एक साथ 50 कॉलेजों की मान्यता रद्द हो गई। इसके बाद भी आरोपी नहीं रुके और स्टूडेंट्स से पैसा लेते रहे। 2008 में जब स्टूडेंट्स ने मुकदमे दर्ज करवाए तो आरोपी विकास सक्सेना पुलिस के हत्थे चढ़ गया, लेकिन आरोपी कल्याण सिंह फरार हो गया। उसने अपने गांव में कांटेक्ट और फोन पर बातचीत करना भी बंद कर दिया। फरार होने के बाद देहरादून में जा छिपा सीकर से फरार होने के बाद आरोपी सबसे पहले देहरादून गया। वहां कई कोचिंग में पढ़ाई करवाई। वह अपनी पत्नी और दोनों बच्चों को भी साथ ले गया। सबसे पहले किराए के मकान में रहने लगा और उसी के आधार पर वहां का राशन कार्ड तैयार करवाया। उस वक्त आधार कार्ड बनना शुरू ही हुए थे। ऐसे में राशन कार्ड के आधार पर आरोपी ने अपने डॉक्यूमेंट्स भी देहरादून एड्रेस पर बनवा लिए। देहरादून एड्रेस होने ने के कारण आरोपी का जब भी कहीं वेरिफिकेशन होता तो उसके आपराधिक रिकॉर्ड का पता ही नहीं चल पाता। क्योंकि देहरादून के एड्रेस पर उसके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज ही नहीं था। 2013 तक देहरादून में दूनविद्या, एड्युड्रीम सहित कई कोचिंग में पढ़ाने के बाद आरोपी नोएडा आ गया। यहां 1 साल तक किसी कोचिंग में नौकरी की। इसके बाद साल 2014 में अलीगढ़ चला गया। अलीगढ़ में करीब 3 साल तक आकाश कोचिंग में पढ़ाया। 2017 में महाराष्ट्र के अमरावती में आकाश कोचिंग में पढ़ाना शुरू कर दिया। 2018 में उस वक्त NEET/IIT का बूम था। आरोपी कल्याण सिंह ने सोचा कि कोचिंग में पढ़ाकर तो उसे कुछ ही रुपए मिलेंगे। इसलिए क्यों ना वह खुद ही अपने स्तर पर बच्चों को पढ़ाए। इसके बाद एक साल तक घर पर बच्चों को ट्यूशन कराया। 2019 में वापस किसी प्राइवेट कोचिंग में नौकरी करने के लिए चेन्नई चला गया। कोविड में चली गई नौकरी इसी बीच कोरोना काल में नौकरी चली गई तो देहरादून में घर पर रहकर ऑनलाइन क्लास लेना शुरू किया। जैसे ही कोरोना के बाद हालत ठीक हुए तो आरोपी ने एक बार फिर वाराणसी में आकाश कोचिंग में पढ़ाना शुरू किया। इसके बाद बंसल क्लासेस में नौकरी जॉइन की। मार्च 2023 में मध्य प्रदेश में कोचिंग करवाने चला गया और फिर 2023 अगस्त में सिलीगुड़ी में फिजिक्स वाला में नौकरी करना शुरू की। इसके बाद श्री चैतन्य कोचिंग जॉइन की। लेकिन साल 2025 में आरोपी 55 साल का हो चुका था। बड़ी कोचिंगों के नियमों के मुताबिक वे ज्यादा उम्र की फैकल्टी को अपने यहां पर नहीं रखते। ऐसे में जून 2025 में आरोपी की नौकरी चली गई। इसके बाद घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। उम्र ज्यादा होने पर रेजोनेंस कोचिंग से निकाला जून और जुलाई 2026 में एक बार फिर जैसे-जैसे रेजोनेंस कोचिंग में नौकरी लगी, लेकिन उन्होंने भी 2 महीने रखने के बाद उम्र ज्यादा होने का हवाला देतर नौकरी से निकाल दिया। इसके बाद आरोपी कोचिंगों से दूर हो गया और घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर गुजारा कर रहा था। मामले में कोतवाली थाना SHO सुनील कुमार जांगिड़ का कहना है कि फिलहाल आरोपी को जेल भेज दिया गया है। आरोपी के खिलाफ 23 मुकदमे दर्ज हैं। कोर्ट अब अलग-अलग मामलों में आरोपी को तलब करेगा। आरोपी ने इस तरह की ठगी की शुरुआत बता दें कि आरोपी कल्याण सिंह ने सीकर में अपने साथी आरोपी विकास सक्सेना के साथ मिलकर 2005 से लेकर 2008 के बीच अशोक विहार में जनरल एजुकेशन क्लासेस नाम से कोचिंग चलाई थी। जहां पर यह लोगों को राजस्थान प्रशासनिक सेवा, टीचर भर्ती समेत कई अन्य परीक्षाओं की तैयारी करवाते थे। उस समय काफी टीचर भर्ती परीक्षाएं आयोजित कराई गई। आरोपी के खिलाफ कुल 23 मुकदमे दर्ज हुए टीचर भर्ती परीक्षाओं में बीएड की डिग्री होना जरूरी था। आरोपियों ने सीकर में कोचिंग करने वाले दर्जनों स्टूडेंट्स से 70-80 हजार रुपए प्रति स्टूडेंट के हिसाब से लाखों रुपए ले लिए। लेकिन बीएड करवाने की बजाय 2008 में फरार हो गए। 2008 से लेकर 2013 के बीच सीकर के कोतवाली पुलिस थाने में आरोपियों के खिलाफ 23 मुकदमे दर्ज हुए। आरोपी कल्याण सिंह का साथी विकास सक्सेना गिरफ्तार हो चुका था, लेकिन आरोपी कल्याण सिंह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। कई बार उसकी तलाश में पुलिस ने उसके गांव और रिश्तेदारों के यहां दबिश दी, लेकिन आरोपी नहीं मिला। इसके बाद टेक्निकल सोर्सेस और मुखबिर की इनफॉरमेशन के आधार पर देहरादून के प्रेम नगर में जयपुर रेंज आईजी राहुल प्रकाश की टीम और कोतवाली पुलिस एयरटेल फाइबर टेक्नीशियन बनाकर गई और उसे घर से पकड़ लिया गया। ————- ये खबर भी पढ़िए… स्टूडेंट्स के 24 लाख लेकर भागा कोचिंग-संचालक गिरफ्तार:18 साल तक 17 राज्यों के बड़े इंस्टीट्यूट में पढ़ाकर काटी फरारी, टेक्नीशियन बनकर पुलिस ने दबोचा

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