भास्कर न्यूज | इटखोरी शारदीय दुर्गा पूजा में मां दुर्गा की आराधना, भक्ति और मेले की रौनक के बीच इस बार श्रद्धालुओं को मनोरंजन का नया आकर्षण भी मिलेगा। इटखोरी टाल दुर्गा पूजा समिति की ओर से तालाब में बोटिंग की व्यवस्था की गई है। इसके लिए दो हाईस्पीड बोट लाई गई हैं। बोट के संचालन से पहले समिति के अध्यक्ष, पदाधिकारियों और सदस्यों ने विधिवत पूजा-पाठ कर शुभारंभ किया। इस पहल से दुर्गा पूजा के दौरान इटखोरी आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को धार्मिक यात्रा के साथ मनोरंजन का अवसर भी मिलेगा। भक्ति के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल : इटखोरी की पहचान धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी हुई है। यहां स्थित मां भद्रकाली मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं का आगमन होता है। शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा के अवसर पर क्षेत्र में भक्तिमय माहौल के साथ मेले की रौनक भी बढ़ जाती है। ऐसे में इटखोरी टाल में बोटिंग की व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए नया आकर्षण बन सकती है। समिति के सदस्यों के अनुसार, बोटिंग की सुविधा तिलैया से उपलब्ध कराई गई है। हाईस्पीड बोट के अलावा मनोरंजन के लिए दो साइकिल बोट भी लाई जाएंगी। इससे तालाब में बोटिंग का आनंद लेने के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक और विकल्प मिलेगा। पूजा, दर्शन और सैर-सपाटे का मिलेगा अवसर : दुर्गा पूजा के दौरान दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन और पूजा-अर्चना के साथ मेले का आनंद लेते हैं। इस बार तालाब में बोटिंग की सुविधा उनके भ्रमण को और यादगार बनाने की उम्मीद है। परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों और युवाओं के लिए भी यह आकर्षण का केंद्र बन सकता है। समिति की इस पहल को धार्मिक आयोजन के साथ स्थानीय पर्यटन और मनोरंजन को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इससे क्षेत्र में उत्सव का माहौल और अधिक जीवंत होने की उम्मीद है। सुरक्षा भी रहेगी महत्वपूर्ण: अध्यक्ष इटखोरी टाल दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष अरविंद गिरी ने बताया कि बोटिंग के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। बोट की निर्धारित क्षमता का पालन, लाइफ जैकेट की उपलब्धता और संचालन के दौरान आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था पर्यटकों के लिए सुरक्षित अनुभव सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भास्कर न्यूज | पत्थलगडा पत्थलगडा प्रखंड के प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल लेंबोईया पहाड़ी स्थित अति प्राचीन सिद्धपीठ मां दक्षिणेश्वरी देवी चामुंडा मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। दूर-दराज के क्षेत्रों से भक्त पहुंचकर माता के दर्शन-पूजन कर रहे हैं। मंदिर में कलश स्थापना के साथ विधिवत पूजा-अर्चना हो रही है। सुबह से देर रात तक पहाड़ी पर भक्तों का तांता लगा रहता है। लेंबोईया-तेतरिया पूजा समिति की ओर से प्रतिदिन संध्या आरती के बाद भंडारे की व्यवस्था की गई है। प्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। सुबह और शाम महिलाएं बड़ी संख्या में पहुंचकर माता के भक्ति गीत गा रही हैं। इससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। लेंबोईया और तेतरिया गांव के ग्रामीणों के सहयोग से पूरी पहाड़ी को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मंदिर परिसर सहित पहाड़ी पर की गई दूधिया और रंग-बिरंगी रोशनी रात में अनुपम छटा बिखेर रही है। रोशनी से जगमगाती पहाड़ी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। नवरात्र के सफल आयोजन में पूजा समिति के अध्यक्ष गंदौरी राम दांगी, उपाध्यक्ष तीर्थनाथ दांगी, कोषाध्यक्ष विजय दांगी, मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष युगेश्वर प्रसाद, केदाराम दांगी, बालेश्वर दांगी, तथा अन्य ग्रामीण सक्रिय योगदान दे रहे हैं। भास्कर न्यूज | इटखोरी शारदीय दुर्गा पूजा में मां दुर्गा की आराधना, भक्ति और मेले की रौनक के बीच इस बार श्रद्धालुओं को मनोरंजन का नया आकर्षण भी मिलेगा। इटखोरी टाल दुर्गा पूजा समिति की ओर से तालाब में बोटिंग की व्यवस्था की गई है। इसके लिए दो हाईस्पीड बोट लाई गई हैं। बोट के संचालन से पहले समिति के अध्यक्ष, पदाधिकारियों और सदस्यों ने विधिवत पूजा-पाठ कर शुभारंभ किया। इस पहल से दुर्गा पूजा के दौरान इटखोरी आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को धार्मिक यात्रा के साथ मनोरंजन का अवसर भी मिलेगा। भक्ति के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल : इटखोरी की पहचान धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी हुई है। यहां स्थित मां भद्रकाली मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं का आगमन होता है। शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा के अवसर पर क्षेत्र में भक्तिमय माहौल के साथ मेले की रौनक भी बढ़ जाती है। ऐसे में इटखोरी टाल में बोटिंग की व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए नया आकर्षण बन सकती है। समिति के सदस्यों के अनुसार, बोटिंग की सुविधा तिलैया से उपलब्ध कराई गई है। हाईस्पीड बोट के अलावा मनोरंजन के लिए दो साइकिल बोट भी लाई जाएंगी। इससे तालाब में बोटिंग का आनंद लेने के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक और विकल्प मिलेगा। पूजा, दर्शन और सैर-सपाटे का मिलेगा अवसर : दुर्गा पूजा के दौरान दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन और पूजा-अर्चना के साथ मेले का आनंद लेते हैं। इस बार तालाब में बोटिंग की सुविधा उनके भ्रमण को और यादगार बनाने की उम्मीद है। परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों और युवाओं के लिए भी यह आकर्षण का केंद्र बन सकता है। समिति की इस पहल को धार्मिक आयोजन के साथ स्थानीय पर्यटन और मनोरंजन को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इससे क्षेत्र में उत्सव का माहौल और अधिक जीवंत होने की उम्मीद है। सुरक्षा भी रहेगी महत्वपूर्ण: अध्यक्ष इटखोरी टाल दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष अरविंद गिरी ने बताया कि बोटिंग के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। बोट की निर्धारित क्षमता का पालन, लाइफ जैकेट की उपलब्धता और संचालन के दौरान आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था पर्यटकों के लिए सुरक्षित अनुभव सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भास्कर न्यूज | पत्थलगडा पत्थलगडा प्रखंड के प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल लेंबोईया पहाड़ी स्थित अति प्राचीन सिद्धपीठ मां दक्षिणेश्वरी देवी चामुंडा मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। दूर-दराज के क्षेत्रों से भक्त पहुंचकर माता के दर्शन-पूजन कर रहे हैं। मंदिर में कलश स्थापना के साथ विधिवत पूजा-अर्चना हो रही है। सुबह से देर रात तक पहाड़ी पर भक्तों का तांता लगा रहता है। लेंबोईया-तेतरिया पूजा समिति की ओर से प्रतिदिन संध्या आरती के बाद भंडारे की व्यवस्था की गई है। प्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। सुबह और शाम महिलाएं बड़ी संख्या में पहुंचकर माता के भक्ति गीत गा रही हैं। इससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। लेंबोईया और तेतरिया गांव के ग्रामीणों के सहयोग से पूरी पहाड़ी को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मंदिर परिसर सहित पहाड़ी पर की गई दूधिया और रंग-बिरंगी रोशनी रात में अनुपम छटा बिखेर रही है। रोशनी से जगमगाती पहाड़ी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। नवरात्र के सफल आयोजन में पूजा समिति के अध्यक्ष गंदौरी राम दांगी, उपाध्यक्ष तीर्थनाथ दांगी, कोषाध्यक्ष विजय दांगी, मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष युगेश्वर प्रसाद, केदाराम दांगी, बालेश्वर दांगी, तथा अन्य ग्रामीण सक्रिय योगदान दे रहे हैं।

