कुशीनगर में विभिन्न मांगों को लेकर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल का असर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखने लगा है। मंगलवार को 102 डॉक्टरों के हड़ताल पर रहने से मरीजों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ा। सीएचसी और पीएचसी पर भी स्वास्थ्यकर्मियों के काम नहीं करने से ग्रामीण क्षेत्रों की सेवाएं प्रभावित रहीं। जिले में नियमित डॉक्टरों के 264 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 166 डॉक्टर तैनात हैं। इनमें 15 सीएचसी और 60 पीएचसी पर सेवाएं देने वाले डॉक्टर शामिल हैं। जिले में डॉक्टरों के 98 पद खाली हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य पर्यवेक्षक के 94 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 25 कर्मचारी और स्वास्थ्य कार्यकर्ता के 137 पदों के सापेक्ष 29 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और एक्स-रे टेक्नीशियन समेत अन्य पदों पर भी कर्मचारियों की कमी है। हड़ताल के कारण जिले के 15 सीएचसी, 60 पीएचसी, 205 आरोग्य मंदिर और करीब 400 एएनएम सेंटरों पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन केंद्रों पर तैनात संविदा कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने से स्थिति और बिगड़ गई है।
मेडिकल कॉलेज में बढ़ी मरीजों की भीड़ सीएचसी और पीएचसी पर इलाज नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। कसया क्षेत्र के नौगांवा निवासी दो वर्षीय कार्तिक जायसवाल को सीएचसी पर उपचार नहीं मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज लाया गया। परिजनों के मुताबिक, बच्चे को कई दिनों से बुखार था। इलाज के लिए उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी। मरीजों की संख्या बढ़ने से मेडिकल कॉलेज के पर्ची काउंटर और ओपीडी में भीड़ रही। डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ की उपलब्धता के बावजूद मरीजों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ा। मेडिकल कॉलेज के 135 एनएचएम कर्मी भी हड़ताल पर मेडिकल कॉलेज में तैनात 135 एनएचएम कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हैं। इनमें 16 डॉक्टर, 31 नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। इनकी सेवाएं प्रभावित होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उपलब्ध संसाधनों के जरिए व्यवस्था संभालने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, जिले के सीएमओ डॉ. चंद्र प्रकाश ने भी वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखने की बात कही है।

